ठंड से रक्षा करता है भस्त्रिका प्राणायाम

भस्त्रिका प्राणायाम को विशेषतौर पर ठंड के दिनों में किया जाता है। यह अद्भुत प्राणायाम है, जो ठंड से हमारी रक्षा करता है। शरीर में गर्मी बढ़ाकर कफ दूर करता है और पाचन ठीक रखता है। भूख बढ़ती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे शरीर के सभी सेल्स स्वस्थ होने लगते हैं। पाचन तंत्र, हृदय, फेफड़े, मस्तिष्क व सभी अन्तः स्रावी ग्रंथियां इस प्राणायाम से बलिष्ठ होती हैं। इससे वात, पित्त व कफ तीनों दोष संतुलित रहते हैं और इनसे होने वाले अनेक रोगों से रोकथाम होती है। यह प्राणायाम तनाव, डिप्रेशन व आलस्य को दूर कर मन को स्थिरता और शांति प्रदान करता है।
यह शरीर में ऊर्जा, सकारात्मकता, रचनात्मकता, उत्साह व प्राण तत्त्व बढ़ने में मदद करता है व शरीर को निरोगी बनाए रखता है।
सावधानियां: हाई बीपी, हृदय रोग, माईग्रेन, अस्थमा, असिडिटी तथा शारीरिक कमजोरी आदि रोगों में इस प्राणायाम में सांस भरने व निकालने की गति अति धीमी रखें। गर्मियों के इसका अभ्यास ज्यादा ना करें।
विधि: आराम से सीधे बैठकर और श्वास पर ध्यान केंद्रित करें। अब नाक से पूरी सांस बाहर निकाल दें। फिर नासिका से ही अधिक से अधिक सांस भरें और पूरी सांस बाहर निकाल दें। फिर लंबी-गहरी सांस भरें और बाहर निकाल दें। इस प्रकार बार-बार सांस भरते व निकालते रहें। यहां सांस भरने व निकालने में थोड़ी आवाज़ होगी। फेफड़ों में सांस भर जाने के कारण छाती फैलेगी और जब सांस निकालेंगे तो छाती सामान्य अवस्था में आएगी। आंखें बंद कर ध्यान को सांस पर ही लगाए रखें। जब थकान-सी लगे, तब रुक जाएं और थोड़ा विश्राम करने के बाद फिर इसका अभ्यास कर लें। इस प्रकार तीन राउंड अभ्यास किया जा सकता है। एक राउंड में सांस भरना व निकालना अपनी सामर्थ्य के अनुसार ही करें। खुद पर अधिक देर तक ऐसा करने का दवाब न डालें।
-एजेंसी