CBSE छठे विषय के रूप में कराएगा क्षेत्रीय भाषा की पढ़ाई

नई द‍िल्ली। क्षेत्रीय भाषा को बढ़ावा देने के लिए CBSE (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड) ने 10वीं और 12वीं में तीसरी भाषा के तौर पर क्षेत्रीय भाषा को शामिल किया है। छात्र चाहे तो छठें विषय के तौर पर क्षेत्रीय भाषा ले सकते हैं। इतना ही नहीं अगर छात्र दो अनिवार्य भाषा विषय यानि हिन्दी या अंग्रेजी में फेल हो जाते है तो वो तीसरी भाषा में पास होते है तो तीसरी भाषा से फेल वाले अनिवार्य भाषा को रिप्लेस भी कर सकते हैं।

CBSE के अनुसार क्षेत्रीय भाषा का विकल्प छात्रों को दी गयी है। लेकिन दो अनिवार्य भाषा हिंदी और अंग्रेजी छात्रों को लेना ही है। इसके अलावा छात्र चाहे तो क्षेत्रीय भाषा पढ़ सकते हैं। क्षेत्रीय भाषा के तौर पर 41 भाषा का विकल्प छात्रों को मिलेगा। इसमें जर्मन, फ्रेंच, रसिया विदेशी भाषा भी शामिल हैं। नौंवी और 11वीं के अलावा छात्र आठवीं में भी अब तीसरी भाषा पढ़ सकते हैं। बोर्ड ने इसकी जानकारी सभी स्कूलों को दे दिया है।

अगर कोई छात्र चाहे तो आठवीं में भी तीसरी भाषा पढ़ सकता है। बोर्ड की मानें तो पहले हिन्दी और अंग्रेजी की दो-दो किताबें पढ़नी होती थी। लेकिन अब उसे खत्म कर दिया गया है। छात्र हिन्दी और अंग्रेजी के दो-दो किताबों में से केवल एक किताब ही कोर्स में लेंगे। इसमें हिन्दी कोर और हिन्दी इलेक्टिव है। उसी तरह अंग्रेजी कोर और अंग्रेजी इलेक्टिव शामिल हैं।

– एजेंसी

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