CAT का फैसला, फैमिली पेंशन पर विवाहित बेटियों का भी हक

नई दिल्‍ली। CAT (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि पिता की मौत के बाद सरकार से मिलने वाली फैमिली पेंशन से विवाहित बेटी को वंचित नहीं किया जा सकता है।

न्यायाधिकरण के सदस्य के.एन. श्रीवास्तव ने ममता देवी के हक में फैसला देते हुए यह टिप्पणी की है। महिला अपने पति से अलग रह रही है। न्यायाधिकरण ने रेलवे को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता को उस दिन से फैमिली पेंशन दे जब से बंद किया गया है।

न्यायाधिकरण ने रेलवे के 2016 के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत वर्ष 2013 में कानून में किए गए संशोधन के बाद याचिकाकर्ता को मिलने वाली फैमिली पेंशन को बंद कर दिया गया था। न्यायाधिकरण ने कहा है कि कानून में संशोधन के तीन साल बाद याचिकाकर्ता को मिलने वाली पेंशन रद्द करना एकतरफा कार्रवाई है।

फिरोजाबाद निवासी ममता के पिता भीम सेन रेलवे में वर्ष 1978 से गैंगमेन की नौकरी कर रहे थे। वर्ष 2005 में उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के करीब तीन साल बाद जनवरी, 2008 से ममता व उनके दो भाइयों को फैमिली पेंशन मिलने लगी।

इस बीच पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव कर दिया गया। इसके करीब तीन साल बाद रेलवे ने नियमों का हवाला देकर ममता की पेंशन बंद कर दी।

CAT का फैसला विवाहित बेटी के अधिकारों के लिए महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है।

-एजेंसी

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