बीजेपी ने विपक्ष के भारत बंद को असफल बताया: कहा, खीझ कर खौफ़ का माहौल बना रहे हैं

रविशंकर प्रसाद ने बंद के कारण एंबुलेंस न पहुंच पाने से दो वर्षीय बच्ची की मौत का ज़िक्र करते हुए विपक्ष के इस क़दम की निंदा की
रविशंकर प्रसाद ने बंद के कारण एंबुलेंस न पहुंच पाने से दो वर्षीय बच्ची की मौत का ज़िक्र करते हुए विपक्ष के इस क़दम की निंदा की

नई दिल्‍ली। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के भारत बंद के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं की सत्ताधारी पार्टी बीजेपी ने कड़े शब्दों में निंदा की है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार पर पेट्रोल और डीज़ल के दाम को लेकर जो आरोप लगाए थे, बीजेपी ने उसका जवाब दिया है.
बीजेपी नेता और देश के क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि विपक्ष का भारत बंद असफल रहा है.
उन्होंने बिहार में बंद के कारण एंबुलेंस न पहुंच पाने से एक दो साल की बच्ची की मौत का ज़िक्र करते हुए विपक्ष के इस क़दम की निंदा की.
उन्होंने कहा कि जनता को आज कोई परेशानी नहीं, इसीलिए जनता इस बंद के साथ नहीं खड़ी है. इसी वजह से कांग्रेस और विपक्ष के लोग खीझ कर खौफ़ का माहौल बना रहे हैं
उन्होंने कहा कि हिंसा और मौत का खेल बंद होना चाहिए. ‘जब जनता का समर्थन नहीं मिलता तो उग्रता का प्रदर्शन को बंद को सफल बनाने की कोशिश की जा रही है.’
डीज़ल-पेट्रोल पर सफ़ाई
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ‘डीज़ल-पेट्रोल की कीमत का बढ़ना हमारे हाथ से बाहर है क्योंकि तेल उत्पादक देशों ने उत्पादन को सीमित कर रखा है. वेनेजु़एला में राजनीतिक अस्थिरता है, ईरान अमरीकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है और अमरीका में शेल गैस का उत्पादन नहीं हो रहा है. दुनिया में तेल की मांग और पूर्ति का अनुपात गड़बड़ है. इस वजह से तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं. इस पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है.’
उन्होंने यूपीए के दौर का ज़िक्र करते हुए कहा कि उस समय 39 रुपये से 73 रुपये पर पहुंच गया था पेट्रोल क्योंकि ये ऐसी समस्या है जिसका हल सरकार के पास नहीं. ये अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ‘हमारी सरकार ने मुद्रास्फीति को कम करने की कोशिश की और कामयाबी भी मिली है. यूपीए के समय 10.4 थी महंगाई दर जबकि हमारे शासन काल में यह 4.7 हो गई है.’
विपक्ष के आरोप
इससे पहले पेट्रोल औ डीज़ल के बढ़ते दाम के ख़िलाफ़ विपक्ष के भारत बंद के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक धर्म को दूसरे से, एक जाति को दूसरी जाति से लड़ाने का काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी कांग्रेस के 70 सालों में विकास न होने की बात करते हैं. लेकिन असलियत यह है कि पिछले 70 साल में रुपया इतना कमज़ोर नहीं रहा जितना मोदी शासन के चार सालों में हो गया है.
राहुल गांधी ने कहा कि पेट्रोल 80 रुपये के पार चला गया है और डीज़ल 80 से थोड़ा ही कम है, लेकिन नरेंद्र मोदी पूरा देश घूमते हैं पर इसके बारे में एक शब्द भी नहीं कहते.
राहुल गांधी ने गैस सिलेंडर के दाम की बात भी की और कहा कि यूपीए के समय 400 रुपये का सिलेंडर अब 800 रुपये में बेचा जा रहा है.
उन्होंने बलात्कार और हत्याओं का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पीएम मोदी इस पर भी कुछ नहीं कहते.
इसके अलावा राहुल गांधी ने काला धन, नोटबंदी, जीएसटी का मुद्दा उठाकर पहले की तरह ही केंद्र की सरकार पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान में केवल 15-20 क्रोनी कैपिटलिस्ट को रास्ता नज़र आता है, आम लोगों को नहीं क्योंकि सरकार की नज़र केवल उन्हीम 15-20 लोगों पर है.
भाषण के आखिर में उन्होंने कहा कि ‘सभी विपक्षी दल एक साथ बैठे हैं ये ख़ुशी की बात है. हम एक साथ मिलकर बीजेपी को हराने जा रहे हैं.’
बंद की कॉल
पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों के ​विरोध में कांग्रेस ने भारत बंद की जो कॉल दी है उसका कई राज्यों में असर दिखाई पड़ रहा है. इस बंद में कांग्रेस के साथ कुछ अन्य विपक्षी दल भी हिस्सा ले रहे हैं.
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली के राजघाट से बंद की शुरूआत की. राजघाट पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी पहुंचे और विपक्ष से एकजुट रहने की अपील की.
कांग्रेस का दावा है कि समाजवादी पार्टी, बसपा, तृणमूल कांग्रेस, डीएमके और राजद समेत 21 दल इस भारत बंद का समर्थन कर रहे हैं.
पिछले कुछ समय से पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. रविवार को पेट्रोल के दाम में 12 पैसे प्रति लीटर और डीज़ल के दाम में 10 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोत्तरी हुई.
कुछ राज्यों में पेट्रोल के दाम 80 रुपये को पार गए हैं जो अब तक की सबसे ज़्यादा क़ीमत है. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 80.50 रुपये और डीज़ल की कीमत 72.60 रुपये प्रति लीटर हो गई है. बिहार में पेट्रोल के दाम इससे भी ज़्यादा हो गए हैं.
कैसा चल रहा है देश भर में बंद
झारखंड में बंद को लेकर सभी वाम पार्टियाँ, कांग्रेस, राजद, झारखंड विकास मोर्चा आदि के नेता सड़कों पर उतरे हैं.
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बंद को नैतिक समर्थन दिया है. इनके कार्यकर्ता सड़कों पर साथ नहीं आए.
जम्मू में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तेल के बढ़ते दामों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया. हालांकि वहां सभी शैक्षणिक संस्थान खुले हैं.
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में बंद का व्यापक असर देखने को मिला है. स्कूल-कालेज, परिवहन और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह से ठप्प होने की खबरें हैं.
मुंबई में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने घाटकोपर-अंधेरी मेट्रो लाइन ब्लॉक कर दी थी, लेकिन बाद में मुंबई मेट्रो के ट्वीटर हैंडल से ख़बर आई कि मेट्रो सेवा शुरू हो गई है.
वहीं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अंधेरी स्टेशन पर रेलने लाइन ब्लॉक की. महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख अशोक चौहान ने ही सुबह रेल रोको विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की थी.
ईस्ट कोस्ट रेलवे ज़ोन को 12 ट्रेन कैंसिल करनी पड़ी हैं जिसमें भुवनेश्वर-हावड़ा जन शताब्दी भी शामिल है.
कांग्रेस को भरपूर समर्थन की उम्मीद
कांग्रेस का कहना है कि उसे कई विपक्षी दलों से समर्थन हासिल हुआ है. हालांकि लेफ्ट पार्टियों ने अलग से भारत बंद का आह्वान किया है.
सोमवार को होने वाले बंद की व्यापकता के बारे में कांग्रेस महासचिव शकील अहमद ने बताया, ”कांग्रेस ने भारत बंद की अपील की है और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसका समर्थन किया है. पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमत लगातार बढ़ रही है. जब इनकी क़ीमत बढ़ती है तो आम आदमी भी परेशान होता है. इसलिए जनता से हमें इस पर भरपूर समर्थन मिलेगा.”
उन्होंने कहा कि ये सही है कि यूपीए की सरकार के मुकाबले वर्तमान में कच्चे तेल के दाम कम हैं, लेकिन सरकार ने इस पर 11 लाख करोड़ रुपये टैक्स लगा दिया है. ये दोगुने से भी ज़्यादा टैक्स है.
बंद से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान को लेकर शकील अहमद ने कहा, ”अर्थव्यवस्था को मोदी जी ने बहुत नुकसान पहुंचाया है. विपक्षी दल का काम है लोगों और मीडिया को साथ लेकर सरकार पर दबाव बनाना ताकि वो अपने ग़लत कदमों को वापस ले.”
उन्होंने कहा कि इस बंद में दंगा फ़साद और किसी तरह की हिंसा नहीं होगी. बस बंद का समर्थन करने और उसमें शामिल होने के लिए लोगों अपील की जाएगी.
‘राजनीतिक दबाव में नहीं होंगे फ़ैसले’
बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ इस बंद को लेकर बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल का कहना है कि ‘डीज़ल और पेट्रोल के दाम वैश्विक कारणों ये बढ़ रहे हैं. सरकार जनता की परेशानी देख रही है और इसके लिए उपाय भी करेगी. लेकिन, सरकार में आर्थिक फ़ैसले ज़रूरत के हिसाब से लिए जाते हैं न किसी राजनीतिक दबाव में.’
उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि उन्होंने साल 2013 में पेट्रोलियम की क़ीमतों पर सब्सिडी दी तो उसके लिए बजट में प्रावधान क्यों नहीं किया. उन्होंने 1 लाख 40 हजार करोड़ के ऑयल बॉण्ड जारी कर दिए. अब 2024 तक आठ प्रतिशत ब्याज की दर से सरकार को उसे वापस करना है.
यूपीए सरकार के दौरान पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें बढ़ने पर बीजेपी ने भी इसे बड़ा मुद्दा बनाया था. इस पर गोपाल अग्रवाल का कहना है कि उस वक्त और आज में काफ़ी अंतर है. तब महंगाई दर नौ प्रतिशत से ज़्यादा थी और अब पांच फ़ीसदी से नीचे है. तब जीडीपी और विदेशी मुद्रा भंडार गिर रहा था जो अब बढ़ रहा है. अर्थव्यवस्था के मामले में सिर्फ़ एक ही फ़ैक्टर नहीं देखना चाहिए.
वहीं, भारत बंद को समर्थन देने से शिवसेना ने इंकार कर दिया है, लेकिन राज ठाकरे की नवनिर्माण सेना इसमें हिस्सा ले रही है.
मोदी सरकार पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों और रुपये की घटती कीमतों के कारण विपक्ष के निशाने पर बनी हुई है. विपक्ष इसके लिए सरकार की आर्थिक नीतियों को ज़िम्मेदार ठहरा रहा है. भारत बंद से पहले रविवार की शाम को मशाल जुलूस भी निकाला गया.
-BBC

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