बिहार: सेनारी नरसंहार पर हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की सिफारिश

पटना। सेनारी नरसंहारी के दोषियों को पटना हाईकोर्ट से बरी किए जाने के बाद बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल ने बड़ी सिफारिश की है। उन्होंने सरकार से इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की राय दी है।
एडवोकेट जनरल ने की पुष्टि
बिहार के एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि सेनारी नरसंहार पर पटना हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। ललित किशोर ने कहा कि इस बाबत उन्होंने बिहार सरकार को अपनी राय दे दी है। उन्होंने कहा कि शनिवार और रविवार के चलते सोमवार से इसकी प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।
हाईकोर्ट के फैसले पर एडवोकेट जनरल की राय
बिहार के एडवोकेट जनरल ललित किशोर ने कहा कि ‘मेरी धारणा है कि सेनारी नरसंहार के केस में जो साक्ष्य थे, उसके आधार पर निचली अदालत के फैसले को पटना हाईकोर्ट को बरकरार रखना चाहिए था। इन्वेस्टिगेशन में कुछ खामियां जरूर थीं लेकिन जो साक्ष्य जांच के दौरान सामने आए थे, उनमें पटना हाईकोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।’
सेनारी नरसंहार के सभी आरोपी बरी
पटना हाइकोर्ट ने सेनारी नरसंहार पर शुक्रवार को बड़ा फैसला दिया था। कोर्ट ने इस नरसंहार के 13 दोषियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया। हाइकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को रद्द कर दिया था और सभी दोषियों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।
सेनारी नरसंहार की बर्बर कहानी
18 मार्च 1999 को अरवल जिले के सेनारी गांव में यह नरसंहार हुआ था, जिसमें 34 लोगों की हत्या हुई थी। घटना में 10 को फांसी और तीन लोगों को उम्रकैद की सजा निचली अदालत ने सुनायी थी। 15 नवंबर 2016 को जहानाबाद जिला अदालत ने अपना फैसला सुनाया था लेकिन पटना हाइकोर्ट के जज अश्विनी कुमार सिंह और अरविंद श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निचली अदालत के फैसले को पलट दिया।
क्या था निचली अदालत का फैसला
2016 में बिहार में जहानाबाद के सेनारी नरसंहार कांड की सुनवाई करते हुए जिला अदालत ने 17 साल बाद फैसला सुनाते हुए 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई थी। 34 लोगों के इस बहुचर्चित नरसंहार कांड के तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी और उन पर एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया गया था।
उस फैसले के वक्त इस केस में दो दोषी फरार भी थे। तब निचली अदाल ने फैसले में इस नरसंहार में मारे गए लोगों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस केस के कुल 70 आरोपियों में से 4 की मौत हो चुकी है। 2016 में निचली अदालत पहले ही 20 आरोपियों को बरी कर चुकी थी।
-एजेंसियां

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