जामिया में पुलिस की कार्यवाही को बीजेपी ने सही ठहराया

नई दिल्‍ली। जामिया मिल्‍लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी का वीडियो सामने आने के बाद राजनीति शुरू हो चुकी है। बीजेपी ने पुलिस की कार्यवाही को सही ठहराया है।
सोमवार को बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा ने कहा, ‘जामिया यूनिवर्सिटी के कुछ वीडियो मीडिया में चल रहे हैं, उस पर हम कहते हैं कि दिल्ली पुलिस के पास वह वीडियो हैं। छात्रों के हाथ में पत्थर दिखाई दे रहे हैं, क्या ये छात्र हैं या बाहर के लोग अराजकता फैलाने आए हैं। अगर ये छात्र हैं तो फिर चेहरा क्यों छिपाए हुए हैं।’
यहां आपको बता दें कि कांग्रेस महासचि प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी इस वीडियो को ट्वीट कर दिल्ली पुलिस पर कार्यवाही की मांग की थी। इस पर बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल ने कहा कि कांग्रेस द्वारा लगातार अराजक तत्वों का समर्थन किया जा रहा है। उनके साथ कांग्रेस अपनी संवेदना जताती है लेकिन पुलिस बल के जवान जो देश को सुरक्षित रखने के लिए अपनी कुर्बानी देते हैं, कांग्रेस उनके खिलाफ सवाल उठाती है।
उन्होंने आगे कहा कि देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वालों के पक्ष में लगातार बोलना आज कांग्रेस की नीति बन गई है। राहुल गांधी ने दो दिन पहले पुलवामा में शहीद हुए जवानों के प्रति कोई संवेदना नहीं व्यक्त की, लेकिन सैनिक बलों के खिलाफ सवाल उठाए। प्रियंका वाड्रा ने भी बिना विषय को समझे पुलिस को दोषी ठहराया है।
बीजेपी प्रवक्ता ने साफ तौर से कहा कि हिंसा करने वालों का वह कभी भी साथ नहीं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस हिंसा को राजनीतिक रंग दे रही है, उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
कथित वीडियो पर कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पुलिस की कथित बर्बरता के दो महीने बाद एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर अर्द्धसैनिक बल और पुलिसकर्मी पिछले साल 15 दिसंबर को यूनिवर्सिटी के लाइब्रेरी में छात्रों पर लाठीचार्ज करते दिख रहे हैं।
इस पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पुलिस ने बताया कि वह 15 दिसंबर की इस घटना की अपनी जांच के तहत इस वीडियो को और कुछ घंटे बाद सामने आये अन्य दो वीडियो की जांच करेगी।
जामिया समन्वय समिति ने सीसीटीवी फुटेज प्रतीत हो रहे 48 सेकेंड का यह वीडियो जारी किया है, जिसमें कथित तौर पर अर्द्धसैनिक बल और पुलिस के करीब सात-आठ कर्मी ओल्ड रीडिंग हॉल में प्रवेश करते और छात्रों को लाठियों से पीटते दिख रहे हैं।
ये कर्मी रूमाल से अपने चेहरे ढंके हुए भी नजर आ रहे हैं। विशेष पुलिस आयुक्त (खुफिया विभाग) प्रवीर रंजन ने कहा कि यह वीडियो पुलिस के संज्ञान में आया है और वह वर्तमान जांच प्रक्रिया के तहत उसकी भी जांच करेगी।
सूत्रों ने बताया कि जेसीसी ने बस 48 सेंकेंड का वीडियो जारी किया किया है जिसमें इस प्रकरण का बस एक ही पक्ष दिखाया गया था। उसने (जेसीसी) दूसरे वीडियो नहीं दिखाये जिनमें दंगाई परिसर में दाखिल होते हुए नजर आ रहे हैं और कुछ अन्य उन्हें पुलिस से बचा रहे हैं।
पांच मिनट 25 सेंकेंड के दूसरे क्लिप में लोग हड़बड़ी में यूनिवर्सिटी के पुस्तकाल में प्रवेश करते हुए कथित रूप से नजर आ रहे हैं। कुछ ने अपने चेहरे ढंके हुए हैं। जब ये सभी लाइब्रेरी में दाखिल हो जाते हैं तो तब वहां मौजूद लोग मेजों और कुर्सियों से मुख्य द्वार जाम करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें इस घटना के समय और तारीख का ब्योरा नहीं है। दो मिनट 13 सेकेंडे के तीसरे वीडियो में चेहरे ढंके हुए कुछ लोग बीच सड़क पर नजर आते हैं । कम से कम दो के हाथों में पत्थर हैं।
यह फुटेज 15 दिसंबर के छह बजकर चार मिनट का है। पहला वीडियो जामिया समन्वय समिति (जेएमसी) ने जारी किया है। यह जामिया मिल्लिया इस्लामिया के वर्तमान और पूर्व छात्रों का संगठन है जिसे 15 दिसंबर को कथित पुलिस बर्बरता के बाद गठित किया गया था। हालांकि यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया है कि पहला वीडियो उसने जारी नहीं किया है।
यूनिवर्सिटी 15 जनवरी को उस वक्त युद्ध क्षेत्र में तब्दील हो गया था, जब पुलिस उन बाहरी लोगों की तलाश में यूनिवर्सिटी परिसर में घुस गयी थी, जिन्होंने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इस शैक्षणिक संस्थान से कुछ ही दूरी पर हिंसा और आगजनी की थी।
यूनिवर्सिटी के विधि के एक छात्र ने आरोप लगाया था कि पुलिस कार्यवाही में उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। जामिया समन्वय समिति ने कहा कि उसे यह वीडियो गुमनाम स्रोत से प्राप्त हुआ है।
उसने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी ने लाइब्रेरी में पुलिस की कार्यवाही का वीडियो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के साथ साझा किया है, जो इस प्रकरण की जांच कर रहा है।
ट्विटर पर वीडियो साझा करते हुए कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा,‘इस वीडियो को देखने के बाद जामिया में हुई हिंसा को लेकर अगर किसी पर एक्शन नहीं लिया जाता है तो सरकार की नीयत पूरी तरह से देश के सामने आ जाएगी।’
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली पुलिस पर यह झूठ बोलने का भी आरोप लगाया कि लाइब्रेरी के भीतर जामिया के छात्रों की पिटाई नहीं की गई थी। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, ‘देखिए कैसे दिल्ली पुलिस लाइब्रेरी में छात्रों को अंधाधुंध पीट रही है। एक लड़का किताब दिखा रहा है लेकिन पुलिसकर्मी लाठियां चलाए जा रहे हैं।’ उन्होंने लिखा, ‘गृह मंत्री और दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने झूठ बोला कि लाइब्रेरी में किसी को नहीं पीटा गया।’
माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि पुलिस की कार्यवाही, अत्यधिक अविवेकपूर्ण और अस्वीकार्य है। येचुरी ने ट्वीट किया, ‘यूनिवर्सिटीों में छात्रों पर पुलिस कार्यवाही का अमित शाह द्वारा किया गया हर बचाव गलत, भ्रामक और राजनीति से प्रेरित है। दिल्ली पुलिस मोदी-शाह के अधीन है और वे लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों से इस तरह से पेश आते हैं। शर्मनाक है।’
-एजेंसियां

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