अमेरिका के प्रतिबंध ताक पर, ईरान ने गैसोलीन के टैंकर वेनेजुएला भेजे

काराकास। अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को ताक पर रखते हुए ईरान ने गैसोलीन से भरे पांच टैंकर वेनेजुएला के लिए रवाना किए हैं जिनमें एक पहुंच भी गया है।
ईरान का उद्देश्य दक्षिण अमेरिकी राष्ट्र को ईंधन की कमी से राहत देना है। तेल टैंकर ‘फॉर्च्यून’ आसानी से कैरिबियाई जलक्षेत्र के जरिये वेनेजुएलियाई तट पर पहुंच गया। जल क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के जहाज मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए गश्ती कर रहें हैं लेकिन ईरानी टैंकर को इस दौरान अमेरिका की रोक-टोक का सामना नहीं करना पड़ा है।
ईंधन की कमी से जूझ रहा वेनेजुएला टैंकर के पहुंचने पर बेहद खुश है। विदेश मंत्री जॉर्ज अरियजा ने ट्वीट किया, ‘ईरान और वेनेजुएला ने बुरे वक्त में हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘आज, गैसोलीन के साथ पहला जहाज हमारे लोगों के लिए पहुंच गया।’ टैंकर और उसके पीछे चल रहे चार और पोत जल्द वेनेजुएला पहुंच जाएंगे।
उधर, अमेरिका के मियामी स्थित निवेश कंपनी कराकस कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख रस डालेन ने पोत का पता लगाने की तकनकी का इस्तेमाल कर ‘फॉर्च्यून’ की लोकेशन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि पांच में से सबसे अंतिम पोत, अगुआ टैंकर से करीब साढ़े तीन दिन पीछे चल रहा है। अमेरिका की तरफ से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला को गंभीर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और यही वजह है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार होने के बावजूद पेट्रोलियम के उत्पादन में यहां कमी आई है। दो दशकों में अमेरिका के साथ तनाव की वजह से उसे गैसोलीन का दूसरे देशों से आयात करना पड़ रहा है।
टैंकर भेजने से पहले ईरान ने US को किया था आगाह
ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी ने शनिवार को अमेरिका को आगाह किया था कि वह वेनेजुएला जाने वाले इसके शिपमेंट के रास्ते में न आए। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने दुनिया के हिस्से में स्वीकार न करने वाली शर्तें लगाई हैं लेकिन ईरान किसी भी रूप में झगड़े की शुरुआत नहीं करेगा। उन्होंने कहा, ‘अगर हमारे टैंकर कैरीबिया जल क्षेत्र या कहीं और अमेरिका द्वारा पैदा की गई मुश्किल झेलते हैं, उन्हें भी समस्या झेलनी पड़ेगी। उम्मीद है कि अमेरिका कोई भी गलती नहीं करेगा।’
ईरान की गतिविधियों पर नजर गड़ाए हैं अमेरिका
ट्रंप प्रशासन ने 2015 में ईरान के साथ हुए परमाणु समझौते से खुद को अलग करने का फैसला किया था और तेहरान पर नए दौर का प्रतिबंध लगा दिया था। ईरान का यह समझौता पी5+1 (सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य और जर्मनी) और यूरोपी संघ के साथ हुआ था। इसके बाद पहले से ही तनावपूर्ण चल रहे अमेरिका और ईरान के संबंध में फिर कड़वाहट घुल गई। यह कड़वाहट तब और बढ़ गई जब इराक में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की अमेरिकी एयर स्ट्राइक में मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने भी इराक में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर रॉकेट से निशाना दाग लेकिन इसमें सैनिक बाल-बाल बच गए। उसके बाद से दोनों देशों के नेताओं के बीच जुबानी लड़ाई जारी है। अब देखना महत्वपूर्ण है कि वेनेजुएला को टैंकर भेजने पर ट्रंप प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया आती है।
-एजेंसियां

50% LikesVS
50% Dislikes

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *