ऑटो एक्सपो 2018 की बूथ बेब्‍स

ऑटो एक्सपो 2018 में भी हर बार की तरह बूथ बेब्स यानी गाड़ियों को प्रमोटर करती मॉडल्स आई हैं। हमने इन मॉडल्स की कहानी जानने और समझने की कोशिश की है।
आइए, जानते हैं इनके जॉब और चुनौतियों के बारे में…
कोरियन ऑटोमेकर किया के पविलियन पर ऑटो एक्सपो 2018 में एक कपल ने कार को प्रमोट कर रही फीमेल मॉडल से फोटो क्लिक कराने को पूछा। कपल ने सेल्फीज क्लिक कीं और उसके पीछे खड़ी कार को ही नजरअंदाज कर दिया और चले गए। ऐसा ही कई कारों के स्टॉल्स पर देखने को मिला।
देश के सबसे बड़े ऑटो मोबाइल एग्जिबिशन में कई विजिटर्स ऐसे आते हैं जिनको कार या बाइक्स से मतलब नहीं होता है। वे यहां सिर्फ इनको प्रमोट करने वाली मॉडल्स को देखने आते हैं। इन प्रमोशनल मॉडल्स या ‘बूथ बेब्स’ का ऑटो शोज में चलन नया नहीं है। कार बूथ्स पर सुंदर लड़कियों को खड़ा किया जाता है ताकि ज्यादा लोग पविलियन की तरफ आकर्षित हों। ग्रेटर नोएडा में इस बार भी होंडा कार्स, होडा मोटर, किआ, रेनॉ और मह्रिदा आदि के पविलियनों पर छोटे कपड़ों में लड़कियों को खड़ा किया गया है ताकि बूथ के आसपास वाले लोगों का ध्यान इस तरफ आए।
इन लड़कियों को हर किसी को देखकर मुस्कुराना होता है। एक मॉडल ने बताया कि दिनभर मुस्कुराने के चलते उनके जबड़ों में दर्द होने लगता है। मजाकिया अंदाज में उसने कहा कि यहां तक कि बूथ पर नहीं होने पर भी जबड़े मुस्कुराने वाले पोज में ही सेट रहते हैं।
एक दूसरी मॉडल ने बताया कि जब विजिटर्स सेल्फी की डिमांड करते हैं और यह यूनीक लगती है तो वह तैयार हो जाती है। जब किसी तरह का कोई खतरा लगता है तो पांव पीछे खींच लेती है। किसी आपात स्थिति में ये लड़कियां बाउंसर्स को भी बुला सकती हैं।
दूसरा मुद्दा यह है कि सर्द मौसम के बावजूद उन्हें घंटों तक कम कपड़ों में खड़ा होना होता है। इससे बीमार होने की आशंका बनी रहती है। होंडा के लिए मॉडल बनने वाली स्वाति ने बताया कि उनके कारों के पास खड़े होने से कारों का ग्लैमर बढ़ जाता है।
मॉडल बनकर खड़ी होने वाली लड़कियों में ज्यादातर दिल्ली एनसीआर के कॉलेजेज से आती हैं। ऑटो एक्सपो में पहली बार मॉडल बनकर खड़ी होने वाली लड़की एक दिन में पांच हजार रुपए कमा लेती है जबकि प्रफेशनल मॉडल्स एक दिन में 15 हजार रुपए तक कमाती हैं। विदेशी लड़कियां ज्यादा चार्ज करती हैं। वे एक दिन का 20 से 35 हजार रुपए तक चार्ज करती हैं लेकिन केवल पैसा ही नहीं है, जिसके लिए ये लड़कियां बूथ बेब्स बनती हैं। दक्षिणी दिल्ली स्थि​त क्रू फॉर इवेंट्स की निदेशिका निधि बताती हैं कि ऑटो एक्सपो में ये लड़कियां कई लोगों से टच में आती हैं। उनसे कॉन्टैक्ट में रहने से उनको करियर में ग्रोथ मिलने की उम्मीद रहती है।
एक्सपो में इन लड़कियों को कई लोग देखते हैं। ऐसे में इनके लिए इंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में इनके लिए रास्ते खुलने की उम्मीदें रहती हैं। निधि ऑटो एक्सपो में 10 ब्रैंड्स को तकरीबन 500 लड़कियां मुहैया करा रही हैं। इसके लिए कंपनी ने 6 महीने पहले ही स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी। कंपनी ने तकरीबन 15 हजार लड़कियों का डेटाबेस तैयार किया है, जो कि उनको मुख्य रूप से सोशल मीडिया के जरिए मिला है।
बूथ बेब्स बनकर खड़े रहना आसान जॉब नहीं है। इसके लिए लड़कियों को सवेरे तड़के जगना होता है और बूथ पर सवेरे 8 बजे तक पहुंच जाना होता है। उनका बेहतरीन ढंग से ड्रेस पहनना भी जरूरी होता है। घंटों तक लाइट के नीचे खड़े रहने से थकान लाजिमी है। इस सबसे बावजूद ये लड़कियां चैलेंजिंग जॉब करती हैं लेकिन सवाल फिर वही आता है कि खूबसूरत लड़कियों को कार के सामने खड़ा करने से वाकई कार पर कोई असर पड़ता है?
अल्कोहल और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को मेल डॉमिनेटेड इंडस्ट्रीज माना जाता है। यही वजह है कि इनको बेचने वाले ब्रैंड्स महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं लेकिन पुरुष समझदार हो रहे हैं और महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह नहीं देखते हैं। ऐसा एक मशहूर ब्रैंडिंग और क्रिएटिव डिजाइन एजेंसी के मैनेजिंग डायरेक्टर ने बताया।
उनका मानना है कि इस तरह से ब्रैंड्स अच्छे तरह से अपनी ऑडियंस से संवाद नहीं कर पाते। इनके मुताबिक, बूथ बेब्स का जमाना जा चुका है और ब्रैंड्स को कोई नई मार्केटिंग रणनीति अपनानी चाहिए।
जो लोग इस फील्ड में काम रहे हैं उनके मुताबिक ऑटो एक्सपो विज्ञापन और कॉमर्शियल दुनिया में जाने के लिए एक बड़ा ग्राउंड है। यहां दुनियाभर का मीडिया आता है और ये लोग उनकी नजरों में भी आती हैं। इससे इन मॉडल्स की विजिबिलटी भी बढ़ती है। खैर, जो भी हो। सवाल फिर वही बाता है कि क्या बूथ बेब्स एक पुराना प्रयोग हो गया ​है?
-एजेंसी