वायु प्रदूषण को लेकर वर्क फ्रॉम होम के पक्ष में नहीं है केंद्र सरकार

नई दिल्‍ली। दिल्ली में वायु प्रदूषण के मामले पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर करके कहा है कि वो अपने कर्मचारियों से वर्क फ़्रॉम होम कराने के पक्ष में नहीं है क्योंकि इससे अधिक लाभ नहीं होता और न इसका प्रभाव अधिक होगा.
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि इसकी जगह उसने दिल्ली में अपने कर्मचारियों से कहा है कि वो कार-पूलिंग का इस्तेमाल करें ताकि वाहनों की संख्या कम हो.
केंद्र सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे कुल वाहनों की तुलना में केंद्र सरकार के पास बहुत कम वाहन हैं और इनके बंद कर देने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ेगा.
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि केंद्र ने दिल्ली-एनसीआर के एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ़ॉर कमिशन (CAQM) ने कई निर्देश जारी किए हैं जिनमें एक 21 नवंबर तक दिल्ली में ट्रकों के आने पर प्रतिबंध, थर्मल प्लांट्स बंद करने और निर्माण पर रोक शामिल हैं. केवल ज़रूरी सामान के ट्रक ही दिल्ली में आ सकते हैं.
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्यों को कम से कम एक सप्ताह के लिए अपने कर्मचारियों से वर्क़ फ़्रॉम होम कराने पर विचार करने को कहा था.
सुप्रीम कोर्ट ने ज़ोर देते हुए कहा था कि फ़ैक्ट्रियां, परिवहन, धूल और कुछ हद तक पराली जलाना भी प्रदूषण का मुख्य कारण है. बीती रात CAQM ने दिल्ली और इसके आस-पास के शहरों के स्कूलों और कॉलेजों को अगले नोटिस तक बंद करने का आदेश दिया था.
दिल्ली सरकार के वकील ने क्या कहा
दिल्ली में वायु प्रदूषण के मामले पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अगर पराली जलाने से 3-4% प्रदूषण होता है तो इसको नहीं देखे जाने की ज़रूरत है, हम कहना चाहते हैं कि यह एक कारण है.
इसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट ने सिंघवी से कहा कि हमारा ध्यान प्रदूषण पर है और वो ऐसा मुद्दा उठा रहे हैं जो प्रासंगिक नहीं है, हमने इसका ख़याल रखा है और अपने आदेश में कहा था कि हम किसानों से निवेदन करते हैं कि वो दो सप्ताह के लिए पराली न जलाएं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो दिख रहा है वो क्या किसानों के कारण हुआ है? दिल्ली के फ़ाइव और सेवेन स्टार में बैठे लोग आलोचना कर रहे हैं कि वे (किसान) प्रदूषण में 4, 30 या 40% का योगदान दे रहे हैं. क्या आपने उनकी प्रति जोत कमाई को देखा है?
इस दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि क्या हम इसे नज़रअंदाज़ कर दें कि प्रतिबंध के बावजूद पटाख़े फोड़े गए?
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *