सिद्धगंगा मठ के प्रमुख श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु की जयंती आज

नई द‍िल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिद्धगंगा मठ के प्रमुख डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु को उनकी जयंती पर याद करते हुए श्रद्धांजलि दी है। मोदी ने आज ट्वीट कर उन्हें याद करते हुए कहा , परम पूज्य डॉ. श्री श्री श्री शिवकुमार स्वामीगलु को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

समाज के प्रति उनका समृद्ध योगदान प्रेरणादायक है। श्री श्री श्री शिवकुमार का जन्म एक अप्रैल 1907 को और निधन 21 जनवरी 2019 को हुआ था। श्री श्री श्री डॉक्टर शिवकुमारा स्वामीजी, जिन्होंने 111 साल की उम्र में सोमवार को अंतिम सांस ली, उन्हें कर्नाटक में “वॉकिंग गॉड” या “चलता-फिरता भगवान” के नाम से जाने जाते थे।

वे पिछले आठ से भी ज़्यादा दशक से सिद्धगंगा मठ के प्रमुख थे, जो बेंगलुरू से 70 किलोमीटर दूर टुमकूर में लिंगायत समुदाय की सबसे शक्तिशाली धार्मिक संस्थाओं में गिना जाता है।

कर्नाटक के पूर्व अतिरिक्त चीफ़ सेक्रेटरी डॉक्टर एसएम जामदार ने कहा, “लिंगायत स्वामियों में, या कहें कि भारत के आध्यात्मिक गुरूओं में, उनकी शख़्सियत दुर्लभों में भी दुर्लभतम थी, वे कई स्वामियों के आदर्श थे।”

बाक़ी धार्मिक गुरूओं से अलग

धार्मिक विषयों के जानकार, वचन स्टडीज़ के पूर्व निदेशक रमज़ान दर्गा कहते है, “88 सालों से उन्होंने हर जाति और हर समुदाय के अनाथों और बच्चों की सेवा की। कोई भी उनके आवासीय स्कूलों में जा सकता था, पढ़ सकता था. वो जो करते थे, वो बड़ा सीधा था – कि लोगों की सेवा करना भगवान की सेवा करने जैसा है। ”

चित्रदुर्गा स्थित मुर्गाराजेंद्र मठ के डॉक्टर शिवमूर्ति मुरूगा शरनु स्वामीजी ने कहा, “उनके मन में कभी भी जाति को लेकर कोई दुर्भावना नहीं रही। उन्होंने सबके लिए खाने का इंतज़ाम किया, ख़ास तौर से बच्चों के लिए, और उन्हें ज्ञान अर्जित करने और समाज को लेकर जागरुक होने के लिए प्रोत्साहित किया।”

दर्गा कहते हैं, “केवल अलग जातियों से ही नहीं, अलग धर्मों से भी, जैसे मुसलमानों के बच्चों ने भी उनके आवासीय स्कूलों में पढ़ाई की।” डॉक्टर जामदार और दर्गा ने कहा कि स्वामीजी ने “केवल बासव की विचारधारा के अनुरूप जीवन जिया.”

रमज़ान दर्गा ने कहा, “बासव विचारधारा ने सभी जाति और नस्ल की व्यवस्था को नकार दिया. वो वैदिक व्यवस्था के ठीक उलट है जो जाति व्यवस्था को मानती है, बासव समानतावादी थे और स्वामीजी ने बासव की सोच वाले समाज को बनाने के लिए काम किया।” डॉक्टर जामदार कहते हैं, “आठ दशकों तक उन्होंने बच्चों को मुफ़्त भोजन और मुफ़्त शिक्षा दी। उनके संस्थानों में तीन हज़ार छात्र पढ़ा करते थेआज वहाँ आठ से नौ हज़ार छात्र पढ़ते हैं। उनके छात्र पूरी दुनिया में फैले हैं। एक अनुमान है कि उनके संस्थान से लगभग 10 लाख छात्रों ने पढ़ाई की है। ” डॉक्टर शिवमूर्ति ने बताया, “उन्होंने सैकड़ों शिक्षण संस्थान बनवाए। उन्होंने इतनी लंबी उम्र अपने खान-पान और जीवन शैली में अनुशासन की वजह से पाई। ”

– एजेंसी

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