उमर अब्दुल्ला पर PSA को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

नई दिल्‍ली। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की बहन ने लोक सुरक्षा अधिनियम PSA के तहत उमर की हिरासत को चुनौती दी है।
सोमवार को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने न्यायमूर्ति एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ से मामले को सुनवाई के लिए तत्काल सूचीबद्ध करने का उल्लेख किया।
कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि उन्होंने लोक सुरक्षा अधिनियम के तहत अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती देते हुए एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। इस सप्ताह मामले की सुनवाई की जानी चाहिए। पीठ ने मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
उमर ने भीड़ का उकसाने का किया काम
लोक सुरक्षा अधिनियम PSA के तहत हिरासत में लिए गए जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर संगीन आरोप लगाए गए हैं। PSA डोजियर में दोनों नेताओं के हिरासत की वजह यह बताई गई है कि 49 वर्षीय उमर ने जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की पूर्व संध्या पर अनुच्छेद 370 और 35-ए हटाने को लेकर भीड़ को उकसाने का काम किया था।
उमर ने इस फैसले के खिलाफ सोशल मीडिया पर भी लोगों को भड़काया था, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ी। हालांकि, डोजियर में उमर के सोशल मीडिया पोस्ट का जिक्र नहीं है। वहीं, उमर की राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और 60 वर्षीय पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती पर राष्ट्रविरोधी बयान देने और जमात-ए-इस्लामिया जैसे अलगाववादी संगठनों को समर्थन देने का आरोप लगाया गया है। इस संगठन पर गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत पाबंदी लगाई गई है।
उमर ने कहा था…तो भारत में विलय पर छिड़ेगी बहस
हरी निवास में हिरासत में लेकर जाने से पहले उमर ने आखिरी कुछ ट्वीट किए थे, जो इस प्रकार हैं…कश्मीर के लोगों के लिए, हम नहीं जानते कि हमारे लिए क्या है…सुरक्षित रहें और इन सबसे ऊपर कृपया शांत बने रहें। हालांकि, कहा यह भी जा रहा है कि डोजियर में उमर के उस बयान का भी हवाला दिया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 समाप्त करने या इसमें बदलाव से जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ जाएगी।
-एजेंसियां

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