उद्योग जगत को प्रोत्‍साहन पैकेज देने से केंद्र सरकार का इंकार

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने भारतीय उद्योग जगत को स्टिम्युलस पैकेज देने से इंकार कर दिया है। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यन ने अर्थव्यवस्था के लिए कोई स्टिम्युलस पैकेज देने से इंकार करते हुए कहा कि मुनाफा हुआ तो निजी और नुकसान हो तो सार्वजनिक, यह सही अर्थशास्त्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि उद्योग के लिए बढ़िया और खराब दौर सामान्य सी बात है और बुरे दौर में उद्योग का सरकार से समर्थन की उम्मीद करना नैतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
हीरो माइंडमाइन समिट 2019 को संबोधित करते हुए सुब्रमण्यन ने कहा कि थोड़ी बहुत सुस्ती के बावजूद दुनियाभर में भारत अभी भी एक चमकता सितारा है क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था महज 2-2.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है।
मंदी शब्द का इस्तेमाल अकारण
समिट के पैनल में शामिल सभी लोगों ने इस बात से सहमति जताई कि लोग इन दिनों अकारण ही ‘मंदी’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि वैश्विक हालात अभी भी नियंत्रण में नहीं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि राजकोषीय हालात पर विचार करने के बाद ही घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए किसी भी स्टिम्युलस के बारे में बात की जानी चाहिए।
सुब्रमण्यन ने कहा कि हद से ज्यादा निराशावाद तथा अविवेकपूर्ण आशावाद दोनों ही खतरनाक है। उन्होंने कहा, ‘मुनाफा हुआ तो अपना और नुकसान हुआ तो सार्वजनिक, बढ़िया अर्थशास्त्र नहीं हो सकता।’
ऑटो में सुस्ती का मतलब अर्थव्यवस्था सुस्त नहीं
सीईए ने कहा कि अगर ऑटोमोबाइल सेक्टर सुस्ती के दौर से गुजर रहा है तो जरूरी नहीं कि अर्थव्यवस्था सुस्त हो गई है। उन्होंने कहा, ‘अगर कोई अर्थव्यवस्था को स्टिम्युलेट करने की बात करता है तो सरकार इन्हीं सिद्धांतों का पालन करेगी।’
वैश्विक स्तर पर कोई मंदी नहीं
वहीं, पूर्व वित्त तथा आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि वैश्विक स्तर पर कोई मंदी नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘वास्तव में इस साल वैश्विक वृद्धि बीते 3-4 सालों के औसत से अधिक रहेगी। हम सुस्ती को झटका दे सकते हैं।’ गर्ग ने कहा कि आर्थिक वृद्धि, कॉरपोरेट मुनाफा और यहां तक कि कर संग्रह की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष की पहली तिमाही बेहतरीन रही थी।
-एजेंसियां

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »