उन्‍नाव के प्रेमगंज का कोई भी आदमी कुछ बोलने को तैयार नहीं

उत्तर प्रदेश के उन्नाव ज़िले का ​प्रेमगंज गांव उत्तर भारत के किसी भी अन्य गांव जैसा ही दिखता है. कुछ

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देह तक सिमटे ”कथित फरिश्‍ते”

देह तक सिमटे ”कथित फरिश्‍ते” ही कहते हैं कि नारी नरक का द्वार है हम जिस आदि धर्म को ”सनातन” कहते

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ये बाबा रामदेव और दूसरे योग गुरुओं से पहले की बात है

ये आज के दौर में मशहूर बाबा रामदेव और दूसरे योग गुरुओं से पहले की बात है. पश्चिम में जब

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क्‍या है ‘ब्लडमून’, ‘सुपरमून’ और ‘ब्लूमून’ वाला चन्‍द्रग्रहण

आज यानि 31 जनवरी को भारत और दुनिया भर के लोगों को एक दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी. यह

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800 साल बाद भी यरूशलम के ‘होली लैंड’ में भारत के नाम से आबाद है एक कोना

यरूशलम का पुराना शहर. यहूदी, ईसाई और मुस्लिम समुदायों का पवित्र स्थान जिसे आम तौर पर ‘होली लैंड’ के नाम

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जानिए: 68 साल पहले किस तरह मनाया गया था गणतंत्र दिवस

हिंदुस्तान अपना गणतंत्र दिवस मना रहा है, ऐसे में आज से 68 साल पहले देश की राजधानी दिल्ली में किस

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भविष्‍य के हाथों में खंजर देकर देख लिया, अब गिरेबां में झांकने का वक्‍त

बच्‍चों में फैलती हिंसा पर पिछले कुछ दिनों में इतने लेख लिखे गए हैं कि समस्‍या पीछे छूटती गई और

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 121वीं जयंती पर उनके जीवन के अनछुए पहलुओं की पड़ताल

ये 1934 का साल था. सुभाष चंद्र बोस उस वक्त ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में थे. उस वक्त तक उनकी

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whatsapp पर तैरते इस विराट झूठ का कड़वा सच क्‍या है ?

…कि इस समय मेरी जिह्वा पर जो एक विराट् झूठ है वही है–वही है मेरी सदी का सब से बड़ा

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विवेकानंद जयंती : तुम्हारी आत्मा के अलावा कोई और गुरु नहीं है

स्‍वामी विवेकानंद ने कहा था कि- You have to grow from the inside out. None can teach you, none can

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UP में न्याय पंचायतों का खात्मा करना क्‍या सही निर्णय है?

स्वयं को भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का पोषक दल बताने वाले भारतीय जनता पार्टी के विचारकों के लिए यह आइना

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हममें और कुत्तों में कोई अंतर थोड़े ही है

”हममें और कुत्तों में कोई अंतर थोड़े ही है. जहां हम लोग सोते हैं, वहीं कुत्ते भी सोते हैं. हमारी

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नाजायज़ शोर

किसी भी धर्म का मर्म व्‍यक्‍ति की अंतध्‍वर्नि को जाग्रत करने में निहित है ताकि धर्माचरण के बाद प्रवाहित होने

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लिखी गईं नई इबारतें…कि ये ख्‍वाहिशें रूमानी नहीं हैं…

आज के विषय पर सबसे पहले पढ़िए मेरे चंद अशआर….. ये परेशानियां जिस्‍मानी नहीं हैं ये ख्‍वाहिशें रूमानी नहीं हैं

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