आज 54 साल के हो गए बीजेपी चीफ अमित शाह

नई दिल्‍ली। बीजेपी चीफ अमित शाह सोमवार को 54 साल के हो गए। भारतीय राजनीति के ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले शाह ने बीजेपी को कार्यकर्ताओं के मामले में न केवल दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाया बल्कि भगवा पार्टी को देश के कई अहम राज्यों में सत्ता दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई। 2014 में बीजेपी की कमान थामने वाले शाह ने त्रिपुरा में लेफ्ट का किला ढहाते हुए वहां कमल खिलाया था। शाह ने उत्तर प्रदेश में बीजेपी के 14 साल के वनवास को खत्म किया था। अपने चार साल के कार्यकाल में शाह ने पार्टी को 14 राज्यों में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। हर चुनाव को ‘युद्ध’ की तरह लेने वाले शाह की नजर अब 2019 के लोकसभा चुनाव पर लगी हुई है।
नरेंद्र मोदी की अगुआई में बीजेपी 2014 में केंद्र की सत्ता में आई थी। सत्ता में आने के बाद राजनाथ सिंह की जगह अमित शाह ने बीजेपी चीफ की कमान संभाली थी। शाह के अध्यक्ष बनने के कुछ समय बाद ही हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा के चुनाव हुए। इन दोनों राज्यों बीजेपी ने जीत दर्ज की। फिर इसके बाद शाह की अगुआई में बीजपी ने जम्मू-कश्मीर, झारखंड, असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, नगालैंड और मेघालय में जीत दर्ज की। पूर्वोत्तर में सत्ता से अबतक दूर रही बीजेपी ने शाह के करिश्माई नेतृत्व में सियासी जमीन मजबूत की।
यूं तो बीजेपी के कई अध्यक्ष चुने गए लेकिन वह सिर्फ अमित शाह ही हैं जिनकी कुशल रणनीति और सजगता ने उत्तर से लेकर दक्षिण और पश्चिम से लेकर पूर्व तक में बीजेपी का परचम लहराया है। शायद इसीलिए उन्हें बीजेपी का ‘चाणक्य’ कहा जाता है। उनकी अध्यक्षता में बीजेपी फर्श से अर्श तक पहुंची है और देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया है जो कई राज्यों में अस्तित्व की लड़ाई लड़ने पर मजबूर हुई है।
इस समय 20 राज्यों में बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए की सरकार है। यानी देश के कुल 29 राज्यों में सिर्फ 9 राज्य में ही दूसरी सरकारें हैं। इस समय बीजेपी पूरे देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है तो उसका श्रेय पर्दे के पीछे लगातार काम करने वाले इस अविजित योद्धा को जाता है।
बीजेपी के ‘सीईओ’ की तरह हैं अमित शाह
यूं ही नहीं उन्हें बीजेपी का चाणक्य कहा जाता है बल्कि पार्टी को नंबर एक पोजिशन पर बनाए रखने के लिए उनकी निरंतर मेहनत और लगन भी दिखाई देती है। सफलता के लिए उनका मंत्र लगातार यात्रा और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक संपर्क स्थापित करना है। अपने कार्यकाल में अमित शाह लगभग पूरा देश नाप चुके हैं। एक आंकड़े के मुताबिक वह अब तक साढ़े पांच लाख किमी की यात्रा कर चुके हैं। माना जाता है कि अमित शाह बीजेपी के ‘सीईओ’ की तरह हैं जो हर राज्य का फीडबैक लेते हैं, कार्यकर्ताओं से बात करते हैं और रणनीति बनाते हैं।
कार्यकर्ताओं को जमीनी स्तर पर जोड़ने के लिए प्रयास
इस साल हुए कर्नाटक चुनाव के प्रचार के लिए उन्होंने 34 दिन राज्य में गुजारे थे और 30 में से 29 जिलों में 57000 किमी से ज्यादा की यात्रा की थी। भले ही कर्नाटक में नंबर गेम के चलते बीजेपी ऐन मौके पर सरकार बनाने से चूक गई हो लेकिन चुनाव परिणाम में बीजेपी राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।
उनके कार्यकाल में ही बीजेपी में पहली बार कार्यकर्ताओं के लिए राष्ट्रीय, राज्यस्तरीय, जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय ट्रेनिंग कैंप लगाए गए। पहले एक साल में सिर्फ 3500 कार्यकर्ता ही इस तरह के ट्रेनिंग कैंप का हिस्सा हुआ करते थे लेकिन शाह के नेतृत्व में 2015 में 7.25 लाख से ज्यादा कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था।
इस वजह से मिला था अध्यक्ष पद
अपने चार साल के कार्यकाल में अमित शाह ने पार्टी को एक नया मुकाम दिया है। चाहे यूपी विधानसभा चुनाव हो, गोवा विधानसभा चुनाव, या फिर त्रिपुरा चुनाव, सभी राज्यों में सरकार बनाने में अमित शाह की भूमिका खास मानी जाती है। 2014 में अमित शाह को पहली बार बीजेपी के अध्यक्ष पद की गद्दी देने के पीछे लोकसभा चुनाव में उनका प्रदर्शन रहा है। वह उस समय यूपी बीजेपी के इंचार्ज थे और बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए को यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 73 में जीत दिलाई थी।
बताते हैं कि 2014 लोकसभा चुनाव से पहले अमित शाह ने पूरा एक साल राज्य में बिताया। इस दौरान उन्होंने हर दृष्टिकोण से यूपी का मुआयना किया था। यहां उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जमीनी स्तर पर काम किया था। साथ ही बीजेपी के विकास के अजेंडे के साथ तब बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के विजन को भुनाने में खास जोर दिया था।
दूसरी बार चुने गए बीजेपी अध्यक्ष
2016 में वह दूसरी बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने गए। अमित शाह के नेतृत्व की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 2014 से अब तक बीजेपी ने 22 राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ा है जिसमें 14 राज्यों में एनडीए की सरकार बनी। इनमें यूपी, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर, असम, त्रिपुरा, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, मेघालय और नगालैंड शामिल हैं जबकि केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी और कर्नाटक चुनाव में बीजेपी ने अपने प्रदर्शन में सुधार किया था।
त्रिपुरा में ढहाया था लेफ्ट का 25 साल पुराना ‘किला’
पिछले साल यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 41 फीसदी वोट मिले थे और पार्टी ने 403 में से 325 सीटें जीती थीं जो पिछले 40 साल में यूपी में किसी भी राजनैतिक पार्टी की सबसे बड़ी जीत थी। इसके बाद इस साल बीजेपी को सबसे बड़ी जीत इस साल पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में हासिल हुई थी जहां बीजेपी लेफ्ट का 25 साल पुराना ‘लाल किला’ ढहाने में कामयाब रही थी।
दूसरों के किले फतह करने के साथ-साथ उन्होंने अपना गढ़ भी बचाए रखा। गुजरात में पाटीदार नेता हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी की तिकड़ी बीजेपी के लिए कड़ी चुनौती बनकर उभरी थी। बावजूद इसके यहां पिछले साल दिसंबर में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सरकार बनाई।
पीएम नरेंद्र मोदी के विजयी रथ के ‘सारथी’ अमित शाह
इस जीत के असली किरदार भले ही सीएम बिप्लब कुमार देब और बीजेपी इनचार्ज सुनील देवधर थे लेकिन इस जीत के सूत्रधार अमित शाह ही थे जिन्होंने राज्य में लेफ्ट के लाल झंडे को उतार फेंक भगवा ध्वज फहराया था। ट्राइबल सीटों पर पकड़ और ट्राइबल पार्टी आईपीएफटी से गठबंधन करने की रणनीति के बल पर बीजेपी ने जीत हासिल की थी।
यह शाह के नेतृत्व का ही कमाल है कि बीजेपी देश की ही नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है जिसमें 10 करोड़ से भी ज्यादा कार्यकर्ता शामिल हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के विजयी रथ के सारथी भी अमित शाह ही हैं जिनके नेतृत्व में बीजेपी 2019 का चुनाव भी लड़ेगी। हाल ही अमित शाह का कार्यकाल बढ़ाया गया है। वह जनवरी 2019 तक बीजेपी के अध्यक्ष रहेंगे।
-एजेंसियां

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