प्रदूषण के खिलाफ अभियान: इन खास गाड़ियों पर है दिल्‍ली पुलिस का फोकस

नई दिल्‍ली। परिवहन विभाग ने प्रदूषण के खिलाफ अभियान में 15 साल और 10 साल पुरानी गाड़ियों पर खास फोकस किया है। अब रोजाना 75 से 80 पुरानी गाड़ियों को जब्त किया जा रहा है। ये गाड़ी या तो सड़कों पर चलती पाई जा रही हैं या फिर मेन रोड पर खड़ी पाई जाती हैं।
परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में रजिस्टर्ड 46 लाख से ज्यादा गाड़ियां अपनी समय सीमा पूरी कर चुकी हैं, जिसमें से 4610294 पेट्रोल और दूसरे ईधन से चलने वाली और 77481 डीजल से चलने वाली गाड़ियां हैं।
अभी तक 937 पुरानी गाड़ियों को जब्त किया
परिवहन विभाग के जॉइंट कमिश्नर नवलेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि इस साल अभी तक 937 पुरानी गाड़ियों को जब्त किया गया है, जिसमें 772 गाड़ियां 15 साल पुरानी थी और 165 गाड़ियां 10 साल पुरानी थीं। उनका कहना है कि परिवहन विभाग ने पूरी दिल्ली में टीमों को तैनात किया है और प्रदूषण फैलानी वाली गाड़ियों पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
बिना पीयूसी के गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई
परिवहन विभाग जहां पेट्रोल पंप पर बिना पीयूसी के गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है, वहीं पुरानी गाड़ियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है। पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में 40 हजार से ज्यादा पीयूसी बनाए जा रहे हैं। नवंबर में अभी तक 591259 पीयूसी जारी किए गए हैं। अक्टूबर महीने में 805249 पीयूसी बने थे। परिवहन विभाग पुरानी गाड़ियों को जब्त करके स्क्रैप करवा रहा है। अभी तक जब्त की गई 193 गाड़ियों को स्क्रैप करवाया जा चुका है।
डीजल गाड़ियां 10 साल तक चल सकती हैं
दिल्ली में डीजल गाड़ियां 10 साल तक चल सकती हैं और पेट्रोल गाड़ियां 15 साल तक चल सकती हैं। अक्टूबर में सबसे ज्यादा 305 गाड़ियां जब्त की गई हैं। प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों के खिलाफ एक्शन तेज किया गया है। जहां धुआं छोड़ रही गाड़ियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है, वहीं मेन रोड्स पर खड़ी 15 साल पुरानी गाड़ियों को भी जब्त किया जा रहा है। इन गाड़ियों के कारण सड़कों पर जाम की स्थिति भी बनती है।
अभी तक 689 बसों को परमिट दिए जा चुके हैं
दिल्ली की सड़कों पर अब प्राइवेट सीएनजी बसें भी चल रही हैं। अभी तक 689 बसों को परमिट दिए जा चुके हैं और ये बसें सड़कों पर चल रही है। दिल्ली सरकार ने एक हजार प्राइवेट बसों को परमिट देने का फैसला किया है। हर बस को अभी एक महीने के लिए परमिट दिया जा रहा है। अब सरकार इन प्राइवेट बसों को सरकारी कॉलोनियों के आसपास लगाएगी ताकि कर्मचारी इन बसों से ऑफिस आ जा सकें।
-एजेंसियां

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