ट्रस्‍ट पर आरोप मंद‍िर न‍िर्माण में रोड़ा डालने की कुचेष्‍टा: जैन

मथुरा। विश्व हिंदू परिषद की मथुरा महानगर इकाई ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा भूम‍ि खरीद मामले में घोटाले का आरोप लगाने वालों की न‍िंदा की है। व‍िहि‍प के कार्याध्यक्ष अमित जैन ने बताया कि कुछ लोग अभी भी भव्य एवं दिव्य श्री राम मंदिर के निर्माण में रोड़ा अटकाने का कार्य कर रहे हैं और क्योंकि यह राष्ट्र मंदिर बन रहा है, इस वजह से विपक्षी दलों को यह बात हजम नहीं हो पा रही है और वह हिंदू समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं।

आम आदमी पार्टी व विपक्षी दलों द्वारा बताया जा रहा कथन पूर्णता असत्य और राजनीतिक प्रेरणा से ग्रस्त है। 18 मार्च 2021 को दो नहीं बल्कि तीन अनुबंध हुये थे, दो अनुबंधों का ज़िक्र आम आदमी पार्टी ने किया, तीसरा अनुबंध वह जिसे वह छिपा गए। दरअसल तीसरा वाला 18 मार्च को सबसे पहले हुआ। इस अनुबंध के अनुसार कुसुम पाठक, हरीश पाठक का सुल्तान अंसारी बिल्डर और पार्ट्नर के साथ दो करोड़ में बेचने का अनुबंध (agreement to sale) था, जो क‍ि वह निरस्त कर रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम को क्रमवार बताते हुए अम‍ित जैन ने कहा क‍ि—

1. इस भूमि के संबंध में कई विक्रेताओं के पक्ष में वर्ष 2011, वर्ष 2017 व वर्ष 2019 तक तीन अनुबंध हुए हैं।

2. 2019 में पाठक ने यह ज़मीन दो करोड़ में सुल्तान अंसारी बिल्डर + 8 पार्टनर्स को बेचने हेतु रजिस्टर्ड करारनामा (agreement to sale) किया जिसके एवज़ में पचास लाख रुपए नगद लिए गए। उस समय तक राममंदिर का फ़ैसला नहीं आया था तो अयोध्या में ज़मीनों का रेट काफ़ी कम था।

3. 18 मार्च 2021 को पाठक ने सर्वप्रथम यह करारनामा कैंसिल किया, जब तक यह करारनामा कैंसिल नहीं होता, पाठक इसे किसी को नहीं बेच सकते थे।

4. फिर उसी दिन उन्होंने यह ज़मीन सुल्तान अंसारी बिल्डर को इसी रेट 2 करोड़ में बेची।

5. फिर सुल्तान अंसारी बिल्डर से यह ज़मीन विहिप (श्री राम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट) ने 18.50 करोड़ (जिसकी मार्च में बाजारू कीमत 24 करोड़ रुपए थी) मे पूर्ण तत्परता एवं पारदर्शिता के साथ रजिस्ट्री करा ली। दो साल पहले की बात अलग थी, तब दो करोड़ की जो ज़मीन थी अब अयोध्या में 18.50 करोड़ (सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम जन्मभूमि का मुद्दा सुलझने के बाद) की होना नेचुरल है।
यह सामान्य प्रेक्टिस है। बिल्डर तिहाई चौथाई पैसा देकर किसान से लैंड अग्रीमेंट कर लेते हैं लम्बे समय के लिए और फिर वह ढूँढते हैं पार्टी को जो उस ज़मीन को ख़रीद सके। किसान ने चूँकि अग्रीमेंट कर रखा है तो वह बिल्डर को उसी रेट में ही बेंच सकता है जिस रेट में पहले से तय है। जैसे ही बिल्डर को पार्टी मिल जाती है या इसी बीच ज़मीन का रेट बढ़ गया तो बिल्डर सौदा तय कर देता है पार्टी के साथ, पार्टी की मजबूरी है बिल्डर से ही ख़रीदना क्योंकि बिल्डर का किसान से अग्रीमेंट है, फिर रेजिस्ट्री वाले दिन बिल्डर पहले अग्रीमेंट कैंसिल करता है, फिर प्रॉपर्टी को पुराने रेट में ख़रीदता है और नए रेट में पार्टी को बेंच देता है।

प्रॉपर्टी डीलर्स के द्वारा अपनाई जाने वाली यह एक सामान्य प्रेक्टिस है। जो भी प्रॉपर्टी का कार्य करते हैं या जो किसान अपनी ज़मीन बिल्डर को बेंचते हैं उन्हें पता होता है की शहरों में भी बिल्डर ऐसे ही बिल्डर अग्रीमेंट करते हैं। फिर ज़मीन डिवेलप कर महँगे दाम पर बेंचते हैं, ऑरिजिनल पार्टी को रेट वही मिलता है जितना उसने अग्रीमेंट में तय किया होता है, ठीक समय पर पैसा फँसाने के एवज़ में कमाई बिल्डर खाते हैं, यह उनके रिस्क की वसूली होती है।
अत: जो लोग मंदिर निर्माण में कदम-कदम पर बाधा डालते रहे और श्रीराम का अस्तित्व नकारने की साजिश रचते रहे, आज वे नए सिरे से कुचक्र रचने की फिराक में हैं। हालांकि ऐसी साजिश रचकर वे स्वयं के ही जाल में फंसने वाले हैं।
– Legend News

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