चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग रुकी, लेकिन इसरो की सक्रियता को सराहा गया

नई दिल्ली। समूचे देशवासी सोमवार तड़के 2:51 बजने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे तभी करीब एक घंटे पहले चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग टलने की खबर आई।
दरअसल, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ( इसरो) ने प्रक्षेपण को तकनीकी खामी की वजह से टालने का फैसला किया। लॉन्चिंग देखने आए लोगों को इससे भले ही निराशा हाथ लगी हो पर सक्रियता और सही समय पर फैसला लेने के लिए इसरो की जमकर तारीफ हो रही है।
‘कुछ समय का विलंब बेहतर’
इसरो ने अपने ‘बाहुबली’ रॉकेट में तकनीकी खामी का पता सोमवार तड़के प्रक्षेपण से एक घंटा पहले लगा लिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसरो की प्रशंसा करते हुए कहा है कि ‘कभी नहीं’ से बेहतर ‘कुछ समय का विलंब’ होता है।
आपको बता दें कि लॉन्चिंग की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। कुल 978 करोड़ रुपये की लागत वाले चंद्रयान-2 का उद्देश्य भारत को चंद्रमा की सतह पर उतरकर उसका अध्ययन करना है।
स्पेस वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
इसरो की सूझबूझ और सक्रियता की वैज्ञानिक भी तारीफ कर रहे हैं। सोमवार को कई स्पेस साइंटिस्टों ने कहा कि जल्दबाजी में मिशन को संकट में डालने से अच्छा था कि भारत के दूसरे मून मिशन चंद्रयान-2 को टाल दिया जाए और इसके लिए स्पेस एजेंसी की प्रशंसा की जानी चाहिए। यह मिशन इसरो का अब तक का सबसे जटिल और प्रतिष्ठित मिशन माना जा रहा है।
लॉन्च टालने की आधिकारिक घोषणा करते हुए ISRO के एसोसिएट डायरेक्टर (पीआर) बीआर गुरुप्रसाद ने श्रीहरिकोटा में कहा, ‘लॉन्च व्‍हीकल सिस्टम में 56 मिनट पहले एक तकनीकी खामी का पता चला। ऐहतियात बरतते हुए चंद्रयान 2 का लॉन्च आज के लिए स्थगित किया जा रहा है।’ हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि खामी कैसी और क्या थी।
‘आखिरी मिनट तक जांचते रहने में इसरो मास्टर’
कोलकाता के इंडियन इस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (IISER) में सेंटर फॉर एक्सिलेंस इन स्पेस साइंसेज के हेड राजेश कुंबले नायक ने कहा, ‘लॉन्चिंग सिस्टम को लेकर इसरो की सफलता दर शानदार रही है। रॉकेट के जटिल सिस्टम को आखिरी मिनट तक जांचना और समस्या का समाधान करना अपने आप में एक कला है, जिसके वे मास्टर हैं।’
‘संकट में फंसने के बजाय रोकने का फैसला सही’
उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे खुशी है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने जल्दबाजी में संकट में फंसने के बजाय इसे रोकने का फैसला किया। मुझे उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में मिशन लॉन्च होगा, जो नाकाम होने से ज्यादा बेहतर है।’ वैज्ञानिकों ने उम्मीद जताई है कि इसरो जल्द ही तकनीकी खामी को दूर कर लेगा और मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च होगा।
‘व्‍हीकल, सैटलाइट की बराबर होती है निगरानी’
टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) मुंबई के असोसिएट प्रफेसर सुदीप भट्टाचार्य ने कहा, ‘ऐसे स्पेस मिशन के लॉन्च से पहले हम अपनी तकनीकी कुशलता और वैज्ञानिक संभावनाओं को सेलिब्रेट करते हैं लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि बहुत ही सख्त परीक्षण और व्‍हीकल व सैटलाइटों के हर हिस्से की निगरानी बार-बार की जाती है।’
‘आत्मसंतुष्ट होना ठीक नहीं, आखिरी पल तक रहें अलर्ट’
सुदीप ने कहा, ‘किसी को आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए और आखिरी पल तक अलर्ट रहना चाहिए। आज कुछ समय के लिए टाला गया लॉन्च वास्तव में हमारी चौकसी का नतीजा है, जिसने दिन को खराब होने से बचा लिया और इसका पूरा क्रेडिट टीम को जाता है। मुझे पूरी उम्मीद है कि किसी भी तकनीकी समस्या को दूर कर लिया जाएगा।’
इसरो के वैज्ञानिकों ने बताया है कि नई लॉन्च डेट बाद में घोषित की जाएगी। यह मिशन सफल होने के बाद चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत चौथा देश होगा। अब तक अमेरिका, चीन और रूस ही यह उपलब्धि हासिल कर सके हैं। IISER के प्रोफेसर दिब्येंदु नंदी ने कहा, ‘हमारा सबसे करीबी खगोलीय पड़ोसी चांद ही है और ऐसे में ब्रह्मांडीय खोज की हमारी यात्रा में यह एक महत्वपूर्ण पहला कदम है।’
-एजेंसियां

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