यूपी: हरिशंकर तिवारी के विधायक बेटे की कंपनी पर CBI छापे के बाद केस दर्ज

गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के एक और बाहुबली हरिशंकर तिवारी पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। उनके बेटे और बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी की कंपनी से जुड़े मामले में CBI ने ताबड़तोड़ छापेमारी की है। यह छापे लखनऊ, गोरखपुर, नोएडा समेत कई ठिकानों पर हुए हैं।
बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी से जुड़ी कंपनी गंगोत्री इंटरप्राइजेस पर 1500 करोड़ के बैंक लोन घोटाले का आरोप है। विनय पूर्व दबंग मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे हैं। हरिशंकर तिवारी को पूर्वांचल का माफिया कहा जाता है। गोरखपुर तथा गौतमबुद्धनगर में एक साथ छापा मारने के बाद सीबीआई ने विनय शंकर तिवारी तथा उनकी पत्नी रीता तिवारी के खिलाफ केस दर्ज किया है। विनय शंकर तिवारी गोरखपुर के चिल्लूपार से बहुजन समाज पार्टी के विधायक हैं।
बैंक ने दर्ज कराई थी एफआईआर
बताया जा रहा है कि गंगोत्री इंटरप्राइजेस के लिए बैंक लोन लिया गया था। लोन लेने के लिए फर्जी दस्तावेजों का प्रयोग किया गया और बाद में कंपनी ने लोन का भुगतान भी नहीं किया। इस मामले में बैंक ने विनय तिवारी की कंपनी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी।
इन कंपनियों पर हुआ एक्शन
बताया जा रहा है कि चिल्लूपार से बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी, पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी और उनके परिवार से जुड़ी कंपनियों गंगोत्री इंटरप्राइजेज, मैसर्स रॉयल एंपायर मार्केटिंग लिमिटेड, मैसर्स कंदर्प होटल प्राइवेट लिमिटेड के ठिकानों पर छापेमारी की गई है। सभी कंपनियां विनय तिवारी से ही जुड़ी हैं।
कौन हैं हरिशंकर तिवारी?
आठवें दशक की बात है, जब पूर्वी यूपी में बाहुबल सियासत के रास्ते खोल रहा था। कई बड़े माफिया गिरोह यहां पैर पसार चुके थे। इसी गिरोहबंद राजनीति के बीच हरिशंकर ने राजनीति का रास्ता पकड़ा। शुरुआती पराजय का स्वाद चखने के बाद 1985 में हरिशंकर चिल्लूपार से विधायक बने। इसके बाद यह सीट तिवारी के नाम से जानी जाने लगी। तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरबहादुर सिंह के तमाम प्रयास के बावजूद चिल्लूपार से तिवारी की जड़ें नहीं उखड़ीं। वह 1989,91,93,96 और 2002 में यहीं से जीते। इसी सीट के दम पर हरिशंकर राज्य के मंत्री बने, लेकिन लोकतंत्र पिछले आंकड़ों से नहीं चलता।
विनय तिवारी का राजनतिक सफर
2007 में राजेश त्रिपाठी को बीएसपी ने टिकट दिया। पहले इस सीट पर श्यामलाल यादव बीएसपी से लड़ते थे। यादव टक्कर तो देते लेकिन जीत नहीं पाते। स्थानीय पत्रकार से नेता बने राजेश त्रिपाठी को भी बहुत गंभीरता से नहीं लिया गया। लेकिन जब मतपेटियां खुलीं तो परिणाम बदल चुका था। हरिशंकर अपनी सीट गंवा चुके थे। पहली बार जीते राजेश को इसका इनाम भी मिला और मायावती ने उन्हें मंत्री बनाया। 2012 में राजेश फिर जीते। 2017 में जब बीएसपी का टिकट राजेश ने अपने विरोधी हरिशंकर तिवारी परिवार में जाते देखा तो उन्होंने बगावत कर दी और बीजेपी में शामिल हो गए। बीएसपी ने हरिशंकर के बेटे विनय तिवारी को चिल्लूपार से टिकट दिया और वह चुनाव जीत गए।
-एजेंसियां

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