भाई-बहन के अटूट प्रेम का साक्षी बना मथुरा का विश्राम घाट

मथुरा। आज यमद्व‍ितीया पर आज शनिवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम का साक्षी बना मथुरा में मां यमुना का प्रस‍िद्ध व‍िश्राम घाट। ब्रज नगरी मथुरा में इसे लेकर अलग ही धार्मिक मान्यता है। भैया दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं। मान्यता है कि भैया दूज के दिन भाई-बहन यमुना में साथ स्नान करें तो यम की फांस से मुक्त हो जाते हैं। अकाल मृत्यु नहीं होती है। इसी श्रद्धा भाव के साथ मथुरा के ऐतिहासिक विश्राम घाट पर यमुना स्नान के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शनिवार को ब्रह्म मुहूर्त से ही यमुना स्नान शुरू हो गया। यम की फांस से मुक्ति पाने की कामना लेकर गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचे। भाई-बहनों ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर यमुना में डुबकी लगाई। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए।

पौराणिक मान्यता
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को पूर्व काल में यमुना ने यमराज को अपने घर पर सत्कारपूर्वक भोजन कराया था। उस दिन नारकी जीवों को यातना से छुटकारा मिला और उन्हें तृप्त किया गया। वे पाप-मुक्त होकर सब बंधनों से छुटकारा पा गये और सब के सब यहां अपनी इच्छा के अनुसार सन्तोषपूर्वक रहे। उन सब ने मिलकर एक महान् उत्सव मनाया जो यमलोक के राज्य को सुख पहुंचाने वाला था। इसीलिए यह तिथि तीनों लोकों में यम द्वितीया के नाम से विख्यात हुई।

जिस तिथि को यमुना ने यम को अपने घर भोजन कराया था, उस तिथि के दिन जो मनुष्य अपनी बहन के हाथ का उत्तम भोजन करता है उसे उत्तम भोजन समेत धन की प्राप्ति भी होती रहती है।

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