डॉ. निर्विकल्‍प अपहरण कांड में गिरफ्तार आरोपी का बड़ा खुलासा

मथुरा। डॉ. निर्विकल्‍प अपहरण कांड में गिरफ्तार आरोपी नितेश उर्फ रीगल ने पेशी के दौरान बड़ा खुलासा किया है। नीतेश के खुलासे पर गौर करें तो पूरी तरह स्‍पष्‍ट होता है कि ये अपहरण कांड न सिर्फ पूर्व नियोजित था बल्‍कि एक ‘सेटिंग’ के तहत किया गया था इसलिए चारों नामजद इस बात से आश्‍वस्‍त थे कि बिना समय गंवाए डॉ. के यहां से रुपए दे दिए जाएंगे।
नितेश के मुताबिक इस कांड की ‘सेटिंग’ किसने और कैसे की, इसकी जानकारी तो उसे नहीं हैं किंतु उसे इतना पता है कि सनी तथा मथुरा के नौहझील क्षेत्र निवासी अनूप एक-दूसरे को पहले से जानते हैं।
सनी और अनूप ने किसकी सेटिंग से यह सारा खेल खेला, इसकी जानकारी तभी संभव है जब सनी और अनूप को गिरफ्त में लेकर पुलिस इस राज से पर्दा उठाने में रुचि ले।
नितेश ने बताया कि डॉ. निर्विकल्‍प की गाड़ी में टक्‍कर मारने के बाद वह खुद भी तब आश्‍चर्यचकित रह गया था जब डॉ. की पत्‍नी मात्र 15 से 20 मिनट के अंदर पूरे 52 लाख रुपए लेकर आ गईं।
नितेश ने बताया कि यह कहना गलत है कि हम डॉ. को लेकर हाईवे पर घूमते रहे। उसने बताया कि सारा पैसा इतने कम समय में मिल गया कि हमें डॉ. को कहीं घुमाने या ले जाने की जरूरत ही नहीं पड़ी। उसने साफ कहा कि नेशनल हाईवे पर डॉक्‍टर को लेकर घंटे-दो घंटे घुमाने की बात बेकार है। डॉक्‍टर को रोकने के बाद हमें पैसा मिलने में मुश्‍किल से अधिकतम 20 मिनट का समय लगा और उसके बाद हम निकल गए।
मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल का मूल निवासी नितेश उर्फ रीगल एनीमेशन में ग्रेजुएट है और नोएडा में रहकर फ्रीलांसिंग कर रहा था।
यहीं उसकी मुलाकात मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत सैनिक विहार कॉलोनी निवासी सनी मलिक पुत्र देवेन्‍द्र मलिक से हुई।
पढ़ाई के बाद नौकरी न लगने और फ्रीलांसिंग से गुजारा न होने के कारण नितेश पर कुछ कर्जा हो गया था जिसे उतारने के लिए वह परेशान था।
इसी दौरान सनी ने उसे बताया कि मथुरा के एक डॉक्‍टर से रुपए लेने हैं और उसकी वसूली में तुझे बस साथ रहना है। पैसा मिलने में देर नहीं होगी इसलिए पैसा मिलते ही तेरा कर्जा भी उतर जाएगा। नितेश ने बताया कि मैं सनी के कहने पर उसके साथ आ गया और जैसा सनी ने कहा वो किया।
मध्‍यप्रदेश पुलिसकर्मी के पुत्र नितेश ने एक खुलासा यह और किया कि उसने अपने पिता के कहने पर मध्‍यप्रदेश पुलिस के सामने ही सरेंडर किया था न कि मथुरा पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया, जैसा कि पुलिस दावा कर रही है।
उसने बताया कि मध्‍यप्रदेश से ही उसे यहां लाया गया है और इसलिए यहां की पुलिस ने उसके साथ कोई अभद्र व्‍यवहार करना तो दूर, हाथ तक नहीं लगाया।
गौरतलब है कि डॉ. निर्विकल्‍प का अपहरण कर 52 लाख रुपए की फिरौती वसूलने वाले चारों नामजद आरोपियों पर पहले आईजी जोन ने 50-50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था और फिर इसे एडीजी जोन ने इस इनाम को बढ़ाकर एक-एक लाख रुपए कर दिया था।
एक लाख रुपए के नामजद आरोपी की गिरफ्तारी मथुरा पुलिस ने इतने सहज भाव से क्‍यों दिखा दी, यह बात अब नितेश के खुलासे से स्‍पष्‍ट हो जाती है। पुलिस के दबाव से मुक्‍त होने के बाद नितेश द्वारा किया गया खुलासा कई चौंकाने वाली बातें और सामने लाता है।
जैसे डॉ. निर्विकल्‍प को जिस स्‍थान पर चारों बदमाशों ने अपने कब्‍जे में लिया और जहां ‘सिटी हॉस्‍पीटल’ के पास उनकी पत्‍नी फिरौती लेकर पहुंची, वहां से डॉ. के घर की दूरी बमुश्‍किल आधा किलोमीटर बैठेगी।
इस दूरी को पूरी करते हुए 52 लाख रुपए मात्र पन्‍द्रह से बीस मिनट के अंदर लेकर पहुंच जाना यह समझने के लिए काफी है कि सारा खेल प्रीप्‍लांड था। अन्‍यथा इससे अधिक समय तो नोटों की गड्डियां संभालने में ही लग जाता है। यदि सारी रकम दो हजार के नोटों की शक्‍ल में भी दी गई होंगी तो भी 26 गड्डी नोट हो जाते हैं।
इतने कम समय में नोट लेकर पहुंच जाने का मतलब यह है कि नोटों से भरा बैग पहले से तैयार था, बस इंतजार था तो एक फोन का।
इसके अलावा यह बात भी चौंकाती है कि डॉ. निर्विकल्‍प की पत्‍नी ने क्‍यों न तो किसी को अपने साथ ले जाना जरूरी समझा और क्‍यों किसी अपने पड़ोसी, यहां तक कि नजदीक ही रहने वाले परिजनों को भी इसकी जानकारी नहीं दी।
भले ही डॉ. निर्विकल्‍प अब भी अपनी ओर से कोई कानूनी कार्यवाही करने को तैयार नहीं हैं किंतु इस पूरे घटनाक्रम का सच सामने आना इसलिए जरूरी है क्‍योंकि एक ओर इसमें जहां पुलिस पर 40 लाख रुपए से अधिक की फिरौती हड़प जाने का आरोप लगा है वहीं दूसरी ओर शहर के अन्‍य डॉक्‍टर्स भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
-सुरेन्‍द्र चतुर्वेदी

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