भीमा कोरेगांव हिंसा केस: फेरेरा और गॉनजैल्विस को पुलिस कस्‍टडी में भेजा, सुधा भारद्वाज भी गिरफ्तार

मुंबई। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी वामपंथी ऐक्टिविस्टअरुण फेरेरा और वर्नोन गॉनजैल्विस को पुणे सेशन कोर्ट ने 6 नवंबर तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। शनिवार को इसी मामले में आरोपी प्रोफेसर सुधा भारद्वाज को भी गिरफ्तार किया गया है।
बता दें कि तीनों पहले ही नजरबंद थे लेकिन पुणे पुलिस उनको हिरासत में नहीं ले पा रही थी क्योंकि विभिन्न अदालतों ने उन पर (उनको हिरासत में लेने पर) रोक लगा रखी थी। जमानत याचिका के खारिज होने पर पुणे पुलिस ने फेरेरा और गॉनजैल्विस को हिरासत में ले लिया। इसके बाद इन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
बता दें कि पुणे पुलिस ने एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा में कथित संलिप्तता के चलते अगस्त में इन तीनों ऐक्टिविस्टों को कवि पी वरवरा राव और गौतम नवलखा के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया है कि उसने इनके और शीर्ष माओवादी नेताओं के बीच ई-मेल पर हुई बातचीत को भी जब्त किया है।
केस वापस लेने पर निर्णय के लिए समिति गठित
उधर, भीमा कोरेगांव हिंसा और मराठा आरक्षण आंदोलन से जुड़े मामले वापस लेने पर निर्णय के लिए महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति तय करेगी किसी मामले को वापस लिया जा सकता है या नहीं। हालांकि समिति को अपनी रिपोर्ट दायर करने के लिए कोई समय सीमा नहीं दी गई है।
हिंसक प्रदर्शन हुए थे
बता दें कि पुणे जिले में भीमा कोरेगांव स्थित एक युद्ध स्मारक पर दलितों के जाने और वहां उन पर हमले के बाद इस साल जनवरी में महाराष्ट्र के कई स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इसी तरह, नौकरी और शिक्षा में आरक्षण की मांग को लेकर मराठा समुदाय का आंदोलन इस साल जुलाई और अगस्त में हिंसक हो गया था।
इन मामलों पर समिति कर सकती है विचार
जानकारी के मुताबिक तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) करेंगे। दो पुलिस महानिरीक्षक इस समिति में सदस्य होंगे। बताया जा रहा है कि समिति ऐसे मामले वापस लेने पर विचार कर सकती है जिसमें निजी या सरकारी संपत्तियों का नुकसान 10 लाख रुपये से अधिक नहीं है या फिर जहां किसी की जान नहीं गई है। इसके अलावा समिति उन मामले में भी विचार कर सकती है, जहां पुलिस पर सीधा हमला नहीं किया गया हो। ऐसे मामले में भी विचार संभव है जिसमें आरोपी नुकसान की कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं।
-एजेंसियां

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