तेलंगाना का कर्ज उतार सकती हैं निजाम म्‍यूजियम से गायब हुईं सिर्फ 3 चीजें

हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में पुरानी हवेली स्थित निजाम के म्‍यूजियम से निजाम सप्‍तम मीर उस्‍मान अली खान की चोरी की गईं तीन चीजों की कीमत यदि अंतर्राष्ट्रीय मार्केट के हिसाब से आंकी जाए तो वह इतनी होगी कि राज्य अपना एक साल के लिए कर्ज चुका सकेगा। वहीं अगर कुछ अन्य चोरी की गईं या गायब हुई चीजों की कीमत आंकी जाए तो तेलंगाना दो और सालों तक अपना सालाना ब्याज चुका पाएगा।
तेलंगाना अपने विभिन्न कर्जों पर हर साल लगभग 11 हजार करोड़ रुपये का कर्ज चुकाता है। शाहजहां से उस्मान अली खान को विरासत में मिली सोने की मोहर, निजाम डायमंड और निजाम तृतीय सिकंदर जहां के एक जोड़ी जूते की कुल कीमत 11 हजार करोड़ रुपये है।
कीमत 33 हजार करोड़ रुपये के करीब
शहर के मुद्राशास्त्रियों और प्राचीन वस्तुओं के विशेषज्ञों की मानें तो अगर निजाम म्यूजियम से चोरी हुईं या गायब हुईं कुछ और चीजों को जोड़ लिया जाए तो उनकी कुल कीमत 33 हजार करोड़ रुपये के करीब हो सकती है। निजाम डायमंड और सोने की मोहर कहां है, इस बात का कोई पता नहीं है लेकिन निजाम के जूते कनाडा के टोरंटो स्थित बाटा म्यूजियम में रखे हैं। आपको बता दें कि निजाम डायमंड अंतिम बार 70 साल पहले और सोने की मोहर 32 साल पहले देखी गई थी।
1967 में उस्मान अली खान की मौत के बाद या तो चोरी किया गया या फिर अवैध रूप से देश के बाहर ले जाया गया। हेरिटेज विशेषज्ञों का मानना है कि आर्ट ऐंड क्राफ्ट्स की 60 हजार से ज्यादा कलाकृतियां, जूलरी, क्रॉकरी, झूमर, जूते, हीरे, कीमती पत्थर और फर्नीचर तक को अवैध तरीके से देश के बाहर ले जाया गया है। निजाम के पास 400 टन सोना और 350 किलोग्राम बेहतरीन क्वॉलिटी के हीरे थे।
पहले भी गायब हुआ था डायमंड
शहर के इतिहासकार और जाने-माने मुद्राशास्त्री डॉ. मोहम्मद सैफुल्लाह ने कहा कि 1986 में जब सोने की मोहर स्विट्जरलैंड में नीलामी के लिए रखी गई थी तो उसकी शुरुआती कीमत 83 लाख यूएस डॉलर आंकी गई थी। उन्होंने कहा, ‘उस समय इसकी नीलामी नहीं हो पाई थी और उसके बाद इसे किसी ने नहीं देखा। ऐसी प्राचीन विरासतों के क्रेज को देखते हुए इन चीजों की कीमत हर दो सालों में दो से चार गुनी हो जाती है। उस मोहर का वजन 11.193 किलोग्राम था और वह दुनिया का सबसे बड़ा सोने का सिक्का था।’ आज के हिसाब से उस मोहर की कीमत 8 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है।
निजाम डायमंड लगभग दो शताब्दी पहले महबूबनगर में पाया गया था। उस समय इसका वजन 340 कैरेट था। वहीं सात दशक पहले जब यह गायब हुआ तो इसका वजन 270 कैरेट था। इसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय मार्केट में 2 हजार करोड़ आंकी गई है। बात करें सिकंदर जहां के जूतों की तो वे दुनिया के 10 सबसे महंगे जूतों में से एक थे। इन पर हीरे जड़े थे और इन्हें सोने के धागों से बनाया गया था।
-एजेंसियां

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