बांग्लादेश: शेख हसीना का आरोप, चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप कर रहा है पाकिस्‍तान

ढाका। शेख हसीना की अगुआई वाली बांग्लादेश सरकार ने ढाका स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग पर 30 दिसंबर को होने वाले चुनाव की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने और देश के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया है।
सूत्रों ने बताया कि चुनाव से पहले बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में पाकिस्तानी हाई कमीशन की दखलअंदाजी का पता तब चला जब उसके ढाका स्थित उच्चायोग के प्रभारी उच्चायुक्त शाह फैसल काकड़ और उसी उच्चायोग के रक्षा सलाहकार ब्रिगेडियर कामरान नजीर मलिक ने बीते हफ्ते कई मौकों पर विपक्षी दल बीएनपी के 3 नेताओं से मुलाकात की।
पाकिस्तानी राजनयिकों ने पिछले दिनों कई मौकों पर ढाका के पॉश इलाके गुलशन के अलग-अलग रेस्तरां में बीएनपी के सीनियर लीडर्स से मुलाकात की थी। इन राजनयिकों से मुलाकात करने वाले लीडर्स में बीएनपी की स्थायी समिति के मेंबर मिर्जा अब्बास, खांडकर मुशर्रफ हुसैन और पूर्व मंत्री बैरिस्टर अमीनुल हक शामिल हैं। इस बीच बीएनपी के टॉप लीडर अब्दुल अवल मिंटू ने कहा है कि ये मुलाकातें पार्टी की इजाजत बगैर हुई हैं।
हसीना सरकार ने इन आरोपों पर इसी साल पाकिस्तान के नए उच्चायुक्त को पद संभालने से रोक दिया था कि पाकिस्तान के डिप्लोमैटिक मिशन का इस्तेमाल बांग्लादेश और भारत में ISI की गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया जा रहा है। ढाका में पाकिस्तान के उच्चायुक्त का पद इस साल मार्च से खाली है। पाकिस्तान सरकार ने ढाका में नए उच्चायुक्त के लिए सकलैन सर्इदा का नाम पेश किया था जिसे हसीना सरकार ने ठुकरा दिया था।
पाकिस्तान बीएनपी और उसके कट्टरपंथी सहयोगी जमात-ए-इस्लामी को 1970 के दशक से ही सपॉर्ट करता रहा है। बांग्लादेश की फॉर्मर पीएम बीएनपी लीडर खालिदा जिया पर चुनाव के लिए ISI से फंड लेने का आरोप लग चुका है। बांग्लादेश की राजनीति के जानकार ने पहचान जाहिर नहीं किए जाने की शर्त पर कहा, ‘बीएनपी हमेशा से भारत विरोधी और अपनी स्थापना के समय से ही आवामी लीग की कट्टर आलोचक रही है।’
उन्होंने कहा, ‘बीएनपी ने कमाल हुसैन के ओइक्या फ्रंट के साथ गठबंधन किया है क्योंकि पार्टी लीडर्स को लगता है कि खालिदा जिया की गैरमौजूदगी से आगामी चुनाव में उनकी संभावनाओं पर गहरा असर होगा और सरकार पर दबाव बनाने के लिए आंदोलन खड़ा करना मुश्किल होगा।’ खालिदा जिया की गैरमौजूदगी में बीएनपी भले ही एकजुट नजर आती हो लेकिन राजनीतक जानकारों का मानना है कि उसमें अंदरूनी लड़ार्इ, समन्वय की कमी और सेंटर के साथ ग्रासरूट लेवल पर बढ़ता कम्युनिकेशन गैप पार्टी की संगठनात्मक शक्ति को कमजोर कर रही है।
-एजेंसियां

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