जन्माष्टमी पर यूपी में अंधेरा करने का मामला: दो अधिकारी सस्पेंड, जांच के आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जन्माष्टमी के दिन तीन लाख से ज्यादा घरों में अंधेरा छा गया। अचानक बिजली जाने से हड़कंप मच गया। इस मामले में सामने आया कि बिजली किसी और फॉल्ट के कारण नहीं, बल्कि स्मार्ट मीटर में गड़बड़ी के कारण हुई थी। अधिकारियों की लापरवाही के चलते लाखों घरों को रात अंधेरे में गुजारनी पड़ी। बिजली मंत्री ने इस मामले में दो अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है और उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं।

स्मार्ट मीटर डिस्कनेक्शन मामले में ऊर्जा मंत्री ने घटना की STF से जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आद‍ित्यनाथ को पत्र लिखा है साथ ही घटना के दोषियों पर कठोर कार्यवाही की मांग की है।

बिजली मंत्री के पत्र का तत्‍काल संज्ञान लेते हुए सीएम योगी ने मामले की जांच एसटीएफ को सौंप दी है। उन्होंने दोषी पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, मेरठ, वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, बरेली, मथुरा और अलीगढ़ में इस सरकार ने स्मार्ट मीटर लगाए थे। बुधवार शाम को अचानक लाखों घरों की बिजली गुल हो गई। काफी प्रयास के बाद देर तक बिजली ठीक नहीं हो सकी।
देर रात सही हो सकी फॉल्ट
लाखों घरों की बिजली गायब होने हड़कंप मच गया। काफी प्रयास के बाद अधिकारियों ने पाया कि गलत कमांड की वजह से घरों में अंधेरा छा गया था। आनन-फानन में स्मार्ट मीटर की कमांड ठीक करने का काम शुरू हुआ। देर रात 12 बजे के बाद फॉल्ट सही हो सकी। हालांकि पावर कॉर्पोरेशन का दावा है कि रात साढ़े नौ बजे तक कई घरों के स्मार्ट मीटर चलने लगे थे।
कमांड गलत देने से गई बिजली
अधिकारियों ने बताया कि किसी कर्मचारी ने स्मार्ट मीटर की कमांड गलत दे दी थी जिसके कारण बिजली चली गई। काफी प्रयास के बाद यह फॉल्ट ढूंढी जा सकी। हालांकि अभी तक यह पता नहीं चल सका कि यह गलत कमांड कहां से और किस कर्मचारी ने दी थी।
जांच के दिए आदेश
ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बताया कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की जा रही है। उन्होंने EESL आदेश सक्सेना और एल एंड टी के प्रोजेक्ट मैनेजर शशिकांत अग्रवाल को सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।
-एजेंसियां

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