Cabinet दे सकती है दिवालिया कंपनी के बोली लगाने पर रोक को मंजूरी

नई दिल्‍ली। Cabinet से उस बदलाव को मंजूरी मिल सकती जिससे दिवालिया कंपनी के बोली लगाने पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार भुगतान में चूक करने वाले (डिफॉल्टर) प्रवर्तकों को फंसी परिसंपत्तियों में बोली लगाने से रोकने के लिए कई कदम उठा रही है। Cabinet  के   प्रस्‍ताव को मंंजूरी  मिलने  के बाद दिवालिया हो चुकी कंपनी के प्रोमोटर को दोबारा उस कंपनी में हिस्सेदारी लेने पर पाबंदी लग सकती है।

संसद के इसी सत्र में बिल में बदलाव पेश भी हो सकता है। सरकार एक तो दिवालिया कानून में संशोधन करेगी वहीं, सभी बोलीदाताओं को उनके समाधान प्रस्ताव के साथ अग्रिम भुगतान के लिए कहेगी। कानून के अमल में आ रही दिक्कतों को दूर करने और विभिन्न मुद्दों की पहचान करने के लिए सरकार ने 14 सदस्यीय समिति गठित की है। बता दें कि इस कानून के तहत मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

मंत्रालय की ओर से आया प्रस्ताव

सरकार में एक उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि कंपनी मामलों के मंत्रालय ने एक कैबिनेट प्रस्ताव जारी किया है। जिसके तहत इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंगक्रप्टसी कोड (आईबीसी) में एक अतिरिक्त प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव है, साथ ही प्रवर्तकों को उनकी कंपनियों में बोली लगाने की नई शर्तें तय करने के लिए कुछ दूसरे प्रावधानों में भी संशोधन किया जाएगा। हाल में ही सरकार ने बोली स्वीकृत करने के नियमों पर स्पष्टीकरण जारी किया था और आईबीसी के मौजूदा नियमों में कुछ नए प्रावधान जोड़े थे। नए नियमों में समस्या समाधान के आवेदन की विश्वसनीयता और पुराने रिकॉर्ड पर ध्यान दिया गया है।

आया था आरबीआई का आदेश

अध्यादेश की जरूरत इसलिए महसूस की जा रही है क्योंकि सरकार का मानना है कि मौजूदा प्रवर्तकों को बोली लगाने की अनुमति दिए जाने से पूरी दिवालिया प्रक्रिया का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इस साल जून में भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को 12 कंपनियों को आईबीसी के तहत राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) भेजने का आदेश दिया था। ये कंपनियां ऋण चुकाने में असफल हो गई थीं, जिसके बाद आरबीआई ने यह आदेश दिया था। इन 12 कंपनियों में पांच इस्पात कंपनियों और एमटेक ऑटो को संभावित खरीदारों से काफी कम प्रस्ताव मिले हैं। फिलहाल प्रवर्तकों को फंसी परिसंपत्तियों के लिए समाधान योजना सौंपने की अनुमति है।

Cabinet  के   प्रस्‍ताव को मंंजूरी  मिलने  के बाद दिवालिया हो चुकी कंपनी के प्रोमोटर को दोबारा उस कंपनी में हिस्सेदारी लेने पर पाबंदी लग सकती है।

-एजेंसी