बाबू गौतम की 21 श्रेष्ठ कहानियों का संग्रह कथाकानन रिलीज़

मुंबई। ‘कथाकानन सीरीज’ के तहत आधुनिक हिंदी कहानी के प्रणेता बाबू गौतम की कथा-यात्रा का प्रारम्भ हाल में मुंबई में हुआ, जिसके तहत बाबू गौतम की 21 श्रेष्ठ कहानियों का संग्रह ‘कथाकानन- भाग-1’ रिलीज़ किया गया। आगे एक सीरीजबद्ध तरीके से उनकी कहानियों का एक संकलन हर तीसरे माह निकाला जाएगा। बाबू गौतम का एक अंग्रेजी उपन्यास एंडी लीलू (2012) और अंग्रेजी में ही एक कहानी संग्रह 2014 में छप चुके हैं।एंडी लीलू की भूमिका लिखते हुए प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने गौतम को सलाह दी थी-‘गौतम तुम्हारे भीतर एक अद्भुत कहानीकार है,पर चूंकि तुम्हारी मौलिक भाषा हिंदी है,इसलिए मेरी मानो तो तुम हिंदी में लिखो।’ गौतम ने आनंद की सलाह को याद रखा।

यह दशक हिंदी कहानी के नवोत्थान का दशक होगा, ऐसा मानना है, नई कहानी के प्रणेता बाबू गौतम का। अँधेरे गलियारों से निकल कर अब की बार जो हिंदी कहानी अपना एक नया स्वरूप लेकर आई है, उस पर हेमिंग्वे की आइसबर्ग थ्योरी की गहरी छाप है। यानी कम शब्दों में बड़ी कहानी। जिन्होंने बाबू गौतम की कहानियाँ पढ़ी हैं वे तसदीक करेंगे कि उनकी कहानियां पाठकों के जेहन में पहुँच कर अपना विस्तार पाना शुरू करती हैं।

जब उन्होंने फेसबुक के अपने पेज पर कहानियां लिखना शुरू किया तो कोई गिने चुने लोग उनकी कहानियां पढ़ते थे, कारण था उन छोटे कलेवर की सारगर्भित कहानियों से पाठकों नया नया रिश्ता। पर जैसे ही छिपे हुए अर्थ और नई लेखन शैली से पाठक आशना हुए तो रोज़ उनकी कहानियों का इंतज़ार करने लगे। आज बाबू गौतम से ज़्यादा उनके पाठकों को उनकी कहानियां याद हैं। कहानियाँ ऐसी हैं कि सीधी जेहन में उतर जाती हैं और कई कई रात सोने नहीं देती। कहानियों के विषय एक से एक अलग, लगता है कैसे एक ही लेखक इतने विविध विषयों पर एक से एक दमदार कहानी लिख सकता है? फिर मांग बढ़ने लगी उनके कहानी संग्रह की। लगभग चार सौ कहानी लिख लेने के बाद बाजार में कोई संग्रह नहीं होना एक अजीब सी बात थी। प्रकाशकों ने जब लेखक से बात की तो उसका यही कहना था कि अगर भारी संख्या में आप छापो तभी मैं आपसे अनुबंध करूँगा, वर्ना मुझे छपने का कोई शौक नहीं है।

अब ‘कथाकानन भाग-1’ के रिलीज़ के दौरान जिसने भी एक या दो कहानियां पढ़ी, वह तुरंत उनका मुरीद हो गया।बिना किसी विज्ञापन के कथाकानन टीम को हर रोज़ 10-12 पुस्तकों के आर्डर आ रहे हैं।साहित्यप्रेमी पाठकों से मिले इस अप्रत्याशित प्रतिसाद से गौतम बाबू का प्रेरित होना लाजिमी था।उन्होंने कथाकानन टीम को निर्देश दिया है कि अब पीछे मुड़ कर देखने की ज़रूरत नहीं है। चूंकि उद्देश्य है एक लाख प्रतियां प्रकाशित करने का और यह तभी संभव है जब हर तबके के पाठक तक किताब पहुंचाई जा सके। इसलिये कीमत बहुत कम रखी गई है। घर बैठे 50 रुपये में हर भाग उपलब्ध कराया जायेगा। गौतम का मानना है कि हिंदी कहानी को लेखन में ही नहीं, बल्कि प्रकाशन में भी एक नए आंदोलन की दरकार है।

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