बड़ी खबर: गूगल को चुनौती देकर पेटीएम ने लांच क‍िया अपना मिनी ऐप स्टोर

नई द‍िल्ली। पेटीएम ने गूगल को चुनौती देते हुए अपना मिनी ऐप स्टोर लांच क‍र द‍िया। गूगल के 30% टैक्स के कारण एकजुट हुए स्टार्टअप फाउंडर के म‍िनी ऐपस्टोर लांच करते हुए 300 से ज्यादा कंपनियों ने हाथोंहाथ ल‍िया है और ओला, नेटमेड्स और डोमिनोज पिज्जा जैसी कंपनियां लिस्ट हो गईं।

डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम ने भारतीय डेवलपर्स की मदद के लिए अपना एंड्रॉयड मिनी ऐप स्टोर लॉन्च कर दिया है। पेटीएम का यह कदम ऐप स्टोर सेक्टर में अमेरिकी कंपनियों गूगल, एपल और माइक्रोसॉफ्ट की बादशाहत को सीधी चुनौती है। माना जा रहा है कि स्पोर्ट्स बेटिंग के आरोप में 18 सितंबर को गूगल की ओर से ऐप स्टोर से हटाए जाने के बाद पेटीएम ने यह कदम उठाया है।

300 से ज्यादा ऐप ने पेटीएम का ऐप स्टोर जॉइन किया

पेटीएम ने एक बयान जारी कर कहा है कि यह मिनी ऐप स्टोर डेवलपर्स को अपने उत्पादों को बड़ी संख्या में यूजर्स तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। पेटीएम के मुताबिक, अब तक 300 से ज्यादा कंपनियों ने इस मिनी ऐप स्टोर को जॉइन कर लिया है। इसमें डेकाथलन, ओला, रैपिडो, नेटमेड्स, 1एमजी, डोमिनोज पिज्जा, फ्रेश मेन्यू, नोब्रोकर जैसी नामी कंपनियों शामिल हैं। अभी पेटीएम के मिनी ऐप स्टोर पर ऐप को लिस्ट कराने और डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए कोई फीस नहीं ली जा रही है। यह मिनी ऐप स्टोर पेटीएम ऐप पर उपलब्ध है।
गूगल को चुनौती देने के लिए स्टार्टअप फाउंडर एकजुट हुए

ऐप स्टोर सेक्टर में गूगल को चुनौती देने के लिए भारतीय स्टार्टअप्स के फाउंडर एकजुट हो गए हैं। बीते सप्ताह 50 से ज्यादा स्टार्टअप फाउंडर्स ने भारतीय ऐप स्टोर की संभावनाओं पर चर्चा की थी। इसमें पेटीएम के विजय शेखर शर्मा और रोजर-पे के हर्षिल माथुर प्रमुख थे। इसके अलावा इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमआईए) इस मुद्दे पर अलग रणनीति बना रहा है। कई स्टार्टअप आईएएमआईए के सदस्य हैं। 29 सितंबर को आईएएमआईए ने एक नोट जारी कर कहा था कि वह अपने फाउंडर मेंबर्स के साथ बैठक कर इस मुद्दे को समझना चाहता है। इसके बाद इसका समाधान किया जाएगा।

अपने नियमों को थोप नहीं सकता गूगल: पटेल

पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (Payment Council of India) के चेयरमैन और आईएएमआईए के सदस्य विश्वास पटेल का कहना है कि गूगल देश के डिजिटल इकोसिस्टम का गेट-वे है। इस कारण वह मनमाने ढंग से कार्य नहीं कर सकता है। साथ ही वह हमारे देश के कानूनों पर अपने नियमों को थोप नहीं सकता है। पटेल के मुताबिक, गूगल ने कोर्ट में कहा है कि उसे आरबीआई से मंजूरी की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि वह एक पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर नहीं है। इस कारण भारतीय ऐप के लिए यह जरूरी है कि वे गूगल के प्रॉपराइटरी बिलिंग और पेमेंट सिस्टम को अपनाएं। पटेल का कहना है कि गूगल को अपनी स्थिति का गलत फायदा नहीं लेना चाहिए और सभी को समान अवसर देने चाहिए।

भारत के अधिकांश कारोबारों को समाप्त कर देगा गूगल टैक्स

बीते सप्ताह रोजर-पे के हर्षिल माथुर ने एक ट्वीट कर कहा था कि भारत को लंबी अवधि के लिए अपने ऐप स्टोर की आवश्यकता है। उनका कहना था कि गूगल का 30 फीसदी टैक्स भारत के अधिकांश कारोबारों को समाप्त कर देगा। पटेल ने 29 सितंबर के नोट में कहा था कि गूगल अपने बिलिंग सिस्टम को अपनाने के लिए भारतीय डेवलपर्स पर दबाव नहीं दे सकता है। भारतीय डेवलपर्स की लॉबी गूगल का विकल्प लाने के लिए सरकार पर दबाव डालने की योजना बना रही है।

सरकार ला रही मोबाइल सेवा ऐप स्टोर

जानकारी के मुताबिक, गूगल-एपल की मोनोपॉली खत्म करने के लिए सरकार मोबाइल सेवा स्टोर लॉन्च करने की योजना बना रही है। यह एक एंड्रॉयड ऐप स्टोर होगा। सूत्रों के मुताबिक, सरकार इस पर भी विचार कर रही है कि एंड्राइड फोन के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि उसमें पहले से ही ऐप इंस्टॉल रहे। देश में एंड्रॉयड के पास 97 फीसदी बाजार है। इसलिए सरकार चाहती है कि भारतीय स्टार्टअप को एक हैंड होल्डिंग दी जाए, जिससे वे इसमें काम कर सकें।

गूगल ने नई बिलिंग प्रणाली को टाला

गूगल ने ऐप के लिए पेश की अपनी नई बिलिंग प्रणाली को 31 मार्च 2020 तक के लिए टाल दिया है। गूगल ने सोमवार को एक ब्लॉग पोस्ट के जरिए यह जानकारी दी है। नई बिलिंग प्रणाली के तहत गूगल प्रत्येक पेमेंट पर 30 फीसदी कमीशन लेगा। माना जा रहा है कि भारतीय स्टार्टअप फाउंडर्स के एकजुट होने के बाद गूगल को यह कदम उठाना पड़ा है। गूगल की नई बिलिंग प्रणाली 20 जनवरी 2021 से लागू होनी थी।

फोन-पे ने 2018 में लॉन्च किया था इन-ऐप प्लेटफॉर्म

पेटीएम की प्रतियोगी कंपनी फोन-पे ने जून 2018 में अपना इन-ऐप प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था। अक्टूबर 2019 में इसको री-ब्रान्ड किया गया था। अब यह फोन-पे स्विच के नाम से उपलब्ध है।
– एजेंसी

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