प्रतिबंधित क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रही है अजरबैजानी सेना

अजरबैजान और आर्मीनिया ने सोमवार को एक-दूसरे पर रिहाइशी इलाक़ों में हमले करने का आरोप लगाया है. दोनों देशों का कहना है कि दक्षिण कॉकेशस इलाक़े में पिछले 25 सालों में हो रही सबसे घातक लड़ाई में मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है.
पश्चिमी मीडिया से मिल रही ख़बरों के अनुसार पर नागोर्नो-काराबाख़ के रिहाइशी इलाक़ों में अज़रबैजानी सैना क्लस्टर बम गिरा रही है.
अंतर्राष्ट्रीय समझौतों के अनुसार क्लस्टर बम का इस्तेमाल प्रतिबंधित है. हालांकि न तो अज़रबैजान ने और न ही आर्मीनिया ने इससे जुड़े अंतर्राष्ट्रीय कन्वेन्शन पर हस्ताक्षर किए हैं.
ब्रितानी अख़बार टेलिग्राफ़ ने कहा है कि नागोर्नो-कराबाख़ की राजधानी स्टेपनाकियर्ट में सप्ताहांत में हुई भीषण बमबारी के दौरान क्लस्टर बमों का इस्तेमाल देखा गया है.
क्लस्टर बम ख़ास तरह के बम होते हैं जो एक साथ सैंकड़ों छोटे-छोटे बमों से बनते हैं. फटने पर ये बड़े इलाक़े में फैल जाते हैं और अधिक संख्या में लोगों को घायल कर सकते हैं.
हालांकि नागोर्नो-काराबाख़ में युद्ध ख़त्म होने के आसार बहुत कम दिख रहे हैं.
आर्मीनिया और अज़रबैजान की सेनाओं के बीच रविवार को नागोर्नो-काराबाख़ में लड़ाई बढ़ गई है और दोनों तरफ़ से भारी गोलीबारी होने की ख़बरें आई हैं. 27 सितंबर से शुरु हुए इस टकराव में अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं.
सामाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अज़रबैजान का कहना है कि नागोर्नो-काराबाख़ के बाहर के उसके शहरों पर हमले के बाद लड़ाई पाइपलाइंस के नज़दीक पहुंच गई है जहां से यूरोप को गैस और तेल की आपूर्ति होती है.
लोगों से सेना में शामिल होने की अपील
तुर्की में सोमवार को दिखाए गए एक इंटरव्यू में अज़रबैजान के राष्ट्रपति इल्हमा अलीयेव ने कहा कि इस लड़ाई को रोकने के लिए आर्मीनिया को नागोर्नो-काराबाख़ और उसके आसपास के इलाक़ों से अपनी सेना हटानी होगी.
उन्होंने रविवार को राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था, “हम किसी और देश की ज़मीन पर नज़र नहीं डाल रहे हैं लेकिन जो हमारा है उसे हमारा होना चाहिए.”
वहीं, आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान ने भी पीछे हटने के कोई संकेत नहीं दिए हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़ उन्होंने सोमवार को फ़ेसबुक पर पिछले साल सेना से अलग होने वाले सैन्यकर्मियों से लड़ाई में शामिल होने की अपील की.
फ़ेसबुक पर उन्होंने लिखा, “मैं उन लोगों को फिर से बुलाना चाहता हूं और उनसे कहना चाहता हूं कि वो अपने देश के लिए अस्तित्व की लड़ाई लड़ने जा रहे हैं.”
युद्ध ख़त्म करने की अपील
नाटो प्रमुख जेंस स्टोलनबर्ग ने दोनों पक्षों से नागोर्नो-काराबाख़ में जारी तुरंत लड़ाई ख़त्म करने के लिए कहा है. उन्होंने तुर्की के दौरे के दौरान कहा कि इसका कोई सैन्य समाधान नहीं है.
वहीं अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने भी कहा है कि युद्ध तो तुरंत रोका जाना चाहिए.
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “ओएससीई मिंस्क समूह के सह-अध्यक्ष देशों के विदेश मंत्रियों ने नागोर्नो-काराबाख़ और उसके आसपास के इलाक़ों में हिंसा बढ़ने की निंदा की है. साथ ही तुरंत और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की है.” ओएससीई यानी ऑर्गेनाइजे़शन फ़ॉर सिक्योरिटी एंड कॉर्पोरेशन इन यूरोप एक क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन है.
नागोर्नो-कराबाख़ में शांति बनाए रखने के लिए 1929 में फ्रांस, रूस और अमरीका की अध्यक्षता में ओएससीई मिंस्क समूह की मध्यस्थता में शांति वार्ता शुरू हुई थी.
न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी के मुताबिक़ रूस, अमरीका और फ्रांस ने सोमवार को अर्मीनिया और अज़रबैजान से ‘बिना शर्त संघर्षविराम’ के लिए कहा है.
तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि कथित तौर पर रिहाईशी इलाक़ों को निशाना बनाकर टकराव बढ़ाने से इलाक़े में स्थिरता के लिए ख़तरा पैदा हो गया है लेकिन इल्हाम अलीयेव ने अमरीका, रूस और फ्रांस की मध्यस्थता की पेशकश को नकार दिया है. उन्होंने कहा कि किसी भी शांति प्रक्रिया में तुर्की का शामिल होना जरूरी है.
इस बीच कनाडा ने सोमवार को तुर्की को हथियार देने से मना कर दिया है. सामाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार सोमवार को कनाडा ने नैटो के सदस्य तुर्की को हथियार देने से मना कर दिया है. कनाडा का कहना है कि आर्मीनिया-अज़रबैजान की लड़ाई में इन सैन्य उपकरणों के कथित इस्तेमाल की जांच होने तक इस तरह के समझौतों को निलंबित किया जा रहा है.
मौजूदा हालातों के मद्देनज़र रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी आर्मीनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिन्यान से लड़ाई में हुए गंभीर नुक़सानों को लेकर चर्चा की है और जल्द युद्धविराम की घोषणा करने की अपील की है.
आर्मीनिया की राजधानी येरेवान में लोगों ने काराबाख़ में लड़ रही अपनी सेना के लिए समर्थन जताया है. यहां के टाउन हॉल में एक बड़ी स्क्रीन लगाई गई है जिसमें देशभक्ति गाने बज रहे हैं और वहां रहने वाले लोगों ने गलियों में झंडे फहराने शुरू कर दिए हैं.
फिलहाल आर्मीनिया और अज़रबैजान दोनों ही पक्ष युद्धविराम की बात पर किसी देश की सलाह नहीं सुन रहे हैं और पिछले कुछ दिनों से ये लड़ाई और गंभीर होती जा रही है. दोनों ही पक्ष अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.
एक हफ़्ते पहले शुरू हुई इस लड़ाई में अब तक कम से कम 200 लोगों की जान जा चुकी है.
इससे पहले नागोर्नो-काराबाख़ में साल 2016 में भी भीषण लड़ाई हुई थी जिसमें 200 लोगों की मौत हुई थी.
-BBC

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