भारतीय किसान संघ ने Kisan आंदोलन को बड़ी साजिश बताया

Kisan आंदोलन में शामिल लोग हिंसा करने की योजना बना रहे हैं,
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर भी हैरानी

मोहिनी मोहन ने आरोप लगाया कि इस विरोध प्रदर्शन का लक्ष्य 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करना है

नई दिल्‍ली। आरएसस से ज़ुड़े भारतीय किसान संघ ने आज शुक्रवार से शुरू हुए 8 राज्यों के किसान आंदोलन में भाग नहीं लेने का फैसला किया है। साथ ही भारतीय किसान संघ ने कहा है कि ये हड़ताल राजनीति से प्रेरित है।

भारतीय किसान संघ केे राष्ट्रीय सचिव मोहिनी मोहन ने कहा कि मंदसौर आंदोलन के दौरान कई मुद्दों से ‘समझौता’ किया गया था। उन्होंने कहा “ये एक राजनीतिक आंदोलन है और किसान के मुद्दों के बारे में नहीं है। आखिरी बार, हम मध्य प्रदेश में राज्य सरकार के साथ कुछ सकारात्मक नतीजों तक पहुंचने में सफल रहे लेकिन योजनाबद्ध तरीके से हिंसा ने हमारे प्रयासों को खराब कर दिया।”

मोहिनी मोहन ने आरोप लगाया कि इस विरोध प्रदर्शन का लक्ष्य 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करना है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक रूप से प्रेरित है ये आंदोलन। ये ऐसे लोग कर रहे हैं जो हिंसा करने की योजना बना रहे हैं। ये आंदोलन 2019 के चुनाव को ध्यान में रख कर किया गया है। हम इसका हिस्सा बनना नहीं चाहते हैं। ”

मोहन ने कहा कि भारतीय किसान संघ किसानों की मांगों के साथ कोई समझौता नहीं कर रहा था। उन्होंने कहा “हम लोन माफ करने के हक़ में नहीं हैं। पहले भी इसका कोई खास परिणाम नहीं निकला है। हमारी मांग फायदेमंद न्यूनतम समर्थन मूल्य है।”

भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय सचिव मोहिनी मोहन ने विरोध में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं की मौजूदगी पर भी हैरानी जताई।
उन्होंने कहा “दिल्ली सरकार में कोई कृषि मंत्रालय भी नहीं है। वे किसानों के विरोध प्रदर्शन में कैसे शामिल हो सकते हैं? मुझे ये बहुत अजीब लगता है।

पिछले साल मंदसौर में पुलिस की गोलीबारी में 6 किसानों की मौत हो गई थी। हड़ताल का असर मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में देखा जा सकता है।

गौरतलब है कि 8 राज्यों के किसान यूनियन ने शुक्रवार को 10 दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। हड़ताल के तहत दूध सब्जियों की सप्लाई बंद कर दी गई है। किसान यूनियन ने ये हड़ताल मध्य प्रदेश के मंदसौर किसान आंदोलन के एक साल पूरे होने पर बुलाई है।

Kisan की मुख्य मांगों में कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ाना और अपनी फसलों का अधिकतम दाम शामिल है।
-एजेंसी

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