कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली ने दिवंगत सुशांत को किया सम्मानित

वॉशिंगटन। कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली ने दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को सम्मानित किया है। सम्मान के तौर पर मिले सर्टिफिकेट को अमेरिका में रहने वाली सुशांत की बहन श्वेता कीर्ति सिंह ने हासिल किया। उन्हें यह सम्मान भारतीय सिनेमा और संस्कृति में योगदान के लिए दिया गया है। बता दें कि सुशांत का शव 14 जून को मुंबई के उपनगर बांद्रा स्थित घर में लटका मिला था। इस कथित खुदकशी की सीबीआई जांच कर रही है।
भारतीय समुदाय के नेता अजय भूटोरिया ने कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली की ओर से सम्मान के तौर पर प्रमाणपत्र प्रदान किया। सर्टिफिकेट हासिल करने के बाद दिवंगत अभिनेता की बहन श्वेता ने कहा, ‘भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए अपने भाई की तरफ से कैलिफोर्निया स्टेट असेंबली द्वारा प्रदान किए जा रहे इस पुरस्कार को प्राप्त करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। संकट की इस घड़ी में निरंतर समर्थन के लिए असेंबली सदस्यों और भारतीय मूल के अमेरिकी समुदाय को धन्यवाद देती हूं।’
सुशांत के जीजा और श्वेता के पति विशाल कीर्ति सिंह ने कहा, ‘स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर स्टेट असेंबली ने भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए सुशांत को याद किया है। भारतीय मूल के लाखों अमेरिकी हैशटैग जस्टिस फॉर सुशांत सिंह राजपूत के लिए चल रहे अभियान को देख रहे हैं।’ विशाल ने कहा कि सुशांत की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए भारतीय मूल के अमेरिकी भारत सरकार से आस लगाए हैं।
विशाल कीर्ति ने बताया उस रात क्‍या हुआ
विशाल कीर्ति ने कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उस रात के बारे में बताया था कि जब उनकी बहनों को सुशांत के सुसाइड की खबर मिली थी। उन्होंने लिखा- ‘अमेरिका में 13 जुलाई जोकि शनिवार की रात थी। मैं और मेरा पूरा परिवार सभी गहरी नींद में थे। वहीं भारत में वो 14 जून दोपहर थी। मैं और मेरी पत्नी रात को फोन फ्लाइट मोड पर रखा था। इस बीच करीब रात को 2 बजे​ के आसपास ताबड़तोड़ कॉल आने लगे। मैंने परेशान होकर फोन उठाया तो जैसे मेरे सामने पूरी दुनिया धड़धड़ाकर गिर गई।’
उन्होंने आगे लिखा, ‘इसके बाद मैं पहले किसी से बात करता मैंने देखा कि कई और लोग हमसे इस बात की सच्चाई जानना चाहते थे कि ये न्यूज गलत तो नहीं है। जब मैंने खुद इस न्यूज़ को चेक किया तो मैं जानकर डर गया था कि सुशांत ने अपनी जान ले ली है। वो वक्त मेरे लिए मुश्किल भरा था जब मुझे इस भयानक खबर के बारे में श्वेता को बताना था। मैं आज तक भूल नहीं पाया हूं, उसका पहला रिएक्शन और रानी दी से की गई उसकी बातचीत। मेरा दिल टूट गया उन्हें फोन पर रोते हुए देखकर।
उस एक रात के बाद हमार पूरी लाइफ ही हमेशा के लिए चेंज हो गए है। बड़ी मुश्किल से कोरोना के बीच हमें एक दोस्त की मदद से फ्लाइट में श्वेता के लिए एक सीट मिली, जो 16 जून की थी। उससे भी मुश्किल था बच्चों को ये बताना कि उनके मामा अब इस दुनिया में नहीं हैं।’
-एजेंसियां

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