रेवेन्यू के आधार पर विप्रो को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी बनेगी HCL

बेंगलुरु। इस तिमाही (अप्रैल-जून 2018) में इंडियन आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री को अपने पदानुक्रम में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। HCL टेक्नोलॉजीज मौजूदा तिमाही में रेवेन्यू के आधार पर विप्रो को पछाड़कर TCS और इन्फोसिस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी बन जाएगी। इसका अंदाजा HCL की ओर से बुधवार को जारी रिजल्ट में से लगाया गया जिसमें मौजूदा तिमाही में राजस्व के मोर्च पर मजबूती के प्रमाण दिए गए।
अगर कॉग्निजंट को भारतीय कंपनी माना जाए तो HCL चौथी सबसे बड़ी कंपनी होगी।
दरअसल, कॉग्निजंट अमेरिका में रजिस्टर्ड है लेकिन कई मायने में इसकी जड़ें भारत में हैं। इसमें ज्यादातर एंप्लॉयीज भारतीय ही हैं। आखिरी बार 2012 में भारतीय आईटी कंपनियों के पदानुक्रम में बदलाव हुआ था। तब कॉग्निजंट ने इन्फोसिस को दूसरे स्थान से हटाया था।
पिछले महीने HCL मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) के मामले में विप्रो को पछाड़ चुका है और यह भी कहा था कि रेवेन्यू के मोर्च पर भी विप्रो को मात मिलने वाली है। बुधवार को पिछले वित्त वर्ष की आखिरी तिमाही के परिणाम से पता चला कि HCL का रेवेन्यू विप्रो से महज 2 करोड़ 40 लाख डॉलर (करीब 1 अरब 59 करोड़ रुपये) ही कम है।
विप्रो के दो बड़े ग्राहक दिवालिया हो गए जबकि अमेरिका में हेल्थकेयर बिजनेस के सुस्त पड़ने का भी असर उस पर पड़ा है। कंपनी ने कहा कि मौजूदा तिमाही में उसका रेवेन्यू बराबर रहेगा या 2 प्रतिशत तक कम हो सकता है। विप्रो का अनुमान है कि 2018-19 की पहली तिमाही में उसका राजस्व 2,015 से 2,065 मिलियन डॉलर (करीब 134 अरब से 137 अरब रुपये) के बीच रहेगा।
उधर, HCL ने तिमाही अनुमान तो जारी नहीं किया लेकिन उसने कहा कि उसके पूरे साल के रेवेन्यू में 9.5 से 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होगी। इस हिसाब से अगर मौजूदा तिमाही में HCL का रेवेन्यू 2 प्रतिशत बढ़ेगा तो आंकड़ा 2,079 मिलियन डॉलर (करीब 1 खरब 38 अरब रुपये) तक पहुंच जाएगा जो विप्रो के रेवेन्यू के पार हो जाएगा।
-एजेंसी

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