बैंकिंग सेक्टर में करियर के आकर्षक विकल्प, ग्रेजुएट होना जरूरी

बैंकिंग सेक्टर में करियर के आकर्षक विकल्पों में प्रोबेशनरी ऑफिसर (पीओ), मैनेजमेंट ट्रेनी और स्पेशल ऑफिसर (एसओ) शामिल हैं। पीओ मुख्य रूप से किसी बैंक में स्केल I का असिस्टेंट मैनेजर होता है। वह ग्रेड I का जूनियर मैनेजर होता है और इसलिए उसे स्केल I ऑफिसर भी कहा जाता है। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक प्रोबेशनरी ऑफिसर को ट्रेनिंग पीरियड से गुजरना होता है। ट्रेनिंग पीरियड को प्रोबेशन पीरियड कहा जाता है। प्रोबेशन पीरियड आमतौर पर 2 साल का होता है लेकिन बैंक के हिसाब से कम या ज्यादा भी हो सकता है।
जॉब प्रोफाइल
एक प्रोबेशनरी ऑफिसर को नीचे दिया गया कोई एक काम या सभी करना पड़ता है…
सामान्य बैंकिंग: उनको बैंक के सामान्य काम करने पड़ते हैं। सामान्य कामों में ग्राहकों के चालू और बचत खाता की देखरेख के अलावा चेक संग्रह करना और क्लियर करना एवं ड्राफ्ट जारी करना होता है। उनके जिम्मे टर्म डिपॉजिट को मंजूरी देने, लोन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और डेट सिक्योरिटीज का काम भी होता है।
हाउसकीपिंग और सुपरवाइजरी: वे अधीनस्थ बैंक कर्मचारियों को बैंक की रोजाना की गतिविधियों के लिए ड्यूटी सौंप सकते हैं।
अन्य कार्य: बैंक प्रबंधन किसी पीओ को बैंक से जुड़ा अन्य कार्य भी सौंप सकते हैं।
परीक्षा और योग्यता
इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन, मुंबई देश में पब्लिक सेक्टर के सभी बैंकों के लिए एक सामान्य परीक्षा का आयोजन करता है। एसबीआई अलग से अपनी परीक्षा का आयोजन करती है।
शैक्षिक योग्यता: परीक्षा में बैठने के लिए किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट होना जरूरी है।
कुछ बैंकों में सरकार से मान्यता प्राप्त किसी प्रशिक्षण संस्थान से कंप्यूटर के बेसिक नॉलेज का सर्टिफिकेट जरूरी होती है जबकि कुछ में सिर्फ वर्किंग नॉलेज से काम चल जाता है।
आयु सीमा: कैंडिडेट की आयु 21 से 30 साल के बीच होनी चाहिए। आयु सीमा में आरक्षण के नियम के मुताबिक आरक्षित श्रेणियों को छूट दी जाती है।
चयन की प्रक्रिया
कैंडिडेट्स के चयन की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है। इनमें से दो चरण लिखित परीक्षा और तीसरे चरण में इंटरव्यू लिया जाता है। पहले चरण की लिखित परीक्षा प्रीलिमिनरी एग्जाम होती है जिसमें ऑब्जेक्टिव क्वेस्चन पूछे जाते हैं जबकि मेंस के दूसरे चरण में डिस्क्रिप्टिव टेस्ट होता है।
लिखित टेस्ट का विवरण
आब्जेक्टिव टेस्ट: 200 अंक, अवधि: 2 घंटे
(i) इंग्लिश लैंग्वेज (ग्रैमर, वकैब्यूलरी, कॉम्प्रिहेंशन)
(ii) जनरल अवेयरनेस, मार्केटिंग और कंप्यूटर्स
(iii) डेटा अनैलिसिस एवं इंटरप्रीटेशन
(iv) रीजनिंग (उच्च स्तरीय)
डिस्क्रिप्टिव टेस्ट: 50 अंक, अवधि: 1 घंटा
प्री में जो कैंडिडेट सबसे ज्यादा पर्सेंटाइल रैंकिंग या फिर कुल मार्क्स का 40 फीसदी या उससे ज्यादा (सामान्य श्रेणी) लाते हैं, उनको डिस्क्रिप्टिव टेस्ट के लिए योग्य माना जाता है। आरक्षित श्रेणी के लिए 35 फीसदी या उससे ज्यादा अंक लाना जरूरी होता है।
टेस्ट में कैंडिडेट की इंग्लिश लैंग्वेज के ज्ञान का टेस्ट लिया जाता है। इसमें चार सेक्शन होते हैं:- कॉम्प्रिहेंशन, शॉर्ट प्रिसाइज, लेटर राइटिंग और निबंध लेखन
ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू
लिखित परीक्षा क्वॉलिफाई करने वाले कैंडिडेट्स को ग्रुप डिस्कशन और इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इसके लिए अधिकतम अंक 50 होता है जिसमें 20 ग्रुप डिस्कशन के लिए और 30 इंटरव्यू के लिए होता है।
फाइनल मेरिट लिस्ट
फाइनल लिस्ट लिखित परीक्षा, ग्रुप चर्चा और इंटरव्यू में प्राप्त स्कोर के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा का अधिकतम अंक 250 होता है जिसे 75 पॉइंट स्केल में बदला जाता है। ग्रुप चर्चा और इंटरव्यू के लिए अधिकतम अंक 50 होता है जिसे 25 पॉइंट स्केल में बदला जाता है। इन दोनों को मिलाकर 100 पॉइंट स्केल पर कैंडिडेट्स की रैंकिंग की जाती है। फाइनल मेरिट लिस्ट के टॉप रैंक वाले कैंडिडेट्स का चयन होता है।
प्रमोशन का अवसर
प्रोबेशनरी ऑफिसर के लिए प्रमोशन के काफी अवसर होते हैं। 2 सालों का प्रोबेशन पीरियड पूरा करने के बाद उनको मैनेजर, सीनियर मैनेजर, असिस्टेंट जनरल मैनेजर (एजीएम), डेप्युटी जनरल मैनेजर (डीजीएम) या जनरल मैनेजर के पद तक भी प्रमोशन दिया जाता है। चार सालों की जॉब के बाद एक पीओ मैनेजर पद (स्केल II पद) पर प्रमोशन पाने के पात्र होते हैं। चार साल से पहले भी इस पद पर प्रमोशनल मिल सकता है लेकिन इसके लिए डिपार्टमेंटल एग्जाम या किसी मान्यता प्राप्त एजेंसी जैसे सर्टिफाइड असोसिएट्स ऑफ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ बैंकर्स (सीएआईआईबी) द्वारा आयोजित परीक्षा क्लियर करनी पड़ेगी।
वेतन: पीओ का वेतनमान हर बैंकों में अलग-अलग है। वैसे मोटे तौर पर 5.5 लाख रुपये सीटीसी बतौर पैकेज मिलता है। शहर और बैंक के हिसाब से वेतन कम या ज्यादा भी हो सकता है।
सुविधाएं: कर्मचारियों का पूरा चिकित्सा खर्च बैंक उठाता है और परिवार के सदस्यों पर होने वाला खर्च का तीन चौथाई हिस्सा बैंक मुहैया कराता है। इसके अलावा मुख्य बात यह है कि उनको बहुत ही कम ब्याज दर पर लोन मिल जाता है। बैंक के नियमों के मुताबिक, घर जाने या देश के अंदर किसी और जगह की यात्रा के लिए छुट्टी भत्ता मिलता है।
-एजेंसियां

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