लॉर्ड्स टेस्ट हारने के बाद कप्‍तान कोहली ने कहा, हम इसी लायक थे

टेस्ट की नंबर 1 टीम के कप्तान, जो ख़ुद बल्लेबाज़ी की रैंकिंग में पहले पायदान पर हैं, जब कहते हैं कि इस मैच (लॉर्ड्स टेस्ट) में ‘हम हार के ही लायक थे’ तो सवाल उठने लाजमी हैं.
कप्तान विराट कोहली निराश क्यों हैं, ये स्कोर कार्ड से ही साफ हो जाता है. भारतीय टीम इंग्लैंड के ख़िलाफ टेस्ट सिरीज़ के लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे मैच में चौथे दिन ही घुटने टेक बैठी.
मैच का पहला दिन बारिश की वजह से धुल गया था. इंग्लैंड ने भारत को हराने के लिए सिर्फ़ तीन दिन का वक़्त लिया और सिर्फ़ एक बार बल्लेबाज़ी की.
दुनिया भर में चर्चित भारतीय बल्लेबाज़ी क्रम के सितारा खिलाड़ी लॉर्ड्स में रन बनाना तो दूर पिच पर टिकने का माद्दा भी नहीं दिखा सके. भारतीय टीम पहली पारी में 35.2 और दूसरी पारी में 47 ओवरों में ही ऑल आउट हो गई.
पूरी टीम पर भारी वोक्स
मुरली विजय ने दोनों पारियों में स्कोरर को कोई तकलीफ नहीं दी. यानी ख़ाता ही नहीं खोला. दिनेश कार्तिक ने दोनों पारियों में मिलाकर एक ही रन बनाया. लोकेश राहुल और चेतेश्वर पुजारा दो पारियों में 18-18 रन का ही योगदान दे सके.
बर्मिंघम में खेले गए पहले टेस्ट मैच की दो पारियों को मिलाकर दो सौ रन बनाने वाले कप्तान के बल्ले से भी लॉर्ड्स में सिर्फ़ 40 रन ही निकले.
वहीं, इंग्लैंड की ओर से सातवें नंबर पर बल्लेबाज़ी करने आए ऑलराउंडर क्रिस वोक्स ने अकेले नाबाद 137 रन बना दिए.
भारत की पूरी टीम पहली पारी में 107 और दूसरी पारी में 130 रन ही बना सकी.
हार की क्या है वजह?
वोक्स के पास सिर्फ 25 टेस्ट का अनुभव है जबकि भारतीय बल्लेबाज़ अनुभव के पैमाने पर कहीं आगे हैं.
विराट कोहली 68, मुरली विजय और पुजारा 59-59, अजिंक्य रहाणे 47 और शिखर धवन 31 टेस्ट मैच खेल चुके हैं.
फिर भारतीय बल्लेबाज़ इस कदर नाकाम क्यों हो रहे हैं? क्या वो हालात के मुताबिक ख़ुद को ढाल नहीं पा रहे हैं?
कप्तान विराट कोहली का जवाब है, “आप बैठकर हालात को दोष नहीं दे सकते.”
तो फिर दिक्कत कहां है? इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ खेल पत्रकार अयाज़ मेमन कहते हैं कि इस बात आकलन किया जाना चाहिए कि आखिर ग़लती हो कहां रही है?
वो कहते हैं, “हम ये नहीं कह सकते कि भारतीय बल्लेबाज़ों के पास प्रतिभा नहीं है. धवन, पुजारा, रहाणे के पास टैलेंट है लेकिन कुछ तो ग़लत हो रहा है और इसकी पड़ताल जरूरी है.”
सवालों के घेरे में चयन
अयाज़ मेमन जिस ग़लती की ओर इशारा कर रहे हैं, कहीं वो टीम का चयन तो नहीं है?
भारतीय टीम मैनेजमेंट हर टेस्ट मैच में प्लेइंग इलेवन बदल रहा है. इससे ऐसी तस्वीर उभरती है कि मानो किसी भी खिलाड़ी को ये पता नहीं होता कि वो अगले टेस्ट मैच में खेलेगा या नहीं. इससे खिलाड़ियों के मनोबल पर असर होता है.
बर्मिंघम में शिखर धवन टीम में थे तो चेतेश्वर पुजारा बैंच पर थे. लॉर्ड्स में पुजारा को मौका मिला तो धवन बाहर हो गए. 18 अगस्त से शुरु होने वाले तीसरे मैच को लेकर भी तय नहीं है कि कौन सा खिलाड़ी बाहर होगा और किसे मौका मिलेगा.
अयाज़ मेमन कहते हैं, “खेल में मैन मैनेजमेंट की अहम भूमिका होती है. किस खिलाड़ी को किस तरह संभालना है, ये जिम्मेदारी कप्तान को निभानी होती है. कुछ खिलाड़ी टीम के अंदर के मुक़ाबले से डरते हैं. उन्हें ये डर होता है कि कोई और खिलाड़ी मेरी जगह ले सकता है.”
कप्तान पर बोझ
तो क्या भारतीय टीम के खिलाड़ी भी इस दुविधा में घिरे हैं और रन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं?
अयाज़ मेमन की राय है कि वक़्त रहते इसकी पड़ताल होनी चाहिए.
वो कहते हैं, “दो मैच हार गए हैं. सिरीज़ हारने की नौबत आ गई है. अगर अब विराट कोहली इस मसले को नहीं सुलझाते हैं तो समस्याएं बढ़ सकती हैं.”
37 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी कर चुके विराट कोहली ने टीम को 21 बार जीत दिलाई है. लेकिन लगातार दो हार के झटकों ने सबसे ज़्यादा चुनौतियां उनके सामने ही खड़ी की हैं.
बर्मिंघम में विराट कोहली का बल्ला चला था लेकिन वो टीम को जीत नहीं दिला पाए. भारत को पहले मैच में 31 रन से हार झेलनी पड़ी थी. इससे साफ है कि जीत के लिए दूसरे खिलाड़ियों को भी योगदान करना होगा.
अयाज़ मेमन को भी लगता है, “अब बोझ कप्तान पर आ गया है. उनकी जिम्मेदारी है कि टीम का चयन सही हो.”
लेकिन, क्या इससे बात बनेगी?
विराट कोहली कहते हैं, “हम 2-0 से पीछे हैं. हमारे पास एक ही विकल्प है कि सोच सकारात्मक रखें. इसे (स्कोर लाइन को) 2-1 बनाने की कोशिश करें.”
-BBC

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