हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा के आवास पर सीबीआई का छापा

चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा के रोहतक स्थित आवास पर सीबीआई ने शुक्रवार सुबह छापा मारा है। सूत्रों के मुताबिक कार्यवाही अभी जारी है और भूपेंद्र हुड्डा भी घर के अंदर ही मौजूद हैं। सीबीआई अधिकारी किसी को भी घर के अंदर या वहां से बाहर जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं। सीबीआई की टीमें दिल्ली-एनसीआर में एक साथ 30 से अधिक जगहों पर छापे मार रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह मामला 2009 में भूमि आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा मालूम होता है। उन्होंने बताया कि ऐसे आरोप हैं कि तत्कालीन हरियाणा सरकार की तरफ से 2009 में गुड़गांव में किए गए 1,417 एकड़ जमीन के अधिग्रहण में जबर्दस्त गड़बड़ियां हुई थीं। बताया जाता है कि सीबीआई ने हुड्डा के खिलाफ एक नया मामला भी दर्ज किया है। अधिकारियों ने बताया कि 2009 में गुड़गांव में भूमि आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर यह मामला दर्ज किया गया है।
बता दें कि सीबीआई ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और एजेएल के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। यही नहीं हाल ही में हरियाणा के राज्यपाल नारायण आर्य ने बहुचर्चित एजेएल मामले में सीबीआई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी। पूर्व मुख्यमंत्री पर एजेएल को उसके अखबार नेशनल हेरल्ड के लिए पंचकूला में नियमों के खिलाफ जमीन अलॉट करने का आरोप है। मौजूदा बीजेपी सरकार ने साल 2016 में यह मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया था।
बीजेपी ने सत्ता में आने से पहले हुड्डा के शासनकाल को मुद्दा बनाया था और सत्ता हासिल करते ही विभिन्न मामलों की जांच करवाई। इनमें एजेएल का मामला भी था। मामले पर बीजेपी सरकार ने विजिलेंस विभाग को मई 2016 को जांच सौंपी थी। मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) की शिकायत पर दर्ज हुआ था। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री इसलिए निशाने पर आए क्योंकि मुख्यमंत्री प्राधिकरण के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
ऐसे किया गया जमीन आवंटन में ‘खेल’
आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री ने 28 अगस्त 2005 को पद का दुरुपयोग करते हुए एजेएल को पंचकूला में जमीन का आवंटन बहाल किया। यह जमीन एजेएल को 30 अगस्त 1982 में आवंटित की गई थी। शर्त यह थी कि कंपनी छह महीने में जमीन पर कंस्ट्रक्‍शन करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो 30 अक्टूबर 1992 को पंचकूला के संपदा अधिकारी ने जमीन रिज्यूम कर ली। साथ ही 10 फीसदी राशि में कटौती कर बाकि राशि 10 नवंबर 1995 को लौटा दी गई। इसका एजेएल ने विरोध किया और राजस्व विभाग के पास अपील की। यहां भी एजेएल को राहत नहीं मिली।
आरोप है कि एजेएल को साल 2005 में हुड्डा के मुख्यमंत्रित्वकाल में बड़ी राहत उस समय मिल गई जब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के चेयरमैन होने के नाते तब के मुख्यमंत्री हुड्डा ने एजेएल को यह जमीन दोबारा से अलॉट करवाने का रास्ता तैयार कर दिया। बताया जाता है कि तब हुड्डा के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने तर्क दिया था कि पुरानी कीमत पर जमीन को आवंटित करना संभव नहीं है। बावजूद 28 अगस्त 2005 को पंचकूला की जमीन 1982 की दर पर ही एजेएल को अलॉट हो गई।
-एजेंसियां

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