Digitalization से कम हुई रिश्वतखोरी: ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल

नई द‍िल्ली। आज अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोध दिवस है, इस द‍िन हमारे देश के बारे में एक अच्छी खबर आई है , दरअसल Transparency International द्वारा किए गए एक हालिया सर्वे के अनुसार Digitalization से वित्त वर्ष 2019 में देश के 20 राज्यों में भ्रष्टाचार 10 फीसदी कम हुआ है। इंडिया करप्शन सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार, Digitalization से सरकारी कार्यों में रिश्वतखोरी पर कुछ हद तक लगाम लग गई है।
इसलिए है इस दिन का महत्व
2030 के सतत विकास लक्ष्य को बनाए रखने, भ्रष्टाचार के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को भी प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यह दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक भ्रष्टाचार एक गंभीर अपराध है। यह समाज की बनावट को भी खराब करता है।
आधार, डिजिटल अर्थव्यवस्था ने कम की रिश्वतखोरी
आधार और डिजिटल अर्थव्यवस्था ने रिश्वतखोरी में काफी कमी की है। सर्वे में 248 जिलों के 1,90,000 लोगों से भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को लेकर के सवाल पूछने पर 51 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्होंने पिछले 12 महीनों में एक बार रिश्वत जरूर दी है। वहीं 97 फीसदी भारतीय मानते हैं कि आधार कार्ड की वजह से सरकारी राशन, सरकार के द्वारा किसानों को दी जाने वाली सहायता राशि और मनरेगा जैसे भुगतान काफी हद तक भ्रष्टाचार शून्य हो गए हैं और दो तिहाई से अधिक लोग यह मानते हैं कि आधार कार्ड सरकार की एक अच्छी कोशिश है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया एक गैर राजनीतिक, स्वतंत्र और गैर सरकारी भ्रष्टाचार रोधी संगठन है।
सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार चरम पर
देश में पासपोर्ट और रेल टिकट जैसी विभिन्न आम आदमी से जुड़ी सुविधाओं में डिजिटलीकरण और कम्प्यूटरीकरण किए जाने से रिश्वत और भ्रष्टाचार में कमी आई है। इस सर्वेक्षण में यह बात भी उभरकर आई कि सरकारी दफ्तरों में अभी भी बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी की जा रही है। वर्ष 2019 में ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 26 फीसदी हो गई है। सर्वेक्षण में 26 फीसदी लोगों ने यह भी माना कि प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन और जमीन से जुड़े मामलों में उन्हें रिश्वत देनी पड़ी है। इसी तरह 19 फीसदी ने माना कि उन्हें पुलिस विभाग में रिश्वत देना पड़ी।
इन राज्यों में भ्रष्टाचार चरम पर
जिन राज्यों में भ्रष्टाचार चरम पर है उनमें राजस्थान, बिहार, उत्तरप्रदेश, तेलंगाना, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, झारखंड और पंजाब शामिल हैं। जबकि दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, पश्चिम बंगाल, केरल और उड़ीसा में भ्रष्टाचार काफी कम हो गया है। देश में 5205 आईएएस में से जिन 444 ने अपनी अचल संपत्ति संबंधी जानकारी अब तक नहीं दी है, उन्हें केंद्र सरकार ने कहा है कि 31 जनवरी 2020 तक ऐसी जानकारी न देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
पड़ोसी देशों में चीन, पाकिस्तान शीर्ष पर
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने 2018 की करप्शन इंडेक्स रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत, अर्जेंटीना, आइवरी कोस्ट और गुयाना जैसे देशों की स्थिति पहले से बेहतर हुई है। बीते साल भारत को इस रिपोर्ट में 40 अंकों के साथ 81वें नंबर पर रखा गया था। दुनियाभर के 180 देशों की सूची में भारत तीन स्थान के सुधार के साथ 78वें पायदान पर पहुंच गया है। वहीं इस सूचकांक में चीन 87वें और पाकिस्तान 117वें स्थान पर हैं।
बीते दस सालों में ये पहला मौका है जब भारत इस स्थान पर पहुंचा है। साल 2008 के बाद से भारत का प्रदर्शन धीरे-धीरे सुधरता रहा है। चीन 2017 में भारत से ऊपर था लेकिन 2018 में यह फिसलकर 87वें स्थान पर पहुंच गया। जिन देशों को सबसे कम भ्रष्ट माना जाता है, उनके अंक भी इस रिपोर्ट में गिरे हैं।

– एजेंसी

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