Begum Akhtar: जिन्‍होंने शास्त्रीय रागों पर आधारित गजल गायकी की

आज भारत में शास्त्रीय रागों पर आधारित गजल गायकी करने वाली मल्लिका Begum Akhtar का आज जन्मदिन है । Begum Akhtar को दादरा और ठुमरी की साम्राज्ञी भी कहा जाता है। उन्होंने कुछ फिल्मों में अदाकारी का जौहर भी दिखाया । उनके गीतों-गजलों के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। लेकिन आज हम आपको उनकी जिंदगी से जुड़े ऐसे रोचक पहलुओं के बारे में बताएंगे जिनके बारे में आपने नहीं सुना होगा । बेगम अख्तर के बचपन का नाम बिब्बी था। वो फैजाबाद के शादीशुदा वकील असगर हुसैन और उनकी दूसरी पत्नी मुश्तरीबाई की बेटी थीं।

मुश्तरीबाई को जुड़वा बेटियां पैदा हुई थीं। चार साल की उम्र में दोनों बहनों ने जहरीली मिठाई खा ली थी। इसमें बिब्बी तो बच गईं लेकिन उनकी बहन का देहांत हो गया था। असगर ने भी मुश्तरी और बेटी बिब्बी को छोड़ दिया था जिसके बाद दोनों को अकेले ही जिंदगी में संघर्ष करना पड़ा। बिब्बी का मन पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगता था।

एक बार शरारत में उन्होंने अपने मास्टरजी की चोटी काट दी थी। मामूली पढ़ाई के बावजूद उन्होंने उर्दू शायरी की अच्छी जानकारी हासिल की। सात साल की उम्र से उन्होंने गाना शुरू कर दिया था। मां मुश्तरी, बिब्बी के गाने-बजाने से खुश नहीं थीं । उनकी तालीम का सफर शुरू हो चुका था। उन्होंने कई उस्तादों से संगीत की शिक्षा ली लेकिन ये सफर आसान नहीं था। 13 साल की उम्र में बिब्बी को अख्तरी बाई के नाम से जाना जाने लगा था।

उसी समय बिहार के एक राजा ने कद्रदान बनने के बहाने उनका रेप किया। इस हादसे के बाद अख्तरी प्रेग्नेंट हो गईं और उन्होंने छोटी सी उम्र में बेटी सन्नो उर्फ शमीमा को जन्म दिया। दुनिया के डर से इस बेटी को वह अपनी छोटी बहन बताया करती थीं। बाद में दुनिया को पता चला कि यह उनकी बहन नहीं बल्कि बेटी है। 15 साल की उम्र में अख्तरी बाई फैजाबादी के नाम से पहली बार मंच पर उतरीं।
यह कार्यक्रम बिहार के भूकंप पीड़ितों के लिए चंदा इकट्ठा करने के लिए कोलकाता में हुआ था। कार्यक्रम में भारत कोकिला सरोजिनी नायडू भी मौजूद थीं। वो अख्तरी बाई के गायन से बहुत प्रभावित हुईं और उन्हें आशीर्वाद दिया। बाद में नायडू ने एक खादी की साड़ी भी उन्हें भेंट में भिजवाई। बेगम अख्तर की शिष्या रीता गांगुली का कहना है कि पहली परफॉर्मेंस के समय अख्तरी बाई की उम्र 11 साल थी।

उस समय कुछ लोग उन्हें तवायफ भी समझते थे। बेगम अख्तर की शिष्या रीता गांगुली ने उन पर एक किताब भी लिखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि मुंबई के एक तवायफ संगठन ने मुश्तरी बाई से उनकी बेटी को उन्हें सौंपने का अनुरोध किया था। बदले में एक लाख रुपए देने का प्रस्ताव रखा था लेकिन मां मुश्तरी ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था। धीरे-धीरे शोहरत बढ़ी और अख्तरी बाई के प्रशंसक भी बढ़ गए।

-एजेंसी

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