भीमा कोरेगांव हिंसा मामला: तीखी बहस के बाद गिरफ्तारी पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली। भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कथित मानविधाकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, यानी दोनों पक्षों से सोमवार तक लिखित नोट दाखिल करने को कहा है। आपको बता दें कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तरफ से दाखिल अर्जी में इस मामले को मनगढ़ंत बताते हुए एसआईटी जांच की मांग की गई है।
‘किसी मराठी जानने वाले ने हिंदी नें लिखी चिट्ठी’
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई शुरू हुई तो ऐक्टिविस्टों की तरफ से वरिष्ठ वकील आनंद ग्रोवर पेश हुए। ग्रोवर ने दलील दी कि पुलिस जिस लेटर का जिक्र कर रही है उसका कंटेंट हिंदी में है। ग्रोवर ने बेंच से कहा कि पुलिस कह रही है कि रोना विल्सन और सुधा भारद्वाज ने चिट्ठी लिखी है। उन्होंने आगे कहा कि कंटेंट से साफ जाहिर होता है कि किसी मराठी जानने वाले ने हिंदी में चिट्ठी लिखी है। ग्रोवर ने कहा कि इस आधार पर यह मामला फर्जी लगता है।
किसी भी एफआईआर में चिट्ठी का जिक्र नहीं: अभिषेक मनु सिंघवी
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की तरफ से पेश हुए ऐडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पुलिस के ट्रांजिट रिमांड में भी लेटर का जिक्र नहीं है। जिस माओवादी प्लॉटिंग का जिक्र किया जा रहा है उसका कोई रिकॉर्ड कोर्ट में पेश नहीं किया गया। सिंघवी ने कहा कि पुलिस ने मीडिया के सामने लेटर दिखाया कि पीएम की हत्या की साजिश है पर किसी भी एफआईआर में इसका जिक्र नहीं है।’
एसआईटी की मांग गैरजरूरी: हरीश साल्वे
इस मामले में एफआईआर कराने वाले शख्स की तरफ से वकील हरीश साल्वे पेश हुए। साल्वे ने कहा कि अगर इस तरह से ऐक्टिविस्टों की गुहार को स्वीकार कर लिया जाएगा तो इसका मतलब यह होगा कि हम न तो एनआईए न सीबीआई और न ही पुलिस पर विश्वास रखते हैं। इस मौके पर एसआईटी पर मांग अवांक्षित और गैर जरूरी है।
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से पेश हुए एडिशनल सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि पूरी केस डायरी कोर्ट के सामने पेश करे। तुषार मेहता ने इससे पहले दलील दी थी कि पीआईएल के जरिए क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन में दखल नहीं हो सकता। वहीं तीन सदस्यीय बेंच के जस्टिस चंद्रचूड़ ने तुषार मेहता से सवाल किया कि मीडिया के पास वह लेटर कहां से आया। तुषार मेहता ने कहा कि पुलिस ने सिर्फ लेटर का जिक्र किया था।
बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट कोर्ट इस मामले में वरवरा राव, अरुण फरेरा, वरनान गोन्साल्विज, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। पिछले साल 31 दिसंबर को ऐल्गर परिषद के बाद कोरेगांव-भीमा में हुई हिंसा के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने इन पांच लोगों को नक्सल लिंक के आरोप में 28 अगस्त को गिरफ्तार किया था।
-एजेंसियां

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