श्रीकृष्‍ण जन्मस्थान पर मनाई गई जगद्गुरू शंकराचार्य जयंती

मथुरा। श्रीकृष्‍ण जन्मस्थान प्रांगण में स्थित भागवत-भवन में वैशाख शुक्ल पंचमी पर आज 17 मई सोमवार को प्रातः आद‍ि जगद्गुरू शंकराचार्य जी की 2528वीं जयन्ती परंपरागत रूप से मनायी गयी।

इस अवसर पर श्रीकृष्‍ण-जन्मस्थान स्थित भागवत भवन में विराजमान आद‍ि जगद्गुरू शंकराचार्य जी की प्रतिमा पर भव्य पुष्‍प सज्जा कर सजाया गया। पूज्य आद‍ि जगद्गुरू शंकराचार्य जी की प्रतिमा का पंचोपचार पूजन एवं पंचामृत अभिषेक व आरती कर विधिविधान पूर्वक पूजन किया गया। तदोपरान्त प्रसाद का वितरण किया गया।
उल्लेखनीय है कि वैदिक सनातन धर्म भारत में पुष्‍प‍ित एवं पल्लवित हुआ है, इसका बहुत बड़ा श्रेय आद‍ि जगद्गुरू शंकराचार्य जी को जाता है। पूज्य आद‍ि जगद्गुरू शंकराचार्य जी द्वारा सनातन धर्म की रक्षा एवं उसके संरक्षण हेतु भारतवर्ष में चारों दिशाओं में चार पीठ स्थापित किये गये।

आद‍ि जगद्गुरू शंकराचार्य जी ने वैदिक सनातन धर्म की लुप्त प्रायः परंपराओं को पुनर्जीवित किया तथा तीर्थों को प्रतिष्‍ठ‍ित किया और जो लोग सनातन धर्म का विरोध करके अन्यान्य अवैदिक धर्मों को चला रहे थे, उन सभी को पूर्णतः शास्त्रार्थ द्वारा पराभव कर संपूर्ण भारतवर्ष में वैदिक सनातन धर्म का विस्तार किया। पूज्य शंकराचार्य जी मथुरा भी पधारे थे, यहां भी वैदिक सनातन धर्म की विजय-पताका फहरा कर, उन्होंने सनातन धर्म की व्यवस्थाओं की पुनर्स्‍थापना की थी।

इस अवसर पर सं. मुख्य अधिशाषी अधिकारी राजीव श्रीवास्तव, विजयबहादुर सिंह, अनुराग पाठक, रामअवतार अवस्थी, महेष चंद शर्मा, कृश्णबिहारी पाठक, श्रीकृश्ण झा, ब्रह्मानन्द मिश्रा आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

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