कोरोना वॉर‍ियर्स का सम्मान न पाने से व्यापारी वर्ग व्यथ‍ित: जितेंद्र प्रजापति

मथुरा। व्यापारी समाज के साथ आज बड़ी ही विकट स्थिति है, संपूर्ण भारतवर्ष में कोरोना की महामारी के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मियों एवं पुलिसकर्मियों को तो सारा देश कोरोना वारियर्स की हैसियत से सम्मान और पुष्प वर्षा कर रहा है परंतु व्यापार‍ियों को इस श्रेणी में नहीं रखा गया , व्यापार‍ियों को कोरोना वॉर‍ियर मानने से सभी कतरा गए।

इस पीड़ा से दो-चार होने वाले सभी व्यापार‍ियों की ओर से नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रभारी जितेंद्र प्रजापति ने कहा क‍ि मैं भी एक व्यापारी हूं और जब हमारे प्रधानमंत्री माननीय श्री मोदी जी इन फ्रंट लाइन वॉरियर्स के सम्मान में ताली बजाने के लिए, घंटे बजाने के लिए, पुष्प वर्षा के लिए कहते हैं तो हमने भी इन फ्रंट लाइन वारियर्स का सम्मान करते हुए पुष्प वर्षा की, तालियां बजाई, दिए जलाए।

इस सबके बावजूद मन में एक व्यथा कहीं कोने में थी कि मेरे जैसे सैकड़ों हजारों व्यापारी भाई अपनी जान को जोखिम में डालकर समाज की सेवा के लिए अपनी दुकानों को शासन और प्रशासन के निर्देश के अनुसार राशन वितरण में, दवाई वितरण में और अन्य आवश्यक सामग्रियों के वितरण के लिए पूरे देश भर में सेवा दे रहे थे और उनके बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं थी।

चर्चा थी तो केवल व्यापारी को चोर, मुनाफा खोर और समाज के दुश्मन के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा था। क्या वाकई इस महामारी के दौर में आप के निकट पड़ोस का दुकानदार अपने परिवार की और अपनी सुरक्षा को छोड़कर आपके लिए जरूरी सामान का इंतजाम कर रहा था।

सुबह मुंह अंधेरे उठकर होलसेलर से सामान लाना। बाजारों में लगने वाली भीड़ में अपनी दुकान पर आने वाले लोगों से संक्रमण का खतरा। पुलिस प्रशासन और समाज की प्रताड़ना को सहते हुए भी अपने सेवा वाले धर्म को बड़े ही विनम्रता से निष्पादित कर रहा था। कभी भी कोई आकांक्षा या अपेक्षा इस बात की नहीं कि हमें भी इस मुश्किल वक्त में समाज के कोरोना वारियर्स के रूप में कुछ सम्मान मिल जाए।

मिला हमें तो केवल समाज की धिक्कार, शासन प्रशासन का उत्पीड़न और चोर, मुनाफा खोर का ठप्पा। प्रजापत‍ि ने आमजन को संबोध‍ित करते हुए कहा क‍ि मित्रों खाली बैठे इस समय में विचार करिएगा क‍ि हमारे समाज का यह छोटा सा तबका अगर आपकी सेवा के लिए उपलब्ध ना होता तो क्या परिस्थिति होती।

दुकानों से सामान ना मिलता, पैसे लेकर भी बाजार में दवाई, सब्जी, दूध, अनाज जैसी जरूरी चीजों की आपूर्ति ना होती। क्या केवल शासन और सरकारी मशीनरी के भरोसे इस लॉक डाउन की अवधि में वाकई संपूर्ण समाज की सेवा संभव थी। अगर नहीं तो मेरा एक छोटा सा निवेदन कि अपने निकट के दुकानदार, सब्जी वाले, दूधवाले व छोटे व्यापारी को एक बार एक छोटा सा सम्मान देने का प्रयास करिएगा तो उसके दिल में और उसकी आंखों में भरे हुए आंसुओं से आपको पता चलेगा कि यह व्यापारी यह छोटा दुकानदार इस महामारी के समय में देश का सबसे बड़ा कोरोना वारियर है और चुपचाप बिना किसी आकांक्षा और अपेक्षा के धैर्य से आपकी सेवा कर रहा है।

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