खेल मंत्रालय का रवैया बदलना जरूरी: राज्यवर्धन सिंह राठौर

नई दिल्‍ली। खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने सोमवार को अपना पदभार संभालने के बाद स्पष्ट तौर पर कहा कि खेल मत्रांलय का रवैया बदलना जरूरी है और खिलाड़ियों को सम्मान तथा सुविधा देना उनकी पहली प्राथमिकता होगी.
खिलाड़ियों को सम्मान और सुविधा दिलाने को अपनी प्राथमिकता बताते हुए नये खेलमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने आज कहा कि मंत्रालय का माहौल बदलना जरूरी है और उनके लिये सिर्फ खिलाड़ी ही वीआईपी होंगे.
एथेंस ओलंपिक 2004 में निशानेबाजी में रजत पदक जीत चुके राठौर को विजय गोयल की जगह युवा कार्य और खेल मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है. कार्यभार संभालने के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, सबसे पहले मंत्रालय का माहौल बदलना होगा. मेरे लिये वीआईपी सिर्फ खिलाड़ी हैं, कोई और नहीं. यही रवैया सभी का होना चाहिये.
उन्होंने बतौर खिलाड़ी अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें खिलाड़ियों की दिक्कतों का अनुभव है और वे मंत्रालय से खिलाड़ियों का संपर्क आसान बनाने को प्राथमिकता रखेंगे.
जयपुर (ग्रामीण) से पहली बार संसद में आये राठौर ने कहा, खेल मंत्रालय तक का मेरा सफर रिसेप्शन से शुरू होता है जहां से भीतर आने के लिये अनुमति लेनी पड़ती है. खिलाड़ी के रूप में मुझे दिक्कतों का पता है लेकिन यहां अच्छे अधिकारी भी हैं जो खिलाड़ियों का संबल बनते हैं और मेरा लक्ष्य उनकी संख्या बढ़ाना है.
उन्होंने कहा, यह चौबीस घंटे का मंत्रालय होगा क्योंकि टूर्नामेंटों की तैयारियों में जुटे खिलाड़ियों को कभी भी हमारी जरूरत पड़ सकती है. हमें खिलाड़ियों के लिये हम तक पहुंचना आसान बनाना होगा. हम खिलाड़ियों की सेवा के लिये ही यहां हैं.
भारत के लिये ओलंपिक में व्यक्तिगत स्पर्धा का पहला रजत पदक जीतने वाले राठौर ने कहा कि उनका फोकस खिलाड़ियों को सम्मान और सुविधा दिलाना होगा.
उन्होंने कहा, हर खिलाड़ी को सम्मान और देश का प्रतिनिधित्व करने वालों को सुविधायें मुहैया कराना हमारा लक्ष्य होगा. खेल सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि युवाओं के लिये बहुत बड़ा मंच है. भारतीय युवाओं में अपार क्षमता है और उन्हें तलाशकर हमें खेलों और खिलाड़ियों का विकास करना है. राठौर ने केंद्र के अलावा राज्य सरकारों, कारपोरेट जगत, खेल संस्थानों से भी आगे आने की अपील की.
यह पूछने पर कि क्या खेल प्रशासन में खिलाड़ियों को अधिक जगह मिलेगी, उन्होंने कहा कि कोई भी जिम्मेदारी निभाने के लिये हमें कई लोगों के साथ की जरूरत होती है. मैं ऐसे लोगों की तलाश में हूं जिनमें प्रबंधन कौशल के साथ खिलाड़ी का दिल भी हो.
यह पूछने पर कि पूर्व खिलाड़ी होने के कारण क्या उन पर अपेक्षाओं का अधिक दबाव होगा, उन्होंने कहा कि खेलों ने उन्हें चुनौतियों का सामना करना सिखाया है.
उन्होंने कहा, अपेक्षाएं तो शुरू ही से रही हैं लेकिन एक खिलाड़ी हारने से कभी नहीं डरता. जीत हार के डर से पीछे हटना मैंने नहीं सीखा है. भारत युवाओं का देश है और इसे खेलों में महाशक्ति होना चाहिये.
खेल विकास विधेयक को संसद में लाने और खेलों को फिक्सिंग मुक्त कराने के लिये क्या प्रयास रहेंगे, यह पूछने पर उन्होंने कहा कि अभी मैने कार्यभार संभाला है. मैं विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं को देखूंगा. जहां तक फिक्सिंग की बात है तो खेलप्रेमी कभी नहीं चाहते कि उनके नायक इस तरह की गतिविधि में लिप्त हो. इसका ध्यान रखा जायेगा कि ऐसी चीजें भारतीय खेलों में ना हो.
-एजेंसी