CEC ने कहा, राजनीतिक दलों ने EVM को फुटबॉल बना दिया लेकिन मतपत्र पर लौटने का सवाल ही नहीं

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त CEC सुनील अरोड़ा ने विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा EVM की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जाने पर दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि मतदान की यह सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति है। EVM गलत रखरखाव की शिकार तो हो सकती है, लेकिन इसमें छेड़छाड़ मुमकिन ही नहीं है।
नवनियुक्त CEC अरोड़ा ने ईवीएम पर राजनीतिक दलों के आरोपों के दायरे में अब चुनाव आयोग के भी आने के मुद्दे पर गुरुवार को कहा कि चुनाव में मतदाताओं के बाद राजनीतिक दल ही मुख्य पक्षकार होते हैं। उन्हें अपनी बात कहने का पूरा अधिकार है, लेकिन छेड़छाड़ बात से मुझे दुख होता है। हमने ईवीएम को ‘फुटबॉल’ बना दिया।
किसी दल विशेष के पक्ष में चुनाव परिणाम नहीं आने पर इसका ठीकरा ईवीएम पर फोड़ने की प्रवृत्ति के बारे में CEC अरोड़ा ने दलील दी कि 2014 के लोकसभा चुनाव का परिणाम, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम एक दूसरे से बिलकुल विपरीत थे। इसके बाद भी हिमाचल प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, त्रिपुरा और अब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव तथा तमाम उपचुनाव के परिणाम बिलकुल भिन्न रहे।
अरोड़ा ने राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव परिणाम की व्याख्या अपनी सुविधानुसार करने का जिक्र करते हुए CEC ने कहा कि ईवीएम महज एक मशीन है जो आंकड़े दर्ज कर उनकी गिनती करती है। मशीन में खास प्रोग्रामिंग कर विशेष परिणाम हासिल करने की संभावना को मैं पूरी तरह से नकार सकता हूं।
पांच राज्यों के चुनाव में ईवीएम की मतदान केन्द्रों से इतर अन्य स्थानों पर बरामदगी के सवाल पर अरोड़ा ने कहा कि मशीन में छेड़छाड़ करना और इसका गलत रखरखाव दो अलग मुद्दे हैं। जो शिकायतें इन चुनावों के दौरान मिलीं, वे कर्मचारियों द्वारा गलत रखरखाव की श्रेणी में आती हैं। इस तरह के जो चार-पांच मामले सामने आए हैं, हालांकि यह संख्या नगण्य है लेकिन फिर भी आयोग की कोशिश इस संख्या को शून्य पर लाने की है।
राजनीतिक दलों की मतपत्र की तरफ वापस लौटने की मांग के सवाल पर उन्होंने कहा कि मतपत्र की ओर वापस लौटने का सवाल ही नहीं है। यह चुनाव आयोग का स्पष्ट रुख है। इस विषय पर कई बार विचार विमर्श करने के बाद आयोग ने यह सोच कायम की है।
-एजेंसियां

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