Ayodhya Verdict: बाबरी की बरसी पर दायर की जाएगी पुनर्विचार याचिका

अयोध्‍या। Ayodhya मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला राम मंदिर निर्माण के पक्ष में रहा है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद Ayodhya केस में सुनाए गए फैसले पर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा। उसकी तरफ से यह पुनर्विचार याचिका बाबरी विवाद की बरसी पर यानी 6 दिसंबर को दायर की जाएगी। यह याचिका जमीयत के यूपी जनरल सेक्रटरी मौलाना अशद रशीदी की ओर से दायर की जाएगी, जो कि अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के 10 याचिकाकर्ताओं में से एक हैं।
इस बारे में रशीदी ने बताया, ‘डॉक्युमेंटेशन का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। हमारी लीगल टीम पुनर्विचार याचिका का मसौदा तैयार कर रही है और इस विवरण को अंतिम रूप देने के लिए अभी कुछ दिनों की जरूरत है।’
‘पहले वाला हिस्सा विरोधाभासी है’
जमीयत के यूपी जनरल सेक्रटरी मौलाना अशद रशीदी ने कहा है कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का पहला हिस्सा बाद वाले से ‘विरोधाभासी’ है। उन्होंने कहा, ‘और हमारी विनम्र दलील है कि सुप्रीम कोर्ट हर विरोधाभास की व्याख्या करता है। कोर्ट ने इस बात को स्वीकार भी किया है कि मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई थी और दिसंबर 1992 में हुआ मस्जिद विवाद अवैध है। इसके बावजूद कोर्ट ने दूसरे पक्ष को जमीन सौंप दी। यह कैसे संभव है?’
Ayodhya Verdict पर पुनर्विचार याचिका
बता दें कि 17 नवंबर को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस बात की घोषणा की थी कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा के लिए अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करेगा। उन्होंने फैसले पर कहा था कि यह न तो सबूतों के आधार पर सटीक बैठता है और न ही किसी तर्क के हिसाब से उचित है। गौरतलब है कि 100 वर्ष पुराने जमीयत ने सबसे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा वर्ष 2010 में अयोध्या पर दिए गए निर्णय के खिलाफ एक समीक्षा दायर की थी।
माओवादियों ने बंद का किया आह्वान
उधर प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) ने Ayodhya मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए 8 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। माओवादी सेंट्रल कमेटी के प्रवक्ता अभय ने एक बयान जारी कर कहा कि पार्टी 8 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल करने से पहले 6 और 7 तारीख को फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करेगी। उन्होंने इस आंदोलन में शामिल होने की सेक्युलर, डेमोक्रैटिक और अन्य से अपील की है।
-एजेंसियां

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