GL बजाज के छात्रों को CFO ने बताए अग्निशमन के उपाय

मथुरा। बढ़ते तापमान के साथ-साथ आगजनी की घटनाओं में भी इजाफा होने लगा है। कई बार ऐसी दुर्घटनाएं प्राकृतिक होती हैं तो कई बार इंसानी चूक से कुछ पल में ही सब कुछ राख हो जाता है। आग से क्षति तो होती ही है कई बार लोगों को जान भी गंवानी पड़ जाती है, ऐसे में अगर हम कुछ सावधानियां बरत लें तो जान-माल के खतरे को सहजता से टाला जा सकता है। यह उद्गार मंगलवार को जी.एल. बजाज ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस मथुरा में चीफ फायर ऑफीसर प्रमोद शर्मा ने छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

श्री शर्मा ने कहा कि घर हो, कम्पनी या स्कूल-कॉलेज हमें सुरक्षा के दायरे में रहकर ही काम करना चाहिए। इस अवसर पर चीफ फायर ऑफीसर और उनकी टीम ने छात्र-छात्राओं को मॉक ड्रिल के माध्यम से आग से बचने के उपाय बताए। मथुरा जनपद के फायर आफीसर प्रमोद शर्मा का कहना है कि किचन की आग या शार्ट सर्किट से झुग्गी-झोपड़ी या गाँव में जब भी आग लगती है तो यह बहुत तेजी से फैलती है। कोई भी अग्नि दुर्घटना हो उसे नियंत्रित करना बहुत मुश्किल होता है लिहाजा आग न लगे इसके लिए पूरी सावधानी बरतें और सजग रहें।

श्री शर्मा ने कहा कि आग लगने पर तुरंत 101 नम्बर पर कॉल करके सूचना दें। यह न सोचें कि कोई दूसरा इसकी सूचना पहले ही दे चुका होगा। आग लगने पर सबसे पहले इमारत की अग्नि चेतावनी की घंटी (फायर अलार्म) को सक्रिय करें, फिर बहुत जोर से आग-आग चिल्लाकर लोगों को सचेत करें। चेतावनी कम शब्दों में ही दें वरना लोगों को घटना की गंभीरता समझने में समय अधिक लगेगा। श्री शर्मा ने कहा कि आग लगने पर लिफ्ट का उपयोग न करें, सिर्फ सीढ़ियों का ही प्रयोग करें। धुएं से घिरे होने पर अपनी नाक और मुंह को गीले कपड़े से ढंक लें। अगर आप धुएं से भरे कमरे में फंस जाएं और बाहर निकलने का रास्ता न हो, तो दरवाजे को बंद कर लें और सभी दरारों और सुराखों को गीले तौलिये या चादरों से सील कर दें, जिससे धुआं अंदर न आ सके।

श्री शर्मा ने बताया कि अपने घर और कार्यालय में स्मोक (धुआं) डिटेक्टर जरूर लगाएं क्योंकि स्वयं की सुरक्षा के उपाय करना हमेशा बेहतर और अच्छा होता है। समय-समय पर इमारत में लगे फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर, पानी के स्रोत तथा अग्निशमन यंत्रों की जांच अवश्य करवाते रहें। जहां आग लगी हो उस स्थल पर भीड़ न लगने दें, इससे आपातकालीन अग्निशमन सेवा और बचाव कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। यदि आपके कपड़ों में आग लग जाए तो भागे नहीं बल्कि जमीन पर लेट जाएं और चेहरे को ढंककर रोल करें। आग बुझाते समय कम्बल, कोट या भारी कपड़े का ही प्रयोग करें।

मॉक ड्रिल के बाद संस्थान की निदेशक प्रो. नीता अवस्थी ने फायर ऑफीसर प्रमोद शर्मा और उनकी टीम को स्मृति चिह्न प्रदान कर प्राध्यापकों, छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को अग्निशमन के उपाय बताने के लिए आभार माना। इस आयोजन में संस्थान के प्राध्यापकों प्रो. गजल सिंह, डॉ. जगवीर सिंह, डॉ. श्रवण कुमार, डॉ. हरलीन कौर, डॉ. रमाकांत बघेल आदि का सराहनीय योगदान रहा।

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