रवि हॉस्पिटल के खिलाफ वाद दाखिल, ऐंठे थे 13 लाख

आगरा। शहर के एक नामी अस्पताल रवि हॉस्पिटल के संचालक और अन्य डॉक्टर पर मरीज को कोरोना बताकर इलाज के नाम पर 13 लाख रुपये ऐंठने और दस लाख और न देने पर मरीज को जान बूझकर मारने का आरोप लगा है। अस्पताल द्वारा बिल न देने पर परिजनों ने न्यायालय में वाद दाखिल कर न्याय की मांग की है।

जानकारी के मुताबिक थाना हरीपर्वत अंतर्गत मदिया कटरा स्थित रवि अस्पताल के संचालक डॉ. रवि पचौरी और डॉ. राकेश त्यागी के खिलाफ खंदारी बापू नगर निवासी सीमा अग्रवाल ने पति लोकेंद्र अग्रवाल को बिना जांच कोरोना मरीज बता कर इंश्यूरेंस कंपनी और उनसे मिलाकर 13 लाख रुपये ऐंठने और दस लाख की मांग न पूरी होने पर इलाज में लापरवाही कर पति की जान लेने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने पुलिस द्वारा कार्यवाई न करने पर सीजेएम कोर्ट में धारा 156/3 सीआरपीसी के तहत वाद दाखिल कर न्याय की गुहार लगाई है। न्यायालय ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी है और सुनवाई के लिए 4 अक्टूबर की तारीख दी है। बता दें कि पूर्व में कोविड काल के दौरान रवि हॉस्पिटल पर मरीजों से अधिक वसूली की शिकायतें भी मिल चुकी हैं।

पीड़िता ने लगाए आरोप

खंदारी के बापू नगर निवासी स्व. लोकेंद्र अग्रवाल संजय प्लेस में मोबाइल सेल्स सेंटर नाम से दुकान चलाते थे। लोकेंद्र की पत्नी सीमा अग्रवाल ने आरूप लगाया है कि‍ 19 अप्रैल को पति को बुखार की शिकायत पर रवि अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां डॉ. रवि पचौरी और डॉ. राकेश त्यागी की देखरेख में इलाज शुरू हुआ था। 21 अप्रैल को एंटीजन टेस्ट के बाद डॉक्टरों ने पति को कोविड पेशेंट बता कर इलाज के नाम पर पैसे वसूलने शुरू कर दिए। हमने जिला अस्पताल में कोविड टेस्ट कराने को कहा तो उन्होंने प्रशासन को जानकारी दिए बिना ऐलाज की बात कही। बहुत जोर देने पर 1 मई को जिला अस्पताल कोविड जांच को सैम्पल भेजे गए। इसके बाद पति की हालत खराब बता कर 2 मई को वेंटीलेटर पर रख दिया। 4 अप्रैल को जब आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आई तो दोनों डॉक्टरों ने पति को जिंदा ले जाने के लिए दस लाख रुपये और देने की मांग की। इसके बाद अलग अलग किस्तों में उनसे साढ़े तीन लाख रुपये और 9 लाख 57 हजार एक सौ नब्बे रुपये इंश्यूरेंस कंपनी से ले लिए और 14 मई को साजिशन पति को इलाज न देकर मार दिया। दवा के बिल और अस्पताल की फीस के कागज मांगने पर धमकी देकर भगा दिया गया। पीड़िता डर के कारण कई दिनों तक घर मे ही कैद रही। हिम्मत करके 20 सितम्बत को उसने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की पर कोई सुनवाई नहीं हुई मजबूरन अब न्यायालय की शरण ली है। पीड़िता के अधिवक्ता आशुतोष श्रोत्रिय के अनुसार म्रतक के इंश्यूरेंस की कलम ही इस बात का सबूत है कि अस्पताल संचालकों ने कितनी हेराफेरी की है। न्यायालय पीड़िता को न्याय देते हुए कार्यवाई करेगा।

अभी तक पारस अस्पताल की भी नहीं आई रिपोर्ट

बता दें की पारस अस्पताल पर इलाज के दौरान कोरोना बताकर वसूली करने और मरीज की पत्नी से गहने तक छीन लेने की शिकायत पर न्यायालय ने वाद स्वीकार कर थाना न्यू आगरा पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी पर पुलिस द्वारा रिपोर्ट न देने पर आज न्यायालय ने अगली तारीख दे दी है।
– एजेंसी

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