आगरा में यमुना की डिसील्टिंग के बाद बैराज भी बने: ADF

आगरा। आगरा नगर के बीच गुजर रही जीवनदायिनी यमुना नदी के बेड पर प्लास्टिक व अन्य इनआॅरगेनिक पदार्थ 5-6 मीटर तक जमा हैं, जिसको हटाया जाये ताकि यमुना जितनी बड़ी वाॅटर बाॅडी से भूगर्भ जल रिचार्ज हो सके। यमुना पर बैराज नगला पेमा के जगह पर समोगर घाट पर बनाया जाये ताकि अधिक दूरी तक जल रूका रह सके और सारे क्षेत्र में भूगर्भ जल बढ़ाकर हरियाली और कृषि को लाभ पहुंचाया जा सके। टीटीजैड के नाम पर बैराज को अभी न रोका जाये और यमुना के किनारे सघन वृक्षारोपण भी हो। यह बातें आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन (एडीएफ) के द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विश्व नदी दिवस (27.09.2020) के अवसर पर भेजी गयी मेल में कही गयीं।

एडीएफ की ओर से कथित के0सी0 जैन ने मेल में यह उल्लेख किया कि वर्तमान में यमुना नदी एक नाले में परिवर्तित हो चुकी है और वहां प्लास्टिक और इनआॅर्गेनिक पदार्थ 5-6 मीटर तक जमा है। परिणामस्वरूप यद्यपि यमुना इतनी बड़ी वाॅटर बाॅडी है लेकिन भूगर्भ जल रिचार्ज नहीं हो पाता है। जहां हम एक ओर छोटे-छोटे तालाबों और वाॅटर बाॅडी को पुर्नजीवित करने का प्रयास कर रहे हैं वहीं यमुना की डिसील्टिंग न करना हास्यादपद् लगता है। अभी हाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आगरा आगमन पर यमुना में गन्दगी की कुछ सफाई की गयी थी और सफाई के दौरान प्लास्टिक व अन्य इनआॅर्गेनिक पदार्थ निकले थे। नगर निगम द्वारा भी एत्माददौला के निकट यमुना की सफाई के दौरान प्लास्टिक पदार्थ निकले थे। एडीएफ के द्वारा सुप्रीम कोर्ट ने डिसील्टिंग के लिए याचिका भी दायर की गयी है लेकिन उसका विरोध किया जा रहा है आखिर क्यों? पोल्यूटर पे सिद्धांत के आधार पर नगर निगम आगरा को यमुना की डिसील्टिंग करायी जाये।

यमुना में जमा गन्दगी के कारण पिछले 5-6 सालों से करोड़ों की संख्या में कीड़े उत्पन्न हो रहे हैं जो ताजमहल की दीवारों पर काले व पीले धब्बे छोड़ रहे हैं। जिलाधिकारी आगरा के द्वारा गठित समिति ने वर्ष 2015 में डिसील्टिंग की संस्तुति की थी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ए0एस0आई) की विज्ञान शाखा ने भी डिसील्टिंग की मांग की है। ऐसी स्थिति में यमुना की डिसील्टिंग में देरी नहीं होनी चाहिए।

यमुना में जो नाले गिर रहे हैं वे भी यमुना को प्रदूषित कर रहे हैं और तरह-तरह का प्रदूषण यमुना में ला रहे हैं। सभी नालों को प्रदूषणमुक्त करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में नाला मण्टौला को टेप करने के लिए आदेश दिया था लेकिन 14 वर्ष बाद भी नाला मण्टौला यमुना को प्रदूषित कर रहा है।

भेजी गयी मेल में सचिव के0सी0 जैन ने यह भी उल्लेख किया कि यमुना नदी पर बैराज निर्माण की घोषणां अक्टूबर 2017 में की गयी थी और 3 वर्ष व्यतीत होने के बाद भी बैराज का कार्य प्रारम्भ नहीं हो सका है। सुप्रीम कोर्ट ने दिसम्बर 1996 में आगरा बैराज बनाने का आदेश दिया था। बैराज का निर्माण पर्यावरण मित्रवत् (इनवाॅयरमेन्ट फ्रेन्डली) है, अतः टीटीजैड के नाम पर बैराज निर्माण को नहीं रोका जाना चाहिए। अपितु बैराज निर्माण पूरे क्षेत्र में पर्यावरणीय सुधार का माध्यम बनेगा। बैराज बनने पर प्रतिवर्ष ताजमहल पर कीड़ों का आक्रमण होता है उससे भी बचा जा सकेगा। बैराज बनने पर यमुना में नौकायन के माध्यम से स्मारकों को जोड़कर पर्यटकों के लिए एक नया अनुभव दे सकेंगे। जसवंत सिंह की छत्री, बत्तीस खम्बा, नूरजहां की सराय, रामबाग, चीनी का रोजा, एत्माददौला, मेहताब बाग, ग्यारह सीढ़ि व ताजमहल की यात्रा नौकायन के माध्यम से की जा सके।

यमुना नदी के दोनों ओर सघन वृक्षारोपण स्थानीय प्रजातियों के वृक्षों का होना चाहिए। ऐसा वृक्षारोपण भी यमुना के पुर्नजीवन के लिए वरदान होगा।

एडीएफ अध्यक्ष पूरन डाबर ने भी यमुना नदी की डिसील्टिंग और बैराज बनाये जाने की मांग का समर्थन किया और कहा कि इन दोनो कार्यो इस क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में बड़ा सुधार आयेगा और हरियाली भी तेजी से बढ़ेगी।

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