ब्रजधाम को वेटिकन सिटी की तरह संरक्षित करने की आवश्यकता

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में ब्रज-वृन्दावन के प्राचीन मंदिर, घाट, धरोहर, बुर्जियां, कुंज-निकुंजों, धर्मशालाओं का संरक्षण करते हुए विकास कर पर्यटन को बढ़ावा देने एवं आने वाले तीर्थयात्रियों एवं श्रद्धालुओं को होने वाली परेशानियों के संबंध में अवगत कराया। साथ ही ब्रजधाम को ’’वेटिकन सिटी’’ की तरह संरक्षित करने की बात कही।

पत्र में उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ास्थली होने के कारण ब्रज-वृन्दावन में प्रतिवर्ष 8.5 करोड़ तीर्थयात्री तीर्थांटन के लिए यहां आते हैं। केन्द्र एवं राज्य सरकार को चाहिए कि वह ब्रज-वृन्दावन धाम की प्राचीन धरोहर यहां के मंदिर, घाट, बुर्जियां, कुंज-निकुंजों, धर्मशाला संस्कृति का संरक्षण करते हुए यहां के पर्यटन/तीर्थाटन को और अधिक विकसित किया जाये, ब्रज-वृन्दावन के प्राचीन स्वरूप एवं श्रीकृष्ण की बाललीलाओं को महत्व देते हुए यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलना चाहिए।

सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया कि वृन्दावन में इस समय लगातार नए मंदिर बन रहे हैं, अच्छी बात है, लेकिन ब्रज-वृन्दावन में ही काफी प्राचीनतम मंदिर ऐसे भी हैं, जो अनदेखी/देखरेख के अभाव में अस्तित्व विहीन हैं, सरकार को उनके संरक्षण पर भी प्रबल ध्यान देने की आवश्यकता है। ब्रज-वृन्दावन में 100 वर्ष ऊपर तक की प्राचीन धर्मशाला भी हैं, जो कि तीर्थयात्रियों/श्रद्धालुओं के लिए बेहद कम शुल्क/निशुल्क ठहरने के लिए संस्थापकों द्वारा बनवाई गई थीं, लेकिन भूमाफिया एवं प्रशासनिक गठजोड़ के चलते यहां की धर्मशाला संस्कृति लगातार हास होती जा रही है, यहां पर स्थित प्राचीन पर्यटन को अभी और अधिक संरक्षण की बहुत आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सोचने वाली बात है कि विदेशी श्रद्धालु दुनियाभर की सुख-सुविधाएं छोड़कर ब्रज-वृन्दावन धाम आकर रहते हैं, उसका मूल कारण ब्रजधाम के प्रति उनका लगाव, ठीक वैसे ही सरकार को चाहिए कि यहां की संस्कृति के अनुरूप ही ब्रंजधाम का विकास होना चाहिए, ब्रजधाम को ’’वेटिकन सिटी’’ की तरह संरक्षित किया जाना चाहिए।

ब्रजधाम में श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा ओर को इंगित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला ने कहा कि ब्रज के विभिन्न तीर्थस्थलों पर श्रद्धालु सुविधाओं से वंचित हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए सरकारी स्तर पर यातायात तंत्र की व्यवस्था बहुत लचर है। डग्गेमार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। सरकार द्वारा बनाए गए सुलभ शौचालय एवं पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था बहुत ठीक नहीं है।

पत्र के अन्त में उन्होंने प्रधानमंत्री जी से विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर अनुरोध किया कि ब्रज-वृन्दावन में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन यहां की संस्कृति का संरक्षण करते हुए उनको सही तरीके से सरकार एवं स्थानीय लोगों के सहयोग से क्रियान्वित किए जाने की आवश्यकता है।

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