तम्बाकू के अवैध व्यापार को रोक कर तम्बाकू जनित महामारी से बचाव संभव

तम्बाकू जनित महामारियों से पूर्ण रूप से बचाव मुमकिन है, क्योंकि यह मानव निर्मित आपदा है. हर तम्बाकू जनित रोग से बचाव मुमकिन है और हर तम्बाकू जनित मृत्यु असामयिक है. उद्योग अपने मुनाफे के लिए इस जानलेवा उत्पाद के व्यापार को बढ़ा रही है पर कीमत और जान जा रही है जनता की और सरकारों के सतत विकास के प्रयास भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं. डॉ तारा सिंह बाम जो इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरक्लोसिस एंड लंग डिजीज के एशिया पसिफ़िक निदेशक हैं, ने कहा कि मानव निर्मित तम्बाकू महामारी का पूर्ण रूप से अंत आवश्यक है क्योंकि इससे पूर्णत: बचाव मुमकिन है. जितना राजस्व आता है उससे कई गुणा अधिक नुक्सान होता है – और लाखों लोग तम्बाकू से मृत होते हैं. हर साल विश्व में 80 लाख से अधिक लोग तम्बाकू से मृत होते हैं. तम्बाकू के अवैध व्यापार पर पूर्ण रोक लगाना जरूरी है पर हमें यह बात ध्यान रखनी चाहिए कि तम्बाकू, अवैध हो या वैध, हर रूप में घातक है.

अवैध तम्बाकू व्यापार और जन स्वास्थ्य, सरकारी राजस्व

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जो लाभ तम्बाकू नियंत्रण नीतियों के अनुपालन से मिलता है वह अवैध तम्बाकू व्यापार से खतरे में पड़ जाता है – और सरकारों को राजस्व का भी नुक्सान होता है. सस्ते अवैध तम्बाकू उत्पाद से तम्बाकू जनित महामारी अधिक पनपती है और तम्बाकू नियंत्रण नीतियों और कानून का भी उल्लंघन होता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अवैध व्यापार से अंतर्राष्ट्रीय अपराधिक गतिविधियाँ भी पोषित होती हैं.

चूँकि अवैध व्यापार एक वैश्विक समस्या है इसीलिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इससे निबटना ज़रूरी है. 180 देशों से अधिक ने वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि को पारित किया है जो कानूनी रूप से बाध्य संधि है (इसका औपचारिक नाम है विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन टुबैको कण्ट्रोल). इस संधि के आर्टिकल 15, सरकारों को ताकत देता है कि आपस में मिलकर अवैध व्यापार पर अंकुश लगाया जा सके. इसी कारणवश 2012 में अवैध तम्बाकू व्यापार के उन्मूलन के लक्ष्य संजोये अंतर्राष्ट्रीय संधि की प्रक्रिया आरंभ हुई जो 2018 में लागू हो गयी. इस संधि को 62 देश पारित कर चुके हैं जिनमें भारत भी शामिल है.

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के डॉ एमजी थामिज्ह वलावन ने कहा कि भारत सरकार ने 2018 में अवैध तम्बाकू व्यापार के उन्मूलन के लिए वैश्विक संधि को पारित किया है और तब से इस दिशा में कुछ कार्य भी हुआ है. डॉ वलावन ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में अवैध तम्बाकू व्यापार कुल सिगरेट खपत का 6% है पर उद्योग इस संख्या को बढ़ा-चढ़ा कर बताता है. भारत में अवैध सिगरेट का विक्रय मूल्य है अमरीकी डालर 753 मिलियन और सरकार को अमरीकी डालर 390 मिलियन के राजस्व का नुक्सान होता है. डॉ वलावन ने बताया कि भारत सरकार, कीन्या देश के मॉडल को अपने परिवेश में संशोधित कर अपना रही है जिसमें अवैध व्यापार के उन्मूलन के लिए हो रहे सभी कार्य की कीमत, उद्योग को ही चुकानी पड़ेगी (और सरकार के लिए कोई अतरिक्त व्यय नहीं आएगा).

तम्बाकू-रहित विश्व के लिए समर्पित स्मोक-फ्री पार्टनरशिप से जुड़े लुक जूस्सेन ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारणवश, 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था 4.4% सिकुड़ गयी है जिसके कारणवश अनेक देश आर्थिक मंदी का शिकार हो रहे हैं. यदि सरकारें अवैध तम्बाकू व्यापार पर अंकुश लगाएंगी तो राजस्व में तो वृद्धि होगी ही और जन स्वास्थ्य लाभ भी मिलेगा. लुक जूस्सेन ने बताया कि हर साल अवैध तम्बाकू व्यापार से सरकारों को अमरीकी डालर 40.5 बिलियन के राजस्व का नुक्सान होता है और यदि अवैध तम्बाकू व्यापार का अंत हो तो सरकारें कम से कम अमरीकी डालर 31 बिलियन का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त करेंगी.

लुक जूस्सेन ने चेताया कि तम्बाकू उद्योग अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य नीतियों में हस्तक्षेप करता रहा है. अवैध तम्बाकू व्यापार के मुद्दे पर भी तम्बाकू उद्योग ऐसा तंत्र सुझाता है जिसका नियंत्रण उसके पास रहे. वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि में सरकारों ने इसीलिए आर्टिकल 5.3 को पारित किया जिससे कि जन स्वास्थ्य नीति में तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप पर पूर्ण विराम लगाया जा सके.

जिन सरकारों ने अवैध तम्बाकू व्यापार को पूर्ण रूप से बंद करने के लिए वैश्विक संधि को पारित किया है, उनका वादा है कि सितम्बर 2023 तक वह ऐसी प्रभावकारी प्रणाली सक्रीय कर देंगी.

दक्षिण अफ्रीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ केप टाउन की डॉ हैना रोस ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में अवैध तम्बाकू व्यापार की समस्या तो जटिल है परन्तु वहां की सरकार ने अभी तक वैश्विक संधि को पारित नहीं किया है. परन्तु दक्षिण अफ्रीका में तम्बाकू नियंत्रण और अवैध तम्बाकू व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावकारी कदम उठाये गए हैं.

कोविड-19 महामारी में जब तालाबंदी लगी तो दक्षिण अफ्रीका में 5 महीने तक तम्बाकू विक्रय पर प्रतिबन्ध लग गया था जो अन्य देशों की तुलना में, बहुत लम्बी अवधि रही (भारत में तालाबंदी के दौरान सिर्फ 6 हफ्ते तम्बाकू विक्रय प्रतिबंधित रहा था और बोत्सवाना में 12 हफ्ते).

परन्तु दक्षिण अफ्रीका में लम्बी अवधि के लिए तम्बाकू विक्रय पर प्रतिबन्ध का असर कम रहा क्योंकि अवैध व्यापार के जरिये सिगरेट बिक रही थी. एक-तिहाई तम्बाकू व्यापार वहां पर अवैध है ऐसा उनका अनुमान है.

डॉ हैना रोस के शोध से ज्ञात हुआ कि तालाबंदी में 9% धूम्र्पानी तम्बाकू सेवन को त्याग चुके थे और इनमें से दो-तिहाई, तालाबंदी और तम्बाकू विक्रय पर प्रतिबन्ध हटने के बाद भी, पुन: तम्बाकू सेवन आरंभ नहीं कर रहे हैं. परन्तु चिंताजनक तथ्य यह है कि 93% धूम्र्पानी तालाबंदी के दौरान तम्बाकू विक्रय पर प्रतिबन्ध के बावजूद अवैध तम्बाकू को खरीद पा रहे थे. अवैध सिगरेट की औसतन कीमत भी 250% बढ़ गयी थी.

डॉ हैना रोस का कहना है कि जब लोग सिगरेट को 250% अधिक कीमत पर अवैध रूप से खरीद रहे थे तो सरकारों को तम्बाकू पर कर को अनेक गुणा बढ़ा देना चाहिए जिससे कि जन स्वास्थ्य का लाभ हो और सरकार को कर राजस्व भी अधिक मिले – जो महामारी के चलते आर्थिक मंदी से निबटने में काम आएगा.

तालाबंदी के दौरान दक्षिण अफ्रीका में जब तम्बाकू विक्रय पूर्ण रूप से प्रतिबंधित रहा तो लोग सिगरेट आम तम्बाकू विक्रय केंद्र से नहीं खरीद रहे थे बल्कि परचून दुकान, पटरी दुकानदार, दोस्त रिश्तेदार या ऑनलाइन तरीके से प्राप्त कर रहे थे.

डॉ हैना रोस का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में तालाबंदी के दौरान तम्बाकू विक्रय तो प्रतिबंधित रहा पर निर्यात के लिए तम्बाकू उत्पाद बनाने पर प्रतिबन्ध नहीं था. आंकड़े बताते हैं कि तालाबंदी के दौरान तम्बाकू निर्यात काफी बढ़ गया था पर सिगरेट या तो देश के बाहर गयी ही नहीं या बाहर जा के वापस आ गयी जिससे कि अवैध रूप से बिक सके.

डॉ हैना रोस की मांग है कि दक्षिण अफ्रीका सरकार, अवैध व्यापार के अंत करने के लिए वैश्विक संधि को पारित करे और तम्बाकू उत्पाद पर कर को अनेक गुणा बढ़ाए.

वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि के सचिवालय से जुड़े रोड्रिगो सैंटोस फ़िजो ने कहा कि अवैध तम्बाकू व्यापार के पूर्ण अंत से न सिर्फ जन स्वास्थ्य को लाभ मिलेगा बल्कि सरकारें राजस्व भी अधिक पाएंगी और सतत विकास के लिए अधिक गति से कार्य कर सकेंगी.

कोविड-19 होने पर गंभीर परिणाम और मृत्यु होने की सम्भावना उन रोगों से बढ़ जाती है जिसका जनक तम्बाकू है: हृदय रोग, कैंसर, डायबिटीज, श्वास सम्बन्धी रोग आदि. सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) और आशा परिवार का मानना है कि तम्बाकू उद्योग को कानूनी रूप से जवाबदेह ठहराना ज़रूरी है जिससे कि तम्बाकू से होने वाले मानव शरीर और पृथ्वी पर सभी नुक्सान की पूरी भरपाई करने के लिए उद्योग को विवश किया जा सके.

– शोभा शुक्ला और बॉबी रमाकांत, सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस)

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