केडी हास्पीटल में World Heart Day पर मरीजों को किया जागरुक

केडी मेडीकल कालेज, हास्पीटल एंड रिसर्च सेंटर में World Heart Day पर मरीजों को हृदय संबंधी रोगों के बारे में जानकारी देकर किया जागरुक
मथुरा। केडी मेडीकल कालेज, हास्पीटल एंड रिसर्च सेंटर में World Heart Day पर जनरल मेडिसिन में पहुंचे मरीजों को हृदय संबंधी रोगों के बारे में जानकारी देकर जागरुक किया गया। बड़ी संख्या में मरीजों के साथ आए तीमारदार और मरीजों ने Heart संबंधी बताई गई सावधानी को दूसरे लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। साथ अपने जीवन में इन सावधानियों को अपनाने की कसम ली।

World Heart Day पर एकेडमिक एंड रिसर्च विंग के निदेशक डा. अशोक कुमार धनविजय, कार्डियोलाॅजिस्ट डा. राजीव गुप्ता और डा. वरुण सिसौदिया ने दी जानकारी
केडी मेडीकल कालेज, हास्पीटल एंड रिसर्च सेंटर के एकेडमिक एंड रिसर्च विंग के निदेशक डा. अशोक कुमार धनविजय ने बताया कि हृदय रोग पश्चिमी सभ्यता की जीवन शैली से भी बढ़ रहे हैं। इसी से लोगों को भारतीय संस्कृति की जीवन शैली को अपनाना चाहिए। मल्टी स्पेशियेलिटी केडी हास्पीटल में प्रतिदिन 200 से 250 मरीजों की हृदय संबंधी रोगियों की ओपीडी है। इसमें रिहूमेटिक हार्ट डिजीज के 15-20 मरीज आ रहे हैं। हालांकि हृदय संबंधी बीमारियों का मौसम से कोई लेना देना नहीं है। इससे इसके ज्यादा घटने या बढ़ने की संभावना काफी कम होती है। हास्पीटल में अत्याधुनिक ईको मशीन है। इस पर शहर की अपेक्षा एक तिहाई से भी कम मात्र 600 रुपये में जांच की जाती है। गरीब मरीजों की निशुल्क जांच की जाती है। हास्पीटल में टीएमटी टेस्ट की सुविधा मात्र 500 रुपये की जाती है। इन जांचों की कोई प्रतिक्षा सूची नहीं है।

ब्रज में ह्दय रोगों के प्रति जनजागरुकता का अभाव, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, अनुचित खानपान, लाइफ स्टाइल और मोटापा हैं हृदय रोगों के प्रमुख कारण
केडी हास्पीटल की जनरल मेडिसिन यूनिट के एमबीबीएस, एमडी एंड फेलोशिप इन कार्डियोलाॅजी फ्रोम यूएसए कार्डियोलाॅजिस्ट डा. राजीव गुप्ता ने बताया कि ब्रज में हृदय जागरुकता का अभाव और प्रशिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी रोगियों की संख्या बढ़ने की भी एक वजह है। अकुशल चिकित्सकों से हृदय रोगों का इलाज कराने से बीमारी लाइलाज होती चली जा रही हैं। उन्होंने बताया कि अब केडी हास्पीटल में तुरंत जन्मे या गर्भस्थ शिशु के हृदय की जांच भी की जा सकेगी। नई मशीन लगने के बाद गर्भस्थ शिशु के हृदय की भी जांच कर पाना संभव हो सकेगा।

केडी हास्पीटल की जनरल सर्जनी यूनिट के एमबीबीएस एमएस सर्जन डा. वरुण सिसौदिया ने कहा कि सीने में बायीं ओर कंधे तक होने वाला तीखा चुभने वाला दर्द, घबराहट, सांसें फूलना जैसे लक्षण हृदयाघात या बीमारी के हो सकते हैं। मधुमेहग्रस्त मरीजों में तो ये भी लक्षण परिलक्षित नहीं होते हैं। उनमें मुख्यत: घबराहट और पसीना आने के लक्षण दिखाई देते हैं। इसका मधुमेह रोगियों का खास ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि अनुचित खानपान, लाइफ स्टाइल और मोटापा हृदय रोगों के प्रमुख कारण हो सकते हैं। हृदय रोगों से बचने के लिए नियमित व्यायाम करें। खाने में वसा की मात्रा को घटाएं। पूफा-मूफा युक्त तेलों का उपयोग करें। मोटापा घटाएं। जंक फूड के उपयोग से बचें।

ह्दय रोग आज के समय में गंभीर बीमारी-डा. राम किशोर अग्रवाल
मथुरा। आरके एजुकेशन हब के चैयरमेन डा. राम किशोर अग्रवाल और एमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि हृदय रोग आज के समय में गंभीर बीमारी है। ब्रजवासियों को इस बीमारी को गंभीरता से लेना चाहिए। केडी हास्पीटल में आकर ब्रजवासी नियमित चेकअप कराएं। बीमारी निश्चित होने पर समय से इलाज लें। सही समय पर उपचार और परहेज से ही हृदय रोगों से निजात और रोकथाम संभव है। उन्होंने कहा कि एक ही कैम्पस में मौजूद विभिन्न रोगों के चिकित्सकों की टीमें बेहतरीन तरीके से आपका इलाज करने में सफल रहती है।

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