सुनवाई से पहले कोर्ट में जज ने राधा-कृष्‍ण की मूर्तियों के सामने शीश नवाया

टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां की स्थानीय कोर्ट में 11 साल पुराने चोरी के एक मामले में भगवान कृष्ण और राधा की मूर्तियां बतौर सबूत पेश की गईं। पृथ्वीपुर किले में स्थित बांके बिहारी मंदिर से अदालत में ये मूर्तियां लाई गई थीं।
कोर्ट में जज ने सुनवाई से पहले मूर्तियों के सामने शीश नवाया। पहचान के बाद जज ने आदेश दिया कि मूर्तियां मंदिर में ही रखी जानी चाहिए। आरोप है कि जनवरी 2009 में रुब्बी सेन, आनंद पटेरिया, मंगल खंगार और नीरज खरे ने मंदिर से मूर्तियां और कीमती वस्तुएं चुरा ली थीं। चोरी की वारदात के सात दिन बाद पुलिस ने मूर्तियों को बरामद करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था।
इससे पहले कोर्ट ने आरोपियों को 3-3 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि आरोपियों ने दावा किया था कि उन्होंने कुछ नहीं चुराया था। इसके बाद अदालत ने मंदिर के पुजारी को नोटिस देते हुए सबूत के तौर पर मूर्तियों को कोर्ट में लाने को कहा। पुजारी का कहना है, ‘निवारी कोर्ट से एक नोटिस मिला था, जिसमें कहा गया कि इस केस में सबूत के तौर पर मूर्तियां पेश की जानी चाहिए। इसके बाद बुधवार सुबह मंदिर में भव्य आरती हुई और मूर्तियों को कोर्ट ले जाते वक्त श्रद्धालु काफी तादाद में जुलूस में शामिल हुए।’
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें इस बात की नाराजगी है कि मूर्तियां देखने के लिए जज खुद क्यों नहीं मंदिर पहुंचे। एक स्थानीय महिला ने कहा, ‘भगवान की मूर्तियां कोर्ट में ले जाने की वजह से हम नाखुश हैं। अदालत को इस मामले को सुलझाने के लिए कोई और रास्ता निकालना चाहिए था। चोरों को कोर्ट से सजा मिलनी चाहिए।’
जिला अभियोजन अधिकारी विकास गर्ग का कहना है, ‘अदालत ने मंदिर के अंदर मूर्तियां रखने का आदेश दिया है। कोर्ट में मूर्तियों को ले जाने का फैसला अदालत का था। सब कुछ कानूनी तरीके से संपन्न हुआ।’
-एजेंसियां

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