झारखंड के मुख्यमंत्री ने Swami Agnivesh से मारपीट मामले में जांच के आदेश दिए

पाकुड़। झारखंड के मुख्यमंत्री ने Swami Agnivesh से मारपीट मामले में जांच के आदेश दिए हैं, आज सुबह ही झारखंड के पाकुड़ जिले में Swami Agnivesh की भाजपा युवा मोरचा के कार्यकर्ताओं ने पिटाई कर दी। घटना तब हुई जब भाजपा कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के दौरे का विरोध कर रहे थे और ‘अग्निवेश गो बैक’ के नारे लगा रहे थे।
विरोध प्रदर्शन और काला झंड़ा दिखाने से शुरू हुआ मामला साथ सिर्फ धक्का-मुक्की तक ही नहीं बल्कि लात जूतों तक पहुंच गया। स्वामी अग्निवेश को धकेल कर नीचे गिरा दिया। उनका कपड़ा फाड़ दिया गया पगड़ी खोल दी गयी। इस दौरान बीजेपी युवा मोर्चा कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश के खिलाफ नारा लगाया, जय श्री राम, अग्निवेश भारत छोड़ो, अग्निवेश पाकुड़ में नहीं रहना होगा जैसे नारे लगाते रहे।

इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे Swami Agnivesh
स्वामी अग्निवेश लिट्टीपाड़ा में आयोजित पहाड़िया समाज के 195 दामिन दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मेलन में भाग लेने के लिए मंगलवार सुबह पाकुड़ पहुंचे हुए थे। वह सुबह रांची ट्रेन से पाकुड़ पहुंचे मुस्कान पाकुड़ के मुस्कान होटल में ठहरे हुए थे। करीब 10: 30 बजे मीडिया को भी संबोधित किया इस दौरान इस दौरान भी बीजेपी युवा मोर्चा के सदस्यों ने होटल के बाहर नारेबाजी कर रहे थे। बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने सड़क जाम कर नारेबाजी करते रहे थे।

पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची लेकिन 1 घंटे के बाद तक सड़क जाम नहीं हटवाया सकी। पहाड़िया समाज हिल असेम्बली के लोग स्वामी अग्निवेश को ले जाने के लिए मौके पर मौजूद रहे लेकिन इस घटना को रोकने के लिए वह भी कुछ नहीं कर सके। पहाड़िया समाज के लोग बेहद शांतिपूर्ण तरीके से स्वामी अग्निवेश को अपने साथ लिट्टीपाड़ा में आयोजित सम्मेलन में ले जाने के लिए पहुंचे हुए थे।

भाजपा युवा मोरचा के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अग्निवेश यहां आदिवासियों और ईसाई मिशनरियों को भड़काने आये हैं। अग्निवेश पर कार्यकर्ताओं ने ईशाई मिशनरी के इशारे पर काम करने का भी आरोप लगाया है। प्रदर्शन के दौरान ‘स्वामी अग्निवेश होश में आओ’ के नारे लगे। जानकारी के अनुसार स्वामी अग्निवेश के साथ मौजूद लोगों से भी हाथापाई की गयी।

झारखंड की राजनीति पर भी टिप्पणी करते रहे हैं स्वामी अग्निवेश

स्वामी अग्निवेश झारखंड की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते रहे हैं हाल में ही उन्होंने, सरकार की नीतियों को आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश करार दिया था। सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के सदस्य जॉनसन मसीह टूटी व अन्य ने खूंटी डीसी सूरज कुमार को उनके कार्यालय में ‘अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन के संवैधानिक प्रावधान व अन्य कानूनों की जरूरत बनाम शांति व स्वच्छ प्रशासन’ के विषय पर ज्ञापन सौंपा़ था। इसमें कहा गया है कि सरकार आदिवासी हित के कानूनों को बदलने की साजिश कर रही है।

संविधान के भाग 10 के अनुच्छेद 244(1) के तहत पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का अनुपालन किया जाना है़ यह अनुसूची, अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन व नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की अलग अलग भूमिकाओं व जिम्मेदारियों को परिभाषित करती है़।

अनुसूचित क्षेत्रों की सारी समस्याएं राज्य की कार्यपालिका व विधायिका की अनुसूचित क्षेत्रों के विधायिका क्षेत्र में घुसपैठ करने से शुरू होती है़ सामान्य क्षेत्र के नियम व कानूनों को अनुसूचित क्षेत्रों पर थोपने की प्रक्रिया पर इसका अंत होता है़। यह दुखद है कि अनुसूचित क्षेत्र से संबंधित राज्यपाल के विशेष अधिकार क्षेत्र पर राज्य सरकार की कार्यपालिका का हस्तक्षेप स्पष्ट दिखता है़।

पत्थलगड़ी को जनाक्रोश का स्मारक कहा था Swami Agnivesh ने
विगत तीन साल में राज्य सरकार ने सीएनटी व एसपीटी कानून (जो आदिवासियों की आर्थिक रीढ़ के कानून हैं) से छेड़छाड़ शुरू की है। यह राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र से बहर की बात है़ गैर संवैधानिक तरीके से भूमि- बैंक स्थापित किया गया है व लगभग 20.56 लाख एकड़ जमीन चिह्नित की गयी है, जो मोमेंटम झारखंड के तीन लाख, 55 हजार करोड़ रुपये के 210 एमओयू द्वारा विभिन्न कंपनियों को आवंटित किये जायेंगे़ इससे लोगों में तीव्र आक्रोश है और पत्थलगड़ी उनके इस आक्रोश का स्मारक है़।

गौरतलब है कि Swami Agnivesh ने छत्तीसगढ़ के सक्ति में जन्म लिया है।
-एजेंसी

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